सावन में हरी चूड़ियों की बढ़ी मांग, बाजारों में महिलाओं की उमड़ी भीड़
बाजार में सजी चूड़ी की दुकान
Aurangabad News : सावन के महीने में हरी चूड़ियों का विशेष महत्व है. औरंगाबाद के बाजारों में महिलाओं की भारी भीड़ और परंपराओं के प्रति उत्साह को दर्शाती एक विशेष रिपोर्ट.
Aurangabad News : सावन का महीना शुरू होते ही जिला मुख्यालय समेत प्रखंड क्षेत्रों के बाजारों में पारंपरिक श्रृंगार की रौनक देखने को मिल रही है. खासकर हरी चूड़ियों की खनक से बाजार गुलजार हो उठे हैं. वर्षों से चली आ रही परंपरा के कारण सावन में चूड़ियों, मेहंदी और अन्य श्रृंगार सामग्री की बिक्री में काफी वृद्धि होती है. इस बार भी जिले के मदनपुर, खिरीयावा, शिवगंज और वार बाजार के चौक-चौराहों पर स्थित चूड़ी दुकानों में महिलाओं की भीड़ उमड़ रही है.
80 से 100 रुपये दर्जन तक बिक रही हरी चूड़ियां
सावन में हरे रंग का विशेष महत्व माना जाता है. यही कारण है कि इस महीने हरी चूड़ियों की मांग सबसे अधिक रहती है. मांग बढ़ने के साथ ही कीमतों में भी इजाफा देखा जा रहा है. वर्तमान में हरी चूड़ियां 80 से 100 रुपये प्रति दर्जन तक बिक रही हैं. इसके बावजूद महिलाओं के उत्साह में कोई कमी नहीं है. दुकानों पर अलग-अलग डिजाइन और रेंज की चूड़ियां उपलब्ध होने से खरीदारी भी बढ़ गई है.
परंपरा से जुड़ा है सावन का श्रृंगार
भारतीय संस्कृति में सावन का महीना हरियाली, प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है. इस दौरान महिलाएं मेहंदी रचाने के साथ हरे रंग की साड़ी और चूड़ियां पहनना शुभ मानती हैं. यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है, जो आज भी कायम है. हरी चूड़ियां सौंदर्य बढ़ाने के साथ प्रकृति से जुड़ाव और जीवन में हरियाली का संदेश भी देती हैं.
सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती हैं चूड़ियां
हिंदू धर्म में चूड़ियों को सुहाग का प्रतीक माना जाता है. हरी, पीली और लाल रंग की चूड़ियां महिलाओं के सोलह श्रृंगार का अहम हिस्सा हैं. खासकर सावन में सुहागिन महिलाओं द्वारा हरी चूड़ियां पहनना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरी चूड़ियां वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती हैं.
महिलाओं के लिए परंपरा के साथ खुशी और आस्था का पर्व
प्रखंड क्षेत्र की सुहागिन महिलाएं सुनीता देवी, रेणु देवी, सोनी देवी और सरस्वती देवी बताती हैं कि उनके परिवारों में पूर्वजों के समय से सावन में सजने-संवरने की परंपरा चली आ रही है. हरे रंग की साड़ी, चूड़ियां और मेहंदी के साथ सोलह श्रृंगार करना उनके लिए केवल परंपरा नहीं, बल्कि खुशी और आस्था का हिस्सा भी है.
चूड़ियों के साथ मेहंदी और कॉस्मेटिक की बिक्री भी बढ़ी
कॉस्मेटिक और चूड़ी के स्थानीय दुकानदार विनोद सिंह, पप्पू कुमार और रंजीत कुमार बताते हैं कि सावन के महीने में हरी चूड़ियों की मांग काफी बढ़ जाती है. इस दौरान चूड़ियों के साथ मेहंदी, नेल पॉलिश, बिंदी और अन्य श्रृंगार सामग्री की बिक्री भी तेज हो जाती है. दुकानदारों के अनुसार सावन का महीना उनके लिए साल के बेहतर कारोबार वाले समय में शामिल है.
हरे रंग को हरियाली और समृद्धि से जोड़ते हैं धार्मिक मान्यताएं
उमगा मंदिर के पुजारी दिलीप पाठक के अनुसार सावन का महीना हरियाली और प्रकृति का प्रतीक है. धार्मिक मान्यताओं में हरे रंग को उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार हरा रंग बुध ग्रह से जुड़ा माना जाता है. वहीं, मेहंदी लगाने के पीछे पारंपरिक रूप से शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला प्रभाव भी बताया जाता है.
बदलते फैशन के बीच कायम है हरी चूड़ियों की परंपरा
समय के साथ फैशन और शैली में बदलाव आया है, लेकिन सावन में हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा आज भी कायम है. आधुनिक डिजाइन और नई शैली के बावजूद महिलाएं पारंपरिक हरे रंग को प्राथमिकता दे रही हैं. इससे जाहिर होता है कि बदलते दौर में भी सांस्कृतिक परंपराओं की जड़ें मजबूत बनी हुई हैं.
हरी चूड़ियों की खनक से बाजारों में लौटी रौनक
सावन के पावन महीने में हरी चूड़ियों की खनक न केवल बाजारों की रौनक बढ़ा रही है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा की जीवंतता को भी दर्शा रही है. महिलाओं की खरीदारी और दुकानों पर बढ़ती भीड़ से कारोबारी भी उत्साहित हैं.
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