अंधविश्वास के फेर में गयी जान

Published at :18 Nov 2016 8:03 AM (IST)
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अंधविश्वास के फेर में गयी जान

दु:खद. सांप के काटने के बाद चार घंटे तक महिला की करवाते रहे झाड़-फूंक सरसली व जोगिया गांवों में चल रहा झाड़-फूंक का धंधा औरंगाबाद शहर : गुरुवार को ओबरा प्रखंड के महथू गांव की सहोदरी देवी की जान अंधविश्वास में चली गयी. सांप काटने के बाद उसके परिजन दवाओं पर नहीं, बल्कि दुआओं पर […]

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दु:खद. सांप के काटने के बाद चार घंटे तक महिला की करवाते रहे झाड़-फूंक
सरसली व जोगिया गांवों में चल रहा झाड़-फूंक का धंधा
औरंगाबाद शहर : गुरुवार को ओबरा प्रखंड के महथू गांव की सहोदरी देवी की जान अंधविश्वास में चली गयी. सांप काटने के बाद उसके परिजन दवाओं पर नहीं, बल्कि दुआओं पर भरोसा किया. वह भी वैसे लोगों का जो झाड़ फूंक के बल पर नये जीवन देने की गारंटी लेते हैं. हुआ यह कि सहोदरी देवी महथु गांव के बधार में धान काट रही थी, इसी दौरान एक विषैले सांप ने उसे काट लिया. घटना लगभग 11 बजे दिन की है. जब पति ज्ञानचंद राम व अन्य परिजनों को इसकी जानकारी हुई, तो सभी दवा कराने की बजाय झाड़-फूंक के लिए सरसौली गांव ले गये.
सरसौली गांव के ओझा ने लगभग तीन घंटे तक उसे वहां रखा और ठीक होने की दुहाई दी, लेकिन जब स्थिति नहीं संभली, तो उसे कहीं और जाने की सलाह दी. इसके बाद भी परिजनों की आंखे नहीं खुलीं. अस्पताल ले जाने के बजाय एक बार फिर झाड़-फूंक के लिए जोगिया गांव ले गये. वहां भी कुछ समय तक झाड़-फूंक का खेल चला. अंतत: ओझा ने अस्पताल जाने की बात कही. लेकिन, जब तक परिजनों की आंखें खुलती, तब तक सहोदरी की आंखें बंद हो चुकी थी. अब रोने-चिल्लाने के सिवा कुछ बचा नहीं था. सदर अस्पताल में सहोदरी के शव के समीप परिजन दहाड़ मार कर रो रहे थे.
अंधविश्वास से नहीं उबर पा रहे ग्रामीण
जिले के सुदूर ग्रामीण इलाके के लोग अब भी अंधविश्वास से उबर नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि हर एक-दो माह पर ओझा-गुनी की शरण में जाने के लोगों की जान जाती है.
सांप काटने के मामलों में ऐसा अधिक होता है. जिले में कई जगह सांप काटे का झाड़-फूंक करनेवाले ओझा अपना धंधा चला रहे हैं. बड़ी तादाद में लोग इनके झांसे में आ जाते हैं और अधिकतर की जान इस अंधविश्वास में चली जाती है़
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