Bhoot Mela: बिहार में यहां नाचते हैं भूत, दूर भाग जाते हैं प्रेत, मोक्षदायी है मां का यह दरबार

Updated at : 07 Apr 2025 1:59 PM (IST)
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Bhoot Mela: महुआ धाम में जब श्रद्धालु मंदिर के प्रांगण में लगे वृक्ष के नीचे बैठते हैं, तो वे माँ की शक्ति के प्रभाव में आकर अपने आप ही झूमने लगते हैं. यह नजारा देखने में अद्भुत होता है.

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Bhoot Mela: औरंगाबाद. हिंदू धर्म के शाक्त संप्रदाय के लोग चैती नवरात्र में तंत्र साधना करते हैं. तांत्रिक साधना का मार्ग काफी कठिन और अंचंभित करनेवाला होता है. चैत नवरात्र में जहां तंत्र साधक अपनी साधना में लीन रहते हैं, वहीं मोक्ष के लिए भूतों का भी साधकों के आसपास रहने की कोशिश रहती है. बिहार में एक ऐसी जगह है जहां चैत नवरात्रि के दौरान भूतों का मेला लगता है. यह मेला बिहार के औरंगाबाद के महुआ धाम में आयोजित होता है. इस मेले के बारे में मान्यता है कि यहां तंत्र-मंत्र के माध्यम से भूत को वश में किया जाता है और प्रेतों को मोक्ष दिया जाता है.

भूतों का मेला देखने दूर-दूर से आते हैं लोग

स्थानीय लोग इसे भूतों का मेला कहते हैं. इस मेले का अनोखा दृश्य देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. महुआ धाम, जो कि औरंगाबाद शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर कुटुंबा प्रखंड में स्थित है, एक प्रसिद्ध देवी मंदिर है. भक्तों की मान्यता है कि वहाँ माँ अष्टभुजी उनकी सभी इच्छाओं को पूरा करती हैं. यहाँ हर साल चैत्र नवरात्रि के दौरान विशेष आयोजन होते हैं, जिसमें हजारों लोग भाग लेते हैं. इस मंदिर में आने वाले भक्त अक्सर भूत-प्रेत से ग्रसित होने का दावा करते हैं. यहाँ आकर अपने अनुभव साझा करते हैं. महुआ धाम में जब श्रद्धालु मंदिर के प्रांगण में लगे वृक्ष के नीचे बैठते हैं, तो वे माँ की शक्ति के प्रभाव में आकर अपने आप ही झूमने लगते हैं. यह नजारा देखने में अद्भुत होता है.

मां के पास आकर मिलती है प्रेत छाया से मुक्ति

कई बार देखने को मिलता है कि भक्त अपना होश खो देते हैं और कई बार बेहोशी की हालत में जमीन पर रेंगने लगते हैं. इस प्रकार का व्यवहार उन लोगों द्वारा किया जाता है, जो भूत-प्रेत बाधा से ग्रसित होने का अनुभव करते हैं. हालांकि, चिकित्सा विज्ञान भी इन सब चीजों को निरोलॉजिकल एक्सरसाइज मानता है और कहता है कि ऐसे अनुभव मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं का परिणाम हो सकते हैं. तंत्र साधना में लगे साधकों का दावा है कि महुआ धाम जैसे स्थानों पर आयोजित होने वाले मेलों में भाग लेने वाले लोग अक्सर अपनी समस्याओं के समाधान के लिए यहां आते हैं. मां के पास आकर प्रेत छाया से मुक्ति मिलती है.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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