औरंगाबाद/अंबा. मगध प्रक्षेत्र के हजारों एकड़ भूमि को सिंचित करने वाली उत्तर कोयल नहर का जल्द ही कायाकल्प होने जा रहा है. इसके लिए विभाग ने सभी तरह की कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली है. जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में खेतिहरों को दूसरी बार बड़ी सौगात मिलने वाली है. अंबा, नवीनगर और मदनपुर के साथ-साथ सदर डिवीजन क्षेत्र में सभी शाखा और उपशाखा नहरों के अलावा वितरणी, उपवितरणी तथा माइनर का पुनर्निर्माण कार्य शुरू किया जायेगा. इसके लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा अधिकृत वाप्कोस ने दूसरी बार निविदा निकाली है. टेंडर प्रक्रिया में स्थानीय ठेकेदारों से लेकर बड़ी कंपनियों को भी भाग लेने का अवसर दिया गया है. मुख्य नहर की लाइनिंग के साथ सभी स्ट्रक्चर की रिमॉडलिंग और कच्ची नहरों के जीर्णोद्धार का प्रावधान किया गया है. कच्ची नहरों के पुनर्निर्माण के दौरान जल प्रवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए पहले बने पुल, पुलिया, फॉल, कंट्रोल रेगुलेटर और हेड रेगुलेटर की भी नई डिजाइनिंग की जायेगी. मगध क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनरेखा मानी जाने वाली इस परियोजना के कुटकु डैम में अब तक फाटक नहीं लग पाया है, हालांकि डैम का कार्य शुरू कर दिया गया है. जानकारी के अनुसार वर्ष 1972 के आसपास मुख्य नहर की खुदाई शुरू हुई थी. उसी समय डैम निर्माण का कार्य भी प्रारंभ किया गया था. वर्ष 1974 से 1977 के बीच कच्ची नहरों की खुदाई करायी गयी थी, लेकिन शाखा नहरों का जीर्णोद्धार, पुल-पुलिया और तटबंधों की मरम्मत नहीं हो सकी थी. मित्रसेनपुर गांव के बुजुर्ग बासुदेव पांडेय, कुटुंबा के राजेश्वर सिंह और रामलखन तिवारी, ओरडीह के रामाधार राम और रघुनंदन पासवान तथा सूही के सुखदेव यादव ने बताया कि उत्तर कोयल नहर को पुनर्जीवित करने में पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह की भूमिका सराहनीय रही है.
53 वर्षों से अधूरा डैम, पीढ़ी दर पीढ़ी बने मुआवजे के दावेदार
उत्तर कोयल नहर सिंचाई परियोजना की बदहाली से किसान वर्षों तक परेशान रहे. जिन क्षेत्रों में नहर का पानी पहुंचा है, वहां धान की खेती को बढ़ावा मिला है, लेकिन मदनपुर, रफीगंज, कोंच, टिकारी, आमस, गुरुआ और गुरारू प्रखंड के खेतिहर अब भी सिंचाई सुविधा से वंचित हैं. अंतिम छोर के किसानों को भी समय पर पानी नहीं मिल पाता है. इसकी मुख्य वजह नहरों में जल प्रवाह का अवरुद्ध होना और झारखंड हिस्से में रोस्टर से अधिक पानी रोक लिया जाना बताया जाता है. सबसे बड़ी समस्या यह रही कि 53 वर्षों में डूब क्षेत्र के विस्थापितों के दादा-परदादा से लेकर बेटे, बेटियां और पोते तक मुआवजे के दावेदार बन गये. सरकारी स्तर पर पीढ़ी दर पीढ़ी मुआवजे का भुगतान भी किया गया, जिसके बाद पुनर्वास की प्रक्रिया में तेजी आयी.
पुनर्निर्माण को सरकार की मंजूरी
अधीक्षण अभियंता संजीव कुमार ने बताया कि परियोजना का डीपीआर तैयार कर सरकार को भेजा गया था, जिसे स्वीकृति मिल चुकी है. अंबा प्रमंडल क्षेत्र में 64.12 करोड़ रुपये की लागत से शाखा नहरों और संरचनाओं का कार्य किया जायेगा. नवीनगर प्रमंडल में 47.85 करोड़ रुपये, औरंगाबाद प्रमंडल में 50.81 करोड़ रुपये तथा मदनपुर प्रमंडल में 50.95 करोड़ रुपये की लागत से सभी कार्य पूरे किए जायेंगे. जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर अर्जुन प्रसाद सिंह ने बताया कि बिहार हिस्से में उत्तर कोयल मुख्य नहर के सभी पैकेज में एक साथ सीएनएस, लाइनिंग और स्ट्रक्चर का कार्य चल रहा है. तटबंधों के किनारे लगाये गये बिजली के पोल और तारों के कारण लाइनिंग कार्य में दिक्कत आ रही थी. विद्युत विभाग द्वारा हाईटेंशन के 1478 पोल में से 1232 पोल हटा दिए गए हैं और तटबंध के किनारे लगे 19 ट्रांसफाॅर्मर को अन्यत्र स्थानांतरित किया गया है. सिंगल टेंडर की स्थिति में दोबारा निविदा निकाली गयी है. 22 जनवरी को टेंडर खुलेगा. इसके साथ ही 213.73 करोड़ रुपये की लागत से सभी शाखा नहरों में पुनर्निर्माण कार्य शुरू हो जायेगा.
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