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Aurangabad News : हसपुरा का पर्यटक भवन बना ‘भूत बंगला’

Updated at : 06 Jan 2026 10:23 PM (IST)
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Aurangabad News : हसपुरा का पर्यटक भवन बना ‘भूत बंगला’

Aurangabad News: 27 वर्षों से बंद पड़े इस भवन में न तो कोई गतिविधि और न ही किसी तरह की देखरेख

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गोह. बिहार सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करने व अमझर शरीफ में हर साल लगने वाले उर्स मेले में आने वाले पर्यटकों और देवकुंड धाम में आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के उद्देश्य से वर्ष 1998 में हसपुरा में पर्यटक भवन का निर्माण कराया गया था़ यह आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. लाखों रुपये की लागत से तैयार यह भवन अब पर्यटकों का ठिकाना बनने के बजाय इलाके में ‘भूत बंगला’ के नाम से जाना जाने लगा है. करीब 27 वर्षों से बंद पड़े इस भवन में न तो कोई गतिविधि है और न ही किसी तरह की देखरेख, जिससे सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ किसी को नहीं मिल रहा है़ हसपुरा प्रखंड मुख्यालय व बस स्टैंड के समीप अमझर शरीफ जाने वाली सड़क पर बना यह पर्यटक भवन कभी क्षेत्रीय पर्यटन विकास की रीढ़ माना जा रहा था. उम्मीद थी कि यहां ठहरने वाले पर्यटक स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देंगे, लेकिन भवन का निर्माण कराने के बाद इसके संचालन में लाने को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गयी. नतीजा यह हुआ कि भवन धीरे-धीरे वीरान होता चला गया. आज स्थिति यह है कि भवन के चारों ओर झाड़ी उग आये हैं. खिड़कियों के शीशे टूट चुके हैं, दरवाजों पर जंग लगी है और परिसर असामाजिक तत्वों का अड्डा बना है. शाम ढलते ही यहां सन्नाटा पसर जाता है, जिससे स्थानीय लोग इस भवन को ‘भूत बंगला’ कहने लगे हैं. लोगों का कहना है कि कभी जिस भवन से हसपुरा की पहचान बनने की उम्मीद थी, वही आज भय और उपेक्षा का प्रतीक बन गया है. उर्स के दौरान दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु किराये के मकानों में रहने को मजबूर हैं. राजनीतिक दांव-पेच और विभागीय उदासीनता ने इस भवन को शुरुआत से ही बेकार बना दिया.

भवन बना, लेकिन चाबी तक नहीं सौंपी जा सकी

सूत्रों की मानें तो भवन निर्माण के बाद ठेकेदार का करीब 80 हजार रुपये का भुगतान फंस गया. भुगतान नहीं मिलने के कारण चाबी सौंपने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी. इसके बाद भवन को बोधगया पर्यटन विभाग के अधीन कर दिया गया, लेकिन विभाग भी इसे पर्यटकों के लिए संचालित नहीं कर सका.

निजी विद्यालय चला, पर्यटक फिर भी वंचित

पर्यटन विभाग ने बाद में भवन का टेंडर निकालकर इसे किराये पर दिया, जहां 2014 से 2019 तक एक निजी विद्यालय का संचालन हुआ. इस दौरान भवन की कुछ हद तक देखरेख हुई, लेकिन पर्यटकों के लिए इसका उपयोग कभी नहीं हुआ. स्कूल बंद होने के बाद भवन की स्थिति तेजी से बिगड़ती चली गयी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMIT KUMAR SINGH_PT

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