औरंगाबाद में खतरनाक हथियार से हमला मामले में तीन अभियुक्त दोषी, परिवीक्षा का मिला लाभ

औरंगाबाद कोर्ट | Prabhat Khabar Network
औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय ने गोतिया विवाद में खतरनाक हथियार से हमला करने के तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है. हालांकि, कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें परिवीक्षा का लाभ देकर रिहा कर दिया है. यह फैसला जेलों में भीड़ कम करने और सुधार की उम्मीद पर आधारित है.
Aurangabad News: औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार ने सेशन ट्रायल संख्या 128/20 (बंदैया थाना कांड संख्या 17/20) में सुनवाई पूरी करते हुए तीन अभियुक्तों को दोषी करार दिया है. हालांकि, कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और अभियुक्तों के आचरण को ध्यान में रखते हुए उन्हें परिवीक्षा (Probation) का लाभ देकर रिहा कर दिया.
गोतिया विवाद में हुआ था खतरनाक हथियार से हमला
मामले से जुड़े लोक अभियोजक के अनुसार, यह घटना 7 अगस्त 2020 की है. बंदैया थाना क्षेत्र के सुगी बेला निवासी रघुनंदन यादव (सूचक) का अपने ही गोतिया शिवनंदन यादव, राजनंदन यादव और श्यामनंदन यादव के साथ विवाद हुआ था. आरोप था कि तीनों अभियुक्तों ने रघुनंदन यादव पर खतरनाक हथियार से जानलेवा हमला कर चोट पहुंचाने का प्रयास किया था, जिसके बाद बंदैया थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
डांट-फटकार के बाद बॉन्ड भरकर रिहा
अदालत ने तीनों अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 324 के तहत दोषी ठहराया. हालांकि, जेल भेजने के बजाय न्यायालय ने उन्हें सख्त डांट-फटकार लगाई और 1 वर्ष तक शांति एवं सदाचार बनाए रखने का बंधपत्र (Bond Paper) भरवाकर परिवीक्षा का लाभ दिया.
क्यों मिलता है परिवीक्षा का लाभ?
अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि परिवीक्षा अधिनियम का उद्देश्य अभियुक्तों के आचरण में सुधार लाना, उन्हें एक अच्छा नागरिक बनने का मौका देना और उनकी आजीविका प्रभावित हुए बिना समाज में पुनर्गठित करना है. इससे जेलों में अनावश्यक भीड़ को कम करने में भी मदद मिलती है.
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