भिखारी ठाकुर को भारत रत्न देने की उठी मांग

Published by :SUJIT KUMAR
Published at :11 Jul 2025 4:38 PM (IST)
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भिखारी ठाकुर को भारत रत्न देने की उठी मांग

भिखारी ठाकुर की 54वीं पुण्यतिथि पर साहित्यिक संध्या आयोजित

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भिखारी ठाकुर की 54वीं पुण्यतिथि पर साहित्यिक संध्या आयोजित

प्रतिनिधि, औरंगाबाद ग्रामीण.

जिला मुख्यालय स्थित पृथ्वीराज चौहान स्मृति स्थल के प्रांगण में पृथ्वीराज चौहान चैरिटेबल ट्रस्ट एवं औरंगाबाद जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के संयुक्त तत्वावधान में महान साहित्यकार भोजपुरी भाषा के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की 54वीं पुण्यतिथि मनायी गयी. आयोजित साहित्यिक संध्या की अध्यक्षता जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह व संचालन सुरेश विद्यार्थी ने किया. सर्वप्रथम भिखारी ठाकुर के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गयी. पृथ्वीराज चौहान ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष जगदीश सिंह एवं रामप्रवेश सिंह, उपाध्यक्ष प्रोफेसर ज्ञानेश्वर प्रसाद सिंह, डॉ संजीव रंजन एवं मनोज कुमार सिंह, वरीय सदस्य पूर्व मुखिया सत्येंद्र नारायण सिंह, संजय कुमार सिंह, समकालीन जवाबदेही पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्र, मगध प्रमंडलीय माध्यमिक शिक्षक संघ के नेता रामभजन सिंह, संस्था के महामंत्री धनंजय जयपुरी की उपस्थिति में साहित्यिक संध्या की शुरुआत लोक भाषा के गायक शिवनंदन प्रसाद द्वारा बटोहिया गीत से हुई. प्रियंका पांडेय ने भिखारी ठाकुर को जन-जन के चर्चित एवं जनमानस से जुड़ा कवि बताया. प्रोफेसर ज्ञानेश्वर प्रसाद सिंह ने पियवा गईले कलकतवा ए सजनी गीत गुनगुनाया, तो ज्योतिर्विद शिवनारायण सिंह ने उनके पूरे जीवन के संघर्ष का बखान किया. शिक्षिका अनुपमा सिंह ने हंसी-हंसी पनवा… गीत गाया, तो दर्शक दीर्घा में बैठे लोग भाव विह्वल हो गये. प्रोफेसर रामाधार सिंह ने बिहारी ठाकुर को पर्यावरण से जुड़ा कवि बताया, तो प्रोफेसर राजेंद्र सिंह ने सांस्कृतिक संचेतना जगाने वाला कवि की उपमा दी. डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्र ने भिखारी ठाकुर को लोक भाषा का श्रेष्ठ कवि बताया. उनकी लोक संस्कृति की चर्चा हुई. अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि भिखारी ठाकुर के कारण ही भोजपुरी इतनी समृद्ध भाषा बनी, जिसकी चर्चा भारत ही नहीं, बल्कि देशों में आज हो रही है. मौके पर सत्यचंडी धाम के राजेंद्र सिंह, दुमुहान धाम के सिंहेश सिंह, समाजसेवी अवधेश सिंह, गजलकार हिमांशु चक्रपाणि, हास्य कवि विनय मामूली बुद्धि, भोला सिंह, अशोक कुमार सिंह, शिक्षक चंद्रकांत ओड़िया समेत अन्य लोग उपस्थित थे. साहित्यिक संध्या में भिखारी ठाकुर को भारत रत्न देने की मांग उठायी गयी.

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