मरम्मत की बाट जोह रही धर्मशाला, परेशानी

अनदेखी. ब्रिटिश काल में निर्मित धर्मशाला में लटका है तालाअरवल : जिला मुख्यालय का एकमात्र यात्रियों को ठहरने वाला धर्मशाला अपने जीर्णाद्धार की बाट जोह रहा है. या कहा जाय कि अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. विदित हो कि जिला मुख्यालय में यात्रियों को ठहरने के लिए ब्रिटिश काल में निर्मित धर्मशाला में […]
अनदेखी. ब्रिटिश काल में निर्मित धर्मशाला में लटका है ताला
अरवल : जिला मुख्यालय का एकमात्र यात्रियों को ठहरने वाला धर्मशाला अपने जीर्णाद्धार की बाट जोह रहा है. या कहा जाय कि अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. विदित हो कि जिला मुख्यालय में यात्रियों को ठहरने के लिए ब्रिटिश काल में निर्मित धर्मशाला में ताला लटक रहा है. जिसके कारण इसका लाभ यात्रियों को नहीं मिल रहा है. जबकि अरवल को जिला बने लगभग दो दशक का समय बितने को है. लेकिन अब तक इस धर्मशाला के जीर्णोद्धार करने की दिशा में सरकारी स्तर पर कोई पहल नहीं की गयी है. लोगों को अरवल में नगर पर्षद के गठन के बाद यह उम्मीद जगी थी कि शायद अब इस धर्मशाला का जीर्णोद्धार किया जायेगा. लेकिन लोगों की यह उम्मीद धरी की धरी रह गयी.
कब हुई इसकी स्थापना : देश की आजादी के दशक में सन 1950 को यूनियन बोर्ड की जमीन पर आम लोगों के सहयोग से इसका निर्माण किया गया था. जब अरवल को सिर्फ प्रखंड का दर्जा प्राप्त था.
क्या है इसमें सुविधाएं : धर्मशाला का निर्माण आम लोगों के सहयोग से करवाया गया था. जिस कारण इसमें यात्रियों को ठहरने के लिए तीन कमरा, शौचालय, पीने का पानी के लिए चापाकल के अलावा एक बड़ा हॉल का निर्माण कराया गया था. इसके निर्माण के बाद अधिकांश वैसे यात्री इसमें ठहरते थे जो सोन नदी के सहारे भोजपुर आया जाया करते थे या फिर इसका उपयोग शादी ब्याह के मौसम में बरातियों के ठहराने के लिए किया जाता था.
वर्तमान समय में क्या हालत है :
वर्तमान समय में रखरखाव के अभाव में इसका भवन जर्जर हालत में है और इसमें अगल बगल के दुकानदारों द्वारा अपना अपना सामान रखा जाता है. स्थानीय लोगों ने इस धर्मशाला के जीर्णोद्धार के लिए जिला प्रशासन, नगर पालिका व नगर पर्षद तथा जनप्रतिनिधियों से गुहार लगायी है.
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