औरंगाबाद में घर के बाहर खड़ी थी गाड़ी और पटना में कट गया चालान, मैसेज देख व्यवसाई हैरान

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Vehicle parked Aurangabad Traffic E challan issued Patna

सांकेतिक तस्वीर

Traffic E-challan: बिहार में ई-चालान से जुड़ा एक और मामला चर्चा में आ गया है. 16 मई 2026 को एक व्यवसाई के घर के बाहर उसकी गाड़ी खड़ी थी, लेकिन उसी दिन उसकी गाड़ी का चालान पटना में काट दिया गया. फोन पर मैसेज आते ही व्यवसाई के होश उड़ गए.

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Traffic E-challan: (सुजीत कुमार सिंह) औरंगाबाद जिले के जाने-माने व्यवसाई और सूर्य मंदिर देव न्यास समिति के उपाध्यक्ष अमिताभ सिंह एक अजीबोगरीब मामले को लेकर चर्चा में हैं. उनकी गाड़ी का ई-चालान 16 मई को पटना में काट दिया गया, जबकि उस दिन उनकी गाड़ी औरंगाबाद स्थित आवास पर ही खड़ी थी और वे खुद भी शहर में मौजूद थे. इस घटना के बाद उन्होंने ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

क्या है पूरा मामला?

मामले को लेकर अमिताभ सिंह ने बताया कि उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया, जिसमें लिखा था कि गाड़ी नंबर BR26W7700 के खिलाफ पटना में चालान जारी किया गया है. मैसेज में चालान नंबर BR14574260516185212 का जिक्र करते हुए ऑनलाइन भुगतान करने का निर्देश दिया गया था. अचानक आए इस चालान को देखकर वे हैरान रह गए, क्योंकि संबंधित तारीख को उनकी गाड़ी कहीं बाहर गई ही नहीं थी.

व्यवसाई ने एक्स पर जाहिर की नाराजगी

उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही और मनमानी से आम लोग परेशान हैं. बिना सत्यापन के चालान जारी कर लोगों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए नाराजगी जाहिर की और लिखा, ‘वाह रे बिहार सरकार, मेरी गाड़ी का चालान काट दिया गया. अब तो लगता है कि सरकार चलाने के लिए ये लोग घर में डकैती डालने से भी बाज नहीं आएंगे’.

मुन्ना सिंह की ओर से शेयर किए गए पोस्ट में चालान से संबंधित नंबर और मैसेज का स्क्रीनशॉट भी शामिल है. सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है और लोग ट्रैफिक विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं. कई लोगों ने कमेंट कर बताया कि वे भी इस तरह की गलत कार्रवाई का शिकार हो चुके हैं.

मामले में क्या कहना है जानकारों का?

जानकारों का कहना है कि नंबर प्लेट की गलत पहचान, तकनीकी गलतियां या डाटा एंट्री में गड़बड़ी के कारण ऐसे मामले सामने आते हैं. लेकिन आम लोगों के लिए यह परेशानी और आर्थिक बोझ का कारण बनता जा रहा है.

जानकारी के मुताबिक, औरंगाबाद जिले में यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी कई गाड़ी मालिकों ने शिकायत की है कि उनकी गाड़ी किसी अन्य जिले में दिखाकर चालान भेज दिया गया, जबकि गाड़ी वास्तविक रूप से कहीं और मौजूद थी. अब लोग इस तरह की गलतियों पर रोक लगाने और जांच के बाद ही चालान जारी करने की मांग कर रहे हैं.

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प्रीती दयाल

लेखक के बारे में

By प्रीती दयाल

डिजिटल जर्नलिज्म में 3 साल का अनुभव. डिजिटल मीडिया से जुड़े टूल्स और टेकनिक को सीखने की लगन है. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं. बिहार की राजनीति और देश-दुनिया की घटनाओं में रुचि रखती हूं.

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