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लोकगायन की परंपरा की अलग है पहचान

Updated at : 05 Feb 2017 4:05 AM (IST)
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लोकगायन की परंपरा की अलग है पहचान

करपी(अरवल) : सरस्वती पूजा के अवसर पर प्रखंड क्षेत्र के बस्ती बिगहा गांव में गुरुवार की रात आयोजित दू गोला कार्यक्रम का उद्घाटन राजद के वरिष्ठ नेता रामकेवल सिंह यादव एवं मुखिया संघ के जिला अध्यक्ष अभिषेक रंजन ने संयुक्त रूप से किया. उद्घाटन के बाद इन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोक गायन हुआ […]

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करपी(अरवल) : सरस्वती पूजा के अवसर पर प्रखंड क्षेत्र के बस्ती बिगहा गांव में गुरुवार की रात आयोजित दू गोला कार्यक्रम का उद्घाटन राजद के वरिष्ठ नेता रामकेवल सिंह यादव एवं मुखिया संघ के जिला अध्यक्ष अभिषेक रंजन ने संयुक्त रूप से किया. उद्घाटन के बाद इन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोक गायन हुआ करता था. लेकिन आज लोक गायन ग्रामीण क्षेत्रो में काफी कम देखा जा रहा है जो चिंता का विषय है. लोक गायन होने से युवा वर्गों में इसके प्रति अपनी सांस्कृतिक कला को प्रदर्शित करने का मौका मिलता था. इन्होंने कहा कि पहले गांव में लोग शाम एक जगह इकट्ठा होते थे और सामूहिक रूप से लोक गायन करते थे.

जहां युवा वर्ग इस क्षेत्र में वाद्ययंत्र बजाने एवं गाने की भी कला को सीखते थे. लेकिन अब यह परंपरा धीरे-धीरे सिमटते जा रही है. गांव के युवा वर्ग के लोगों के साथ वृद्ध लोगों को भी पुनः इस लोक गायन की परंपरा को पुनः शुरू करनी चाहिए. इस मौके पर निर्णायक के रूप में शिक्षक रामध्यान सिंह, राजेंद्र यादव समेत अन्य लोग उपस्थित थे. इसके पश्चात व्यास सुदर्शन एवं औरंगाबाद सृजन पाठक व्यास के बीच पूरी रात चली मुकाबला का लुफ्त लोगों ने उठाया.

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