जम्होर मेले के अस्तित्व पर खतरा

Published at :01 Feb 2017 2:17 AM (IST)
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जम्होर मेले के अस्तित्व पर खतरा

औरंगाबाद : औरंगाबाद जिले के जम्होर में पिछले सौ वर्षों से ऐतिहासिक मेले का आयोजन होते आया है. जम्होर में लगनेवाले ऐतिहासिक मेले को सरकारी दर्जा भी प्राप्त है. यानी सरकारी मेले में एक पितृपक्ष मेला, दूसरा कार्तिक पूर्णमासी मेला और तीसरा वसंतपंचमी पशु मेला है. लेकिन ये तीनों मेले वर्तमान समय में अपना अस्तित्व […]

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औरंगाबाद : औरंगाबाद जिले के जम्होर में पिछले सौ वर्षों से ऐतिहासिक मेले का आयोजन होते आया है. जम्होर में लगनेवाले ऐतिहासिक मेले को सरकारी दर्जा भी प्राप्त है. यानी सरकारी मेले में एक पितृपक्ष मेला, दूसरा कार्तिक पूर्णमासी मेला और तीसरा वसंतपंचमी पशु मेला है.
लेकिन ये तीनों मेले वर्तमान समय में अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं. पहले जहां इन तीनों मेला का आयोजन धूमधाम से होता था, वहां आज सिर्फ एक मेला ही प्रशासन के रहमोकरम पर लग रहा है. नवंबर माह में कार्तिक पूर्णमासी मेला का आयोजन तो हुआ करता है. लेकिन, पितृपक्ष मेला और वसंत पंचमी मेला लगभग समाप्ति के कगार पर है. इस मेले से जम्होर की पहचान हुआ करती थी. पर आज लोग जम्होर को धीरे-धीरे लोग भुलते जा रहे हैं.
आज भी पितृपक्ष मेले के अवसर पर पुनपुन हाॅल्ट पर गाड़ियां रूकती हैं, पर यात्रियों की संख्या बहुत कम हुआ करती है. कुछ वर्ष पहले तक अनुग्रह नारायण रोड के मुसाफिरखाने में स्वास्थ्य कैंप लगता था, साफ सफाई व सुरक्षा की व्यवस्था चाक-चौबंद हुआ करती थी. ट्रेनों व गाड़ियों की लंबी कतारें लगी रहती थीं और उत्सव का माहौल रहता था. साथ ही, जम्होर के आसपास के गांवों में ही इस वक्त प्रत्येक घर में अतिथियों के लिए संसाधन जुटा लिए जाते थे, पर आहिस्ता-आहिस्ता सरकार और समाज दोनों की उपेक्षा के कारण यह परंपरा मिट रही है.
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