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मोहम्मदगंज बराज से उत्तर कोयल नहर में छोड़ा जा रहा क्षमता के अनुसार पानी

Updated at : 30 Jul 2024 9:32 PM (IST)
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मोहम्मदगंज बराज से उत्तर कोयल नहर में छोड़ा जा रहा क्षमता के अनुसार पानी

रोस्टर को ताक पर रखकर आधे से अधिक पानी खपत कर रहा झारखंड

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औरंगाबाद/कुटुंबा. जिले के दक्षिणी क्षेत्र के किसानों की जीवन रेखा उत्तर कोयल नहर इस बार खेतिहरों की अपेक्षा पर खरे नहीं उतर पा रही है. धान रोपनी का उपयुक्त समय सावन व पुष्य नक्षत्र बीत रहा है, पर अधिकतर क्षेत्रों में अब तक खेत परती पड़ी हुई है. किसान बारिश के लिए आसमान को निहार रहे हैं. कोयल नहर से अधिनस्थ क्षेत्रों में अब तक पूरी तरह से सिंचाई नहीं हुई है. कृषि विशेषज्ञों की बात माने तो जुलाई के बाद धान की फसल लगाने से अच्छी उपज नहीं होती है. उत्पादन लागत में ह्रास होता है. फिलहाल पलामू जिले के भीम बराज मोहम्मदगंज से उत्तर कोयल नहर में सिंचाई के 2062 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है. इसमें से आधा से अधिक पानी झारखंड में खपत हो जा रहा है. वहीं बॉर्डर एरिया के 103 आरडी पर बिहार को मात्र 1000 क्यूसेक पानी प्राप्त हो रहा है. इसमें कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र के 168 आरडी पर अंबा डिवीजन को 470 क्यूसेक पानी मिल रहा है. अंबा के एग्जिक्यूटीव इंजीनियर कुमार आनंद वर्द्धन पूषण ने बताया कि इसमें से 260 क्यूसेक पानी औरंगाबाद डिवीजन क्षेत्र में उपलब्ध कराया गया है. झारखंड के अधिकारी और किसान रोस्टर का पालन नहीं कर रहे हैं. बिहार और झारखंड विभाजन के समय दोनों राज्यों के बीच आपसी समझौता में एक रोस्टर तैयार किया गया था. उक्त रोस्टर के अनुरूप डिस्चार्ज के 90 प्रतिशत पानी बिहार को और मात्र 10 प्रतिशत पानी झारखंड को खपत करना था. इसी अनुपात में नहर के मेनटेनेंस में भी राशि खर्च करना था. हालांकि, झारखंड के विभिन्न वितरणियों को संचालन करने के लिए अधिकतम 350 से लेकर 400 क्यूसेक पानी की जरूरत है. शेष 600 क्यूसेक पानी कहां चला जा रहा है. इसके बारे में किसी अधिकारी को पता नहीं है. खरीफ मौसम में खेत जुताई और धान रोपाई के ऐन वक्त जल संसाधन विभाग द्वारा लागू की गई तांतिल व्यवस्था किसान हित में नहीं है. ऐसे में खेतिहरों को काफी परेशानी हो रही है. रसलपुर गांव के शिवनाथ पांडेय, रामपुर गांव के मृत्युंजय सिंह, चंद्रपूरा के सुशील मिश्रा आदि किसानों ने बताया कि बसडीहा वितरणी में दो-तीन पानी आया. इसके बाद खेतों की जुताई कराई गई. वहीं रोपनी के समय नहर का पानी रोक दिया गया. इसके वजह से खेत सूख गया है. अब सूखे खेत में धान की रोपाई संभव नहीं है. किसानों ने बताया खि सूखे पड़े खेतो को फिर से जुताई कुड़ाई करानी पड़ेगी. इस संबंध में जल संसाधन विभाग औरंगाबाद के अधीक्षण अभियंता अर्जुन प्रसाद सिंह ने बताया कि वर्षाभाव में तांतिल व्यवस्था हीं कारगर होगा. इसके तहत सभी क्षेत्र के वितरणियों से प्रत्येक किसान को सप्ताह में तीन से लेकर चार दिन धान की रोपनी के लिए पानी मिलेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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