सूर्य मंदिर परिसर की खूबसूरती बढ़ायेगा लखा ग्रेनाइट

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 26 Aug 2024 10:10 PM

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मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं के अब नहीं जलेंगे पांव

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देव. त्रेतायुगीन सूर्य मंदिर देव के विकास की तैयारी लगभग पूरी हो गयी है. मंदिर के सौंदर्यीकरण का काम भी शुरू होने वाला है. इस मंदिर के घिसे-पीटे पुराने व जर्जर हो चुके टाइल्सों को बदला जायेगा. मंदिर परिसर में लखा ग्रेनाइट का पत्थर लगाया जायेगा. यानी कि लखा ग्रेनाइट सूर्य मंदिर की खूबसूरती को चार चांद लगायेगा. ग्रेनाइट लगाने की कवायद तेज हो गयी है. ज्ञात हो कि स्थानीय समाजसेवियों ने पुराने टाइल्सों से होने वाली परेशानी को लेकर मंदिर प्रशासन से शिकायत दर्ज करायी थी. कहा था कि पुराने घिसे-पीटे टाइल्स से श्रद्धालुओं को काफी परेशानी हो रही है. तेज धूप के कारण टाइल्स गर्म हो जा रहे है, जिससे श्रद्धालुओ को मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर दर्शन करने के अलावा परिक्रमा करने में बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है. शिकायत के आलोक में बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अधीन कार्य कर रही सूर्य मंदिर धार्मिक न्यास समिति की बैठक हुई और उसमें निर्णय लिया गया कि जल्द पुराने टाइल्स को हटाकर नये टाइल्स लगाया जाये. बैठक में विचार-विमर्श को मूर्त रूप दिया गया. लखा ग्रेनाइट को मंदिर परिसर में लगाने के लिए राजस्थान से लखा ग्रेनाइड पत्थर मंगवाया गया. ट्रक के माध्यम से ग्रेनाइट पहुंच भी चुका है. यह भी जानकारी मिली कि साढ़े 11 हजार स्क्वायर फुट में ग्रेनाइट लगाये जायेंगे. जानकारों की माने तो राजस्थान का यह पत्थर अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है. यह न तो गर्मियों में ज्यादा गर्म होता है और न ही सर्दियों में ज्यादा ठंडा. सैकड़ों वर्ष तक खराब भी नहीं होता है. इसमें पानी सोखने की क्षमता अन्य पत्थरों की तुलना में अधिक है. यह सभी मौसम के लिए उपयुक्त है. मंदिर के सचिव विश्वजीत राय, सदस्य लक्ष्मण गुप्ता, योगेंद्र सिंह, सुनील सिंह ने बताया कि इस पत्थर के लगने से श्रद्धालुओं की कठिनाइयां दूर होगी. लोग सहजता से दर्शन कर पायेंगे. सचिव ने बताया कि मंदिर में दर्शन, पूजन, राग भोग सहित अन्य विकास के मुद्दे पर कार्य किया जा रहा है. जल्द ही देव सूर्य मंदिर एक अलग रूप में श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों को नजर आयेगा. लखा ग्रेनाइट अपनी अनूठी लाल छाया के लिए प्रतिष्ठित है. इसकी एक चिकनी बनावट है और लाल रंग पर बहुरंगी माइक्रोपार्टिकल्स की तरंगे इस पत्थर को बहुत ही आकर्षक बनाती है. इसकी खूबसूरती इसके रंग में है. सिंदूरी और खून जैसा लाल रंग इसकी एक अलग पहचान है. इसी वजह से यह प्रसिद्ध है. दावा किया जाता है कि यह राजस्थान के अलावा कहीं और नहीं पाया जाता है. देश के कई बड़े मंदिरों में इस पत्थर को लगाया गया है. दिल्ली के इंडिया गेट के समीप बने युद्ध स्मारक में इस पत्थर का उपयोग किया गया है. इसकी कीमत आम पत्थरों की अपेक्षा काफी अधिक होती है.

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