कोईलवर.
सरकार चाहे लाख दावे कर ले, लेकिन सूबे में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बुरा है. सरकारी नुमाइंदों की नजरअंदाजी की वजह से लोगों को समुचित स्वास्थ्य लाभ नही मिल पा रहा है. इसी क्रम में कोईलवर प्रखंड के भी लगभग तीन लाख लोगों की आबादी की स्वास्थ्य सेवा भगवान भरोसे है. प्रखंड का सुदूर दक्षिणी इलाका हो या उतर का सुदूर दियारा का इलाका अगर आपातकाल में स्वास्थ्य संबंधित कोई परेशानी हुई तो आपको या तो 15 किमी दूर कोईलवर पीएचसी आना होगा या फिर 25 किमी दूर आरा सदर अस्पताल जाना होगा. कोईलवर प्रखंड में धरातल पर तीन श्रीपालपुर, बिंदगांवा और चांदी में अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र का भवन है जहां लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती थीं लेकिन प्रशासनिक उदासीनता की वजह से केवल श्रीपालपुर स्थित दो कमरों के एपीएचसी में ही लोगों को कभी कभार स्वास्थ्य सुविधा मिल पा रही है.डेढ़ करोड़ की लागत से बने बिंदगांवा स्वास्थ्य केंद्र में नहीं आते डॉक्टर : प्रखंड मुख्यालय से 15 किमी दूर दियारे में गंगा और सोन के संगम पर बसा बिंदगांवा गांव जदयू के सचेतक संजय गांधी का पैतृक गांव है. उनके पूर्वज और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के साथ विधान परिषद सभापति रहे स्व देवशरण सिंह के नाम पर पांच साल पहले लगभग डेढ़ करोड़ की लागत से अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र के लिए भवन का निर्माण किया गया. लेकिन बनने से लेकर आजतक इलाके के तकरीबन 20 हजार लोगों को इस भवन से मिलने वाली स्वास्थ्य सेवा मयस्सर नहीं हो पायी है. हां इतना अवश्य है कि यहां दो एएनएम की ड्यूटी दी गयी है जो अपनी सुविधानुसार कभी कभार आती हैं बैठती है और चली जाती है. बाद बाकी यह भवन सुरक्षा गार्डों के भरोसे रहता है. लोग बताते हैं कि बाढ़ के दिनों में कुछ दिनों के लिए एकाध डॉक्टर और कुछ दवाइयां भेजी जाती हैं जो नाकाफी होती हैं. बाढ़ के पानी के लौटने के साथ डॉक्टर और दवाइयां भी वापस लौट जाते हैं. स्थानीय रजनीकांत सिंह बताते हैं कि जिस अस्पताल में दो एमबीबीएस डाक्टर समेत तीन डाक्टर, एक जीएनएम, दो एएनएम, एक फार्मासिस्ट, एक क्लर्क, दो चतुर्थवर्गीय कर्मी की ड्यूटी लगनी चाहिए. उस अस्पताल को खानापूर्ति के लिए दो एएनएम और दो गार्ड के भरोसे छोड़ दिया गया है. जिस कारण नया और पुराना बिंदगावा, सेमरा, बंधु छपरा, विशुनपुर, फुंहा, सबलपुर के लोग बीमार होने पर आरा, कोईलवर का रुख करते हैं.उद्घाटन के बाद से बंद पड़ा है चांदी एपीएचसी : इधर कोईलवर प्रखंड के दक्षिणी छोर के लोगों को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए तकरीबन सवा करोड़ की लागत से चांदी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के प्रांगण में ही 5800 वर्गफुट में अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र का भवन बनाया गया. जहां फार्मेसी, पैथोलॉजी लैब, माइनर ओटी, चिकित्सक कक्ष व हेल्थ एंड वेलनेस हॉल सहित कई अन्य सुविधा प्रदान की गयी है. स्थानीय विधायक की अनुशंसा,जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों के अथक प्रयास से भवन तो बन गया लेकिन उद्धाटन के बाद से इसमें ताला जड़ा है. इससे लोगों को मायूसी हाथ लगी है. बनने के बाद से एक भी दिन यहां डॉक्टर नही बैठे हैं. लोगों को अब भी कोईलवर और आरा के अस्पतालों के भरोसे इलाज कराना पड़ रहा है. स्थानीय निवासी व राष्ट्रीय लोकमोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष जागा कुशवाहा कहते है कि एपीएचसी चांदी के नवनिर्मित भवन में डॉक्टरों की नियमित बहाली के लिए मुख्यमंत्री को लिखा गया है. कई बार स्थानीय स्तर पर जिलाधिकारी और सिविल सर्जन से भी बात की गयी है जिस पर सकारात्मक जवाब मिला है. इस केंद्र के चालू हो जाने से इलाके के 50 हजार से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सेवा मिलने में सहूलियत हो जायेगी.जब इस संबंध में भोजपुर सिविल सर्जन शिवेंद्र कुमार सिन्हा से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि ऑन पेपर कोईलवर में सिर्फ एक ही एपीएचसी श्रीपालपुर है. बिंदगांवा और चांदी में बिल्डिंग बना दिया गया है लेकिन वो एपीएचसी नहीं है. हम उन्हें एपीएचसी मानते ही नही है तो सुविधा कहां से दें. अभी उस बिल्डिंग के लिए पद सैक्शन ही नहीं हुआ है, वहां अभी किसी की पोस्टिंग भी नहीं हुई है. जब से मामला संज्ञान में आया है हमलोग विभाग को इसके लिए लिखते रहते हैं. जब सैंक्शन ही नहीं है तो हम कहां से माने की यह अस्पताल है यह सिर्फ एक बिल्डिंग है बस हमको इतना ही पता है. इधर कोईलवर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी उमेश कुमार सिंह कहते है कि दोनों भवनों को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है. भवन बनकर तैयार हो गया है. पद सृजन के लिए विभाग से पत्राचार किया जा रहा है. जैसे ही स्वीकृत भवन और पदों के विरुद्ध रिक्तियों को विभाग द्वारा भर दिया जायेगा, वहां स्वास्थ्य सेवा बहाल कर दिया जायेगा.
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