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दूसरों को क्षमा करना ही वास्तविक क्षमा है : मुनिश्री

Updated at : 08 Sep 2025 7:06 PM (IST)
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दूसरों को क्षमा करना ही वास्तविक क्षमा है : मुनिश्री

पर्युषण महापर्व के समापन पर क्षमावाणी महापर्व का हुआ आयोजन

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आरा.

महाजन टोली नंबर दो स्थित श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर प्रांगण में मुनिश्री 108 विशल्यसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में क्षमावाणी महापर्व का भव्य आयोजन हुआ. परंपरागत रूप से समस्त प्रतिमा का जलाभिषेक, भव्य पंचामृत अभिषेक, मंगल आरती, पुष्पवृष्टि, वृहद शांतिधारा, जन्म समय की आरती, स्वयंभू स्त्रोत, देव शास्त्र गुरु की पूजा, पार्श्वनाथ पूजा, क्षमावाणी पूजा, जयमाला समर्पण भक्तों के द्वारा किया गया.

इसमें प्रथम जलाभिषेक अशोक कुमार जैन, शांतिधारा रत्ना-कमलेश जैन एवं जयमाला का सौभाग्य मधु-विमलेश कुमार जैन परिवार को प्राप्त हुआ. इस अवसर पर मुनिश्री विशल्यसागर जी महाराज ने अपने संबोधन में बोले कि अंतकरण की उदारता का नाम ही क्षमा है. यह क्षमा जिसके भीतर अवतरित हो जाती है, वह परमात्मा को शीघ्र पा लेता है. हम अपने भीतर क्षमा गुण को जागृत करें और सारे विश्व को अपना बनाकर परमात्मा की विरासत को प्राप्त करें. परमात्मा की विरासत को प्राप्त करने के लिये मात्र इतना ही ध्यान रखें कि हमें क्षमा पश्चाताप पूर्वक मांगना है. विगत में हुई गलतियों को न दोहराने का संकल्प ग्रहण करना है. क्योंकि क्षमा पर क्षमा मांगते हुए गलती पर गलती करते चले जाना अक्षम्य अपराध है. क्षमा उदारता का परिचायक है. क्षमा भले मन का द्योतक है. क्षमा महानता की परख है. क्षमा अहंकार का निरसन है.क्षमा निर्मल चारित्र का संस्थापक है. क्षमा विनाश की जड़ का विनाशक है. क्षमा दान, दया, परोपकार, सौहार्द, मैत्री, सत्य ब्रह्मचर्य, धन, विद्या, यश, बुद्धि सभी का विकासक है. बलवान को देख क्षमा, कमजोर को देख-क्रोध.यह धर्म नहीं विकृत मानसिकता है.क्षमा तो अपने से कमजोर को भी करो. स्वयं शक्तिवान होकर भी दूसरों को क्षमा करना ही वास्तविक क्षमा है. वहीं क्षमा, क्षमा वीरस्य भूषणम् सूत्र को सार्थक करती है. क्षमा को पत्रों के माध्यम से मत बांटो. अपितु मैत्री के भावों को वृद्धिगत करो. भीतर की शत्रुता को समाप्त करने का नाम ही क्षमा है.मीडिया प्रभारी निलेश कुमार जैन ने बताया कि संघस्थ ब्रह्मचारी अनिष भैया दशलक्षण के 11 दिन का उपवास, आरा समाज के विमलेश कुमार जैन एवं उनके पुत्रवधू अन्नू जैन के सोलहकारण व्रत के उपलक्ष्य में समाज द्वारा शोभायात्रा निकाला. उनका सम्मान मंदिर परिसर पर किया गया. क्षमावाणी महापर्व के समापन पर उपस्थित लोगों ने एक दूसरे से क्षमायाचना किया. कार्यक्रम के समाप्ति पर साधर्मी वात्सल्य की व्यवस्था स्व शशिलता, ज्ञान चंद्र जैन जी की पुण्य स्मृति में शुचिता, श्रेयांश जैन के द्वारा किया गया था. इसे सभी भक्तों ने आनंदपूर्वक ग्रहण किए। कार्यक्रम को सफल बनाने में पंचायती मंदिर के संयोजक आकाश जैन, अजय जैन, अध्यक्ष कमलेश जैन, उपाध्यक्ष रीना जैन, सचिव डॉ आदित्य विजय जैन, विभू जैन, कोषाध्यक्ष धीरेंद्र चंद्र जैन, संचालन डॉ शशांक जैन, रौशन चंद्र जैन, मनोज जैन, दीपू जैन, नीरज किशोर जैन, साहू जैन, डॉ श्वेता जैन के साथ सैकड़ों की संख्या में भक्तगण की भूमिका अहम रही.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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