अरवल के मधुश्रवा धाम में उमड़ा 50 हजार श्रद्धालुओं का सैलाब, महाजाम से कराह उठा इलाका

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मधुश्रवा धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Arwal Malmas Mela: अरवल जिले के कलेर प्रखंड स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मधुश्रवा धाम में मलमास मेले के अवसर पर रविवार को करीब 50 हजार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. इस भारी भीड़ और पारंपरिक पशु मेले के कारण मेहंदिया-सोन नहर मार्ग सहित तमाम सड़कों पर सुबह से शाम तक भीषण जाम लगा रहा.

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Arwal Malmas Mela: (अंजनी कुमार की रिपोर्ट) अरवल जिले के कलेर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक धार्मिक स्थल मधुश्रवा धाम में जारी मलमास मेले के अवसर पर रविवार को श्रद्धालुओं का ऐतिहासिक सैलाब उमड़ पड़ा. एक अनुमान के मुताबिक, रविवार की छुट्टी होने के कारण करीब 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मधुश्रवा पहुंचकर वहां स्थित पवित्र सरोवर में डुबकी लगाई. श्रद्धालुओं ने बाबा भोलेनाथ और अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ प्राप्त किया. हालांकि, श्रद्धालुओं की इस अप्रत्याशित भीड़ के कारण सुबह से लेकर देर शाम तक क्षेत्र के तमाम प्रमुख मार्गों और बाजारों में चक्का पूरी तरह जाम रहा.

मधुश्रवा धाम को जोड़ने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर सुबह से ही वाहनों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं. विशेष रूप से मेहंदिया-सोन नहर मार्ग पर पूरे दिन रुक-रुक कर भीषण जाम लगता रहा. इसके अलावा मेहंदिया बाजार, जयपुर मोड़ सहित अन्य सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर भी यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई. सबसे बदतर स्थिति मेहंदिया-सोन नहर पुल पर देखने को मिली, जहां घंटों गाड़ियां रेंगती रहीं.

जाम से बचने के लिए लोगों ने बदला रूट

हाईवे और मुख्य सड़कों पर लगे महाजाम से बचने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और राहगीर वैकल्पिक और ग्रामीण मार्गों का सहारा लेने को मजबूर हुए. सैकड़ों की संख्या में दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक मुख्य सड़क छोड़कर सोन नहर पुल, बेलसार एवं हरदिया होकर अपने गंतव्य की ओर आते-जाते देखे गए. हालांकि, मेहंदिया से इन ग्रामीण इलाकों की दूरी करीब पांच किलोमीटर अधिक है, लेकिन मुख्य सड़क के जाम में घंटों फंसे रहने से बचने के लिए लोगों ने इस अतिरिक्त दूरी को तय करना ही ज्यादा मुनासिब समझा.

पशु मेला बना कारण, पुलिस को करनी पड़ी भारी मशक्कत

रविवार का दिन होने के कारण मधुश्रवा धाम में लगने वाले पारंपरिक पशु मेले का भी भव्य आयोजन किया गया था. इस पशु मेले में बिहार के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पशु व्यवसायी, खरीदार और ग्रामीण पहुंचे थे. धार्मिक मेला और पशु मेला एक ही दिन होने के कारण पूरे क्षेत्र में असाधारण और बेकाबू भीड़ देखने को मिली.

भीड़ को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरे दिन मुस्तैद और सक्रिय रहे. संवेदनशील जगहों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी, फिर भी अत्यधिक भीड़ और वाहनों के दबाव के कारण पुलिसकर्मियों को यातायात व्यवस्था सुचारु कराने में पसीने छूट गए.

भीषण उमस और बिजली कटौती ने छुड़ाए पसीने

इस महाजाम और उमस भरी गर्मी के बीच बिजली विभाग की संवेदनहीनता भी सामने आई. दिनभर रुक-रुक कर होती रही बिजली की अघोषित कटौती ने श्रद्धालुओं, आम जनता और दुकानदारों को बुरी तरह बेहाल कर दिया. भीषण गर्मी के बीच बार-बार बिजली गुल होने से लोग पानी के लिए भी तरसते नजर आए. मेले में पहुंचे दुकानदारों ने प्रशासन से निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग की है.

स्थानीय ग्रामीणों और मेला कमेटी के सदस्यों का कहना है कि मलमास मेले का अभी करीब एक सप्ताह का समय शेष है. ऐसे में आने वाले दिनों में, खासकर आगामी त्योहारों और प्रशासनिक छुट्टियों के दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और ग्राफ और तेजी से बढ़ेगा. इसे देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस बल भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा एवं सुचारु यातायात व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए मास्टर प्लान तैयार कर रही है.

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निखिल अनुराग

लेखक के बारे में

By निखिल अनुराग

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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