अरवल सदर अस्पताल में दो-दो हड्डी रोग विशेषज्ञ, मरीजों को नहीं मिल रही इलाज

Edited by Karuna Tiwari
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अरवल सदर अस्पताल

Arwal Sadar Hospital: अरवल सदर अस्पताल में हड्डी रोग के दो विशेषज्ञ डॉक्टर होने के बावजूद ओपीडी सेवा करीब एक महीने से बंद पड़ी है. इलाज के लिए आने वाले मरीजों को एक्स-रे के बाद निजी क्लिनिक या पीएमसीएच रेफर किया जा रहा है, जिससे गरीब मरीजों की परेशानी बढ़ गई है.

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Arwal Sadar Hospital: अरवल जिले का सदर अस्पताल कागजों पर जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल माना जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसकी स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोर तस्वीर पेश कर रही है. हालत यह है कि दुर्घटना में घायल होकर पहुंचने वाले मरीजों को भी समय पर उचित इलाज मिलने की गारंटी नहीं है.

दो डॉक्टर मौजूद, फिर भी बंद है हड्डी रोग ओपीडी

अस्पताल में हड्डी रोग के दो विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात हैं, इसके बावजूद हड्डी रोग विभाग की ओपीडी सेवा करीब एक महीने से बाधित बताई जा रही है. मरीजों को हाथ-पैर टूटने जैसी गंभीर समस्याओं में भी इलाज नहीं मिल पा रहा है.

प्लास्टर तक की सुविधा नहीं, निजी क्लिनिक भेजे जा रहे मरीज

मरीजों का आरोप है कि अस्पताल में एक्स-रे की सुविधा तो उपलब्ध है, लेकिन जांच के बाद उन्हें यह कहकर निजी अस्पताल या क्लिनिक भेज दिया जाता है कि डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। कई मरीजों को पीएमसीएच रेफर होने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

Arwal Sadar Hospital: गरीब मरीजों पर सबसे ज्यादा असर

प्रतिदिन 30 से 40 मरीज हड्डी रोग विभाग में इलाज के लिए पहुंचते हैं. इनमें बड़ी संख्या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों की होती है. दो रुपये का पर्चा कटवाने के बाद भी उन्हें बिना इलाज लौटना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ रही है.

इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीज लौटे निराश

सोमवार को रामचंद्र कुमार, वर्षा रानी, अभिमन्यु कुमार, श्यामवती देवी, सीता देवी, नीतू देवी, नीतीश कुमार और सफिया खातून समेत कई मरीज अस्पताल पहुंचे थे. लेकिन उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि यहां फिलहाल हड्डी रोग का इलाज नहीं किया जा रहा है.

इमरजेंसी ड्यूटी बनी ओपीडी सेवा में बाधा

जानकारी के अनुसार, अस्पताल के दोनों हड्डी रोग विशेषज्ञों को इमरजेंसी ड्यूटी में लगाया गया है. इसी वजह से नियमित ओपीडी सेवा प्रभावित हो गई है. पहले सप्ताह के छह दिन हड्डी रोग ओपीडी संचालित होती थी और यहां मरीजों की सबसे अधिक भीड़ रहती थी.

क्या बोले सिविल सर्जन?

सिविल सर्जन डॉ. राजकिशोर प्रसाद ने बताया कि डॉक्टरों की ड्यूटी को ओपीडी और इमरजेंसी दोनों में संतुलित तरीके से लगाना हमेशा संभव नहीं होता. इमरजेंसी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों की तैनाती की गई है. उन्होंने कहा कि ओपीडी संचालन को लेकर मामले पर विचार किया जाएगा और व्यवस्था सुधारने का प्रयास होगा.

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करुणा तिवारी पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की. 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है. अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं.

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