औरंगाबाद में 20 साल से नहीं बदली पुरानी जीटी रोड की तस्वीर, जाम और अतिक्रमण से हर दिन जूझ रहे लोग

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20 साल से जाम का जंजाल: सड़क पर सजी सब्जी मंडी

मुख्य सड़क पर बसी सब्जी मंडी

औरंगाबाद की पुरानी जीटी रोड पर हर दिन लगने वाला जाम अब शहर की सबसे बड़ी समस्या बन गया है. दो दशक से चली आ रही यह समस्या अतिक्रमण और सब्जी मंडी के कारण विकराल रूप ले चुकी है. लोग अब सिर्फ घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

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औरंगाबाद शहर के मुख्य बाजार स्थित पुरानी जीटी रोड की सब्जी मंडी एक बार फिर शहर की सबसे बड़ी यातायात समस्या बनकर सामने आई है. करीब दो दशक से चली आ रही यह समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है. सड़क पर सब्जी की दुकानें सजने और अतिक्रमण के कारण रोजाना लंबा जाम लग रहा है. हर नए अधिकारी के आने पर समाधान के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है.

मुख्य सड़क पर बाजार, राहगीरों और वाहन चालकों की बढ़ी परेशानी

पुरानी जीटी रोड पर सड़क के दोनों किनारों के साथ-साथ सड़क के हिस्से पर भी सब्जी की दुकानें लग जाती हैं. ऐसे में खरीदार, ठेले, दोपहिया और चारपहिया वाहन एक साथ गुजरने की कोशिश करते हैं. थोड़ी सी भी भीड़ होने पर लंबा जाम लग जाता है. इसका सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों और आम नागरिकों पर पड़ता है.

योजनाएं बनीं, लेकिन नहीं मिला स्थायी समाधान

जिला प्रशासन ने समय-समय पर इस समस्या के समाधान के लिए कई योजनाएं बनाईं. थोक सब्जी कारोबारियों को दूसरी जगह स्थानांतरित भी किया गया, लेकिन खुदरा सब्जी बाजार आज भी सड़क पर ही संचालित हो रहा है. यही वजह है कि जाम की समस्या खत्म होने के बजाय लगातार बनी हुई है.

हर नए एसडीएम से जागती है शहरवासियों की उम्मीद

कुछ समय पहले तत्कालीन सदर अनुमंडल पदाधिकारी संतन कुमार सिंह ने जाम से मुक्ति के लिए कई घोषणाएं की थीं. हालांकि उनके तबादले के बाद यह पहल अधूरी रह गई. अब नए सदर एसडीएम गौरव सिंह से शहरवासियों को उम्मीद है कि वे इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान निकालेंगे.

पहले भी कई अधिकारियों ने किए प्रयास

इससे पहले तत्कालीन एसडीएम केडी प्रोजवल, प्रदीप कुमार सिंह, सुरेंद्र प्रसाद और विजयंत समेत कई अधिकारियों ने पुरानी जीटी रोड को जाममुक्त बनाने के लिए अभियान चलाए. कई योजनाएं भी तैयार हुईं, लेकिन कोई भी प्रयास स्थायी परिणाम तक नहीं पहुंच सका.

सबसे बड़ा सवाल, आखिर कार्रवाई क्यों नहीं?

शहरवासियों का कहना है कि जब समस्या और उसका समाधान दोनों प्रशासन के सामने हैं, तो फिर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है. लोगों का सवाल है कि क्या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह गई है या फिर प्रशासनिक और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी इसकी बड़ी वजह है.

ऑटो चालकों की मनमानी भी बढ़ा रही है Aurangabad Traffic Jam

शहर में लगभग 6,000 से अधिक ऑटो का परिचालन होता है, लेकिन अब तक इनके लिए स्थायी रूट और निर्धारित स्टैंड की प्रभावी व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है. चालक मुख्य सड़कों पर कहीं भी ऑटो रोककर सवारी बैठाते और उतारते हैं. पुरानी जीटी रोड, रमेश चौक और महाराजगंज रोड जैसे इलाकों में यही स्थिति रोज देखने को मिलती है. यदि सब्जी मंडी के साथ-साथ ऑटो संचालन को भी व्यवस्थित नहीं किया गया, तो शहर को जाम से स्थायी राहत मिलना मुश्किल होगा.

लोगों की मांग, इस बार केवल घोषणा नहीं बल्कि कार्रवाई हो

शहरवासियों का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क पर दिखाई देने वाली ठोस कार्रवाई चाहिए. उनका मानना है कि यदि प्रशासन अतिक्रमण हटाने, सब्जी मंडी को व्यवस्थित करने और ऑटो संचालन के लिए स्थायी व्यवस्था लागू करता है, तो दो दशक पुरानी जाम की समस्या का समाधान संभव हो सकता है.

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Sujit Kumar

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