बोरिंग बाद नहीं होगी पानी की शिकायत टेरामीटर से भू-गर्भीय जल की होगी जांच
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Aug 2019 8:06 AM (IST)
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विभांशु, बांका : अब बोरिंग के बाद पानी नहीं आने की शिकायत नहीं होगी. बोरिंग के पूर्व जमीन के अंदर पानी समुचित मात्रा में यह या नहीं इसकी जांच की जायेगी. जी हां, जिले के 12 स्थानों पर उच्च प्रभाव वाले नलकूप लगाने के लिए टेरामीटर से भू-गर्भीय जल की उपलब्धता जांच करने की योजना […]
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विभांशु, बांका : अब बोरिंग के बाद पानी नहीं आने की शिकायत नहीं होगी. बोरिंग के पूर्व जमीन के अंदर पानी समुचित मात्रा में यह या नहीं इसकी जांच की जायेगी. जी हां, जिले के 12 स्थानों पर उच्च प्रभाव वाले नलकूप लगाने के लिए टेरामीटर से भू-गर्भीय जल की उपलब्धता जांच करने की योजना स्वीकृत की गयी है.
इससे बोरिंग करने के बाद उसके फेल होने की समस्या दूर होगी. टेरामीटर से यह पड़ताल की जायेगी कि जिस जगह पानी की उपलब्धता सर्वाधिक मात्रा में है, उसी जगह को चिह्नित कर बोरिंग की जायेगी. दरअसल, गर्मी के दिनों में अक्सर जल स्तर नीचे सरक जाता है. जिससे पेयजल संकट गहरा जाता है. मौजूदा समय में यह परिस्थिति इस जिले में बन गयी है.
खासकर चांदन व कटोरिया का इलाका जल-संकट से काफी ग्रसित है. लिहाजा, इन क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर टेरामीटर से जांच करने की रणनीति है. वहीं टेरामीटर से जांच में करीब 88542 रुपये खर्च किये जायेंगे. ज्ञात हो कि कुल बांका सहित कुल 14 जिला में यह योजना चलायी जायेगी. विभागीय जानकारी के मुताबिक इस महीने टेरामीटर से जांच शुरू की जायेगी.
पीएचइडी जल संकट को देखते हुए टेरामीटर से जांच कर ग्रैवेल पैक्ड चापाकल व उच्च जल प्रदायी नलकूप निर्माण के लिए किया जायेगा स्थल का चयन
12 स्थानों पर उच्च सप्लाइ ट्यूबवेल बनेगा
वित्तीय वर्ष 2019-20 में टेरामीटर से भू-गर्भीय जल की उपलब्धता जांच के उपरांत 12 स्थानों पर उच्च सप्लाय ट्यूबवेल व चापाकल का निर्माण किया जायेगा. जानकारी के मुताबिक टेरामीटर से जांच के बाद रिपोर्ट के आधार पर नल कूप निर्माण के लिए डीपीआर तैयार किया जायेगा. जिसके बाद चिह्नित स्थान पर इसका निर्माण कराया जायेगा.
विभागीय जानकारी के मुताबिक जिले में तीन स्थानों पर ग्रैवेल पैक्ड चापाकल का निर्माण किया जायेगा. जबकि कुल नौ स्थानों पर उच्च सप्लाय ट्यूबवेल का निर्माण किया जायेगा. इसमें करोड़ों की राशि खर्च करने की योजना है. हालांकि, जांच के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा कि नलकूपों का निर्माण किन-किन स्थानों पर किया जायेगा.
स्थल चयन के बाद राशि आवंटित कर निर्माण कार्य किया जायेगा शुरू
टेरामीटर से भू-गर्भीय जल की उपलब्धता जांच की योजना स्वीकृत हुई है. मौजूदा समय में कुल 12 स्थानों पर भू-गर्भीय जल मौजूदगी की जांच होगी. इसके बाद चिह्नित स्थानों पर नलकूप से संबंधित निर्माण कार्य शुरू किया जायेगा. जल्द ही सर्वेक्षण के लिए क्षेत्र का चयन कर सूची उपर भेजी जायेगी.
डेविड कुमार चतुर्वेदी, कार्यपालक अभियंता, पीएचइडी, बांका
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