आजादी का अमृत महोत्सव: मिथिलांचल के गांवों में अंग्रेजों ने चलाया था दमन-चक्र

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 03 Aug 2022 6:00 AM

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गरीबों की झोपड़ियां उजाड़ी गयी, कोड़े बरसाये गये. महिलाओं को प्रताड़ित किया गया. झंझारपुर के आसपास के सिमरा, इमादपट्टी, ओलीपुर, हैठीवाली समेत दजर्नों गांवों में पुलिस ने कहर बरपाया था. बिहार अभिलेखागार द्वारा प्रकाशित पुस्तक 1942 आंदोलन के हर पन्ने पर अंग्रेजी सरकार की जुल्म व प्रताड़ना की कहानी है

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आजादी का अमृत महोत्सव: भारत छोड़ो आंदोलन (1942) में शांत माने जाने वाले मिथिलांचल के लोगों पर ब्रिटिश सरकार ने बड़े जुल्म किये थे. गरीबों की झोपड़ियां उजाड़ी गयी, कोड़े बरसाये गये. महिलाओं को प्रताड़ित किया गया. झंझारपुर के आसपास के सिमरा, इमादपट्टी, ओलीपुर, हैठीवाली समेत दजर्नों गांवों में अंग्रेज पुलिस ने कहर बरपाया था. बिहार अभिलेखागार द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘1942 आंदोलन’ के हर एक पन्ने पर अंग्रेजी सरकार की जुल्म और प्रताड़ना की कहानी दर्ज है. इमादपट्टी, ओलीपुर, सिमरा, रूपौली, हैठीवाली, रैयाम आदि गांवों का जिक्र इस पुस्तक में है, अंग्रेजी पुलिस ने भारी आतंक फैलाया, लूटपाट की ओर खून-खराबा किया. ईमादपट्टी गांव का तिनका-तिनका लूट लिया गया. रात के लुटेरे जाते तो दिन के लुटेरे आ जाते. दो महीने तक गांव तबाह होता रहा. दरभंगा, बहेरा, मधुबनी, बेनीपट्टी, झंझारपुर, खजौली, जयनगर, लदिनया, मधवापुर, फुलपरास, लौकही और लौकहा में भीषण अत्याचार हुए.

दरभंगा राज ग्रुप के ऑफिस पर कब्जा

चार सितंबर, 1942 को बिरौल थाना के रसियारी गांव में पुलिस आयी और दरभंगा राज ग्रुप के ऑफिस पर कब्जा कर लिया. दूसरे दिन वे पाली आये. यहां पुलिस को देख डंके पर चोट पड़ने लगी और लाठी-भाले से लैस ग्रामीणों की भीड़ लग गयी. इसलिए पुलिस यहां आतंक फैला नहीं सका. पुलिस चुपचाप कनकलाल झा के पास आयी और कहा, हम आपको गिरफ्तार करते हैं. जाले थाना के रतनपुर गांव में 26 अगस्त को पुलिस के साथ पूरी फौज पहुंची. यहां उसने राममूर्ति शर्मा नामक किसान का घर जला दिया. इस अगलगी का लोगों ने काफी विरोध किया. इसके बाद पुलिस ने गोली चला दी. इससे कई ग्रामीण घायल हो गये. इसे गांव वाले और उत्तेजित हो गये. चौक पर वे जमा हुए और सामने से आते दिख रहे गोरों पर हमला कर दिया. पुलिस ने एक बार फिर गोली चला दी. इससे दो स्थानीय लोगों की मौत हो गयी. इस घटना के बाद कुछ लोग जाले पुलिस की भेदिया बन गये और उनकी सूचना पर लोगों पर जुल्म शुरू हो गया. इस गोली कांड से मधुबनी कुछ आतंकित हुआ पर अगले दिन शहीदों को लेकर जो जुलूस निकला, उससे छात्र बहुत उत्साहित दिखे.

मधुबनी जेल से 79 कैदी हुए थे फरार

17 अगस्त, 1942 को मधुबनी जेल से 79 कैदी भाग निकले. मधुबनी में अखिल भारतीय चर्खा संघ की बिहार शाखा का केंद्र था. 22 अगस्त को सकरी थाने के मकरमपुर में पुलिस द्वारा घरों को लूटा जाना शुरू हो गया. सागरपुर के बहुत-से लोग खर-पतवार लेकर मकरमपुर पहुंच गये. वहां से कुछ राख उठा कर जिला पषर्द की सड़क के किनारे रखवा दिया और अंग्रेजी में एक पोस्टर लिख कर टांग दिया. पोस्टर में लिखा गया था कि अंग्रेजी साम्राज्य की राख को देखो. इसके बाद गोरों ने सरसो पाही टोले में हरे मिश्र और उनके चार भाइयों के घर जला दिये. जिस समय हरे मिश्र का घर जल रहा था, लोग सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे, उन पर एक गोरे ने गोली चलायी. एक आदमी घायल हो गया. बाद में भीड़ शांत हो गयी. सकरी का लोहट मिल गोरों का अड्डा बन गया था. सकरी खादी भंडार में मिस्टर सेल्सबरी दल-बल के साथ आये और खादी भंडार को जला दिया. परसौनी में कई घरों को लूटा. बलिया में कई घरों में आग लगा दी गयी. 25 अगस्त को मिस्टर सेलस्बरी सिमरी खादी विद्यालय पहुंचे. यहां भी लूट-मार मचायी गयी. बेनीपट्टी थाने की बंदूकों की खोज में उसने वहां की तलाशी ली. बक्शों को तोड़ डाला गया. स्त्रियों के जेवर भी छीन लिये गये. 25 अगस्त, 1942 को मिस्टर सेल्सबरी झंझारपुर पहुंचा. खादी भंडार के एक घर को जलाते हुए महादेव मिश्र नाम के किसान की खोज की. पता चला कि महादेव मिश्र विदेश्वर स्थान की ओर गये हैं. सबके सब बाबा विदेश्वर मंदिर परिसर में प्रवेश कर गये. वहां किसी कांग्रेसी को नहीं देख पुजारियों की पिटाई की. पुजारियों ने मार सहा, लेकिन मिश्र का पता नहीं बताया. इससे निराश गोरी सरकार ने झंझारपुर, रेलवे स्टेशन, मधेपुर और फुलपरास के पुलिस थाना इलाके में भारी लूटपाट की और यहां बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया.

कई गांव में अंग्रेज पुलिस ने बरपाया था कहर

पहली सितंबर, 1942 को तत्कालीन एसपी के आने के बाद दरोगा ने सिमरा गांव के रमाकांत ठाकुर, हनौली के महादेव मिश्र,कणर्पुर के सत्यदेव झा, रूपौली के दिगंबर झा और हैठीवाली के निभर्य नारायण झा और शहीद जागेश्वर झा के घरों को लूटा. एक कांग्रेसी रामाधीन झा पर घोड़ा दौड़ा कर पिटाई की गयी. इससे बाद में उनकी मौत हो गयी. मेहथ में फेकन झा और धनेश्वर, रैयाम में रामचंद्र झा के घरों को लूटा गया. झंझारपुर थाने की पुलिस की टीम ने रैयाम की दुसाध टोली पर हमला किया. पुलिस ने फायरिंग की. गोली की आवाज सुन लोग एकदम-से चौक पड़े. गांव बाढ़ के पानी से घिरा हुआ था. इसलिए लोग भाग कर उधर ही आ रहे थे, जिधर पुलिस खड़ी थी. सैकड़ों आदमी के सिर फूटे और लोग लहूलुहान हुए. लगभग दो घंटे तक पुलिस की कार्रवाई चलती रही. सभी को एक जगह इकट्ठा किया गया. उनके सामने मकान लूट लिये गये. नृशंस अत्याचार के बाद पुलिस वालों और चौकीदारों ने स्त्रियों और पुरुषों को एक ही रस्सी में बांध दिया. महिलाओं के साथ बदतमीजी की गयी. इसके बाद सभी को एक ही रस्सी में बांध कर थाने ले जाया गया. कुछ दूर जाने पर थाने के एक भेदिया ने दस-दस रुपये की दर से थानेदार को पैसा देने की पेशकश की. इसके बाद अधिकतर लोगों को रिहा कर दिया गया. मात्र सात लोगों ने दारोगा को पैसा देने से इनकार कर दिया,जिसे उनका चालान कर दिया गया. इनमें से छह लोगों को चार-चार साल की सजा मिली.

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