नि:शक्त बच्चों के शामिल होने से पूरा होगा शक्षिा का लक्ष्य : डीएम

Published at :03 Dec 2015 9:35 PM (IST)
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नि:शक्त बच्चों के शामिल होने से पूरा होगा शक्षिा का लक्ष्य : डीएम

नि:शक्त बच्चों के शामिल होने से पूरा होगा शिक्षा का लक्ष्य : डीएमफोटो : 3 बांका 13 और 14 : कार्यक्रम का उद्घाटन करते जिलाधिकारी व उपस्थित बच्चे प्रतिनिधि, बांकानि:शक्तता दिवस के अवसर पर गुरुवार को स्थानीय टाउन हॉल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें जिले के कई विद्यालय के बच्चे उपस्थित हुए. […]

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नि:शक्त बच्चों के शामिल होने से पूरा होगा शिक्षा का लक्ष्य : डीएमफोटो : 3 बांका 13 और 14 : कार्यक्रम का उद्घाटन करते जिलाधिकारी व उपस्थित बच्चे प्रतिनिधि, बांकानि:शक्तता दिवस के अवसर पर गुरुवार को स्थानीय टाउन हॉल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें जिले के कई विद्यालय के बच्चे उपस्थित हुए. कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी डा निलेश देवरे, जिला शिक्षा पदाधिकारी अभय कुमार, एडीपीआरओ दिलीप सरकार सहित अन्य पदाधिकारियों ने किया. सर्व शिक्षा अभियान के आयोजित इस कार्यक्रम में जिलाधिकारी डॉ देवरे ने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान के लक्ष्य के अनुरूप सबों को शिक्षा की कल्पना शारीरिक चुनौतियों से जूझ रहे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सम्मिलित किये बिना नहीं की जा सकती है. ऐसे विशेष श्रेणी के बच्चों की विशिष्ट शैक्षिक व्यवस्था अतिरिक्त संवेदनशीलता के साथ करने की आवश्यकता है. ताकि इन बच्चों का भी समावेशन भली भांति मुख्य धारा की शिक्षा के साथ हो सकें. नि:शक्त बच्चों में प्राय: अलग अलग परिवेश में अलग अलग समस्या पाये जाते है. लेकिन अधिकतर समस्या घर के वातावरण अथवा घर तथा विद्यालय दोनों परिवेशों में पाये जाते है. उनके प्रबंध हेतु अभिभावक की अहम भूमिका होती है. इस दौरान विशेषज्ञों के द्वारा अपनी सलाह दी गयी. उन्होंने कहा कि इसके लिए अभिभावक को सही दिशा निर्देश की आवश्यकता होती है जो शिक्षक प्रशिक्षण, अभिभावकों प्रशिक्षण आदि कार्यक्रम सक्रिय मदद करता है. यदि अभिभावक प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होते है तो उनको काफी लाभ होता है. अपने नि:शक्त बच्चे के पालन में उनको किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती है. सबी प्रखंडों में लगाया जाये विशेष शिविर जिले के सभी प्रखंडों में जांच शिविर लगाने की मांग अभिभावकों ने की. ताकि प्रत्येक प्रखंड में विशेष आवश्यकता वाले बच्चे की शारीरिक कठिनाइयों एवं उसकी तीव्रता की भली-भांति जांच हो सके. साथ ही सहायक एवं उपकरण की उपलब्धता होनी चाहिए. एक वर्ष के विशेष प्रशिक्षण का भी आयोजन किया जाना चाहिए.

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