भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में छलका भाई का दर्द, बोला- न्याय नहीं मिला तो नहीं करूंगा नौकरी

Author Vikas Jha
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भरत तिवारी का फाइल फोटो.

Bharat Tiwari Encounter Case: भरत तिवारी एनमामले में उनके चचेरे भाई और सिपाही भर्ती में चयनित आशीष तिवारी ने कहा कि यदि न्याय नहीं मिला तो वह नौकरी नहीं करेंगे. उन्होंने एक सप्ताह में कार्रवाई की मांग की.

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आरा से नरेंद्र प्रसाद सिंह की रिपोर्ट
Bharat Tiwari Encounter Case: भरत तिवारी एनकाउंटर (Bharat Tiwari Encounter)मामले में न्याय नहीं मिला तो नौकरी नहीं करूंगा. सभा स्थल पर आक्रोश से पूरी तरह भरे भरत तिवारी के चचेरे भाई आशीष तिवारी ने यह बड़ा ऐलान कर सबको चौंका दिया है. उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि मेरा चयन बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर हो गया है, लेकिन इस दर्दनाक और संदेहास्पद घटना के बाद हमने दृढ़ निर्णय लिया है कि अब हमें ऐसी व्यवस्था में नौकरी नहीं करनी है. अब हमारा एकमात्र लक्ष्य अपने भाई के लिए न्याय सुनिश्चित करना है और इसके लिए हम किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं.

एक सप्ताह में न्याय न मिलने पर दी खुली चेतावनी

आशीष तिवारी ने प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आगामी एक सप्ताह के भीतर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर हमें न्याय नहीं मिला, तो हम दिखाएंगे कि कैसे न्याय लिया जाता है. यह मेरा पत्थर की लकीर जैसा वचन है और यह मेरा खुद से किया गया वादा है. संबोधन के दौरान आशीष तिवारी काफी गहरे आक्रोश और गुस्से में दिखाई दे रहे थे. वे बार-बार अपनी बात चिल्लाकर वहां मौजूद सैकड़ों लोगों से कह रहे थे, जिसे सुनकर सभा में मौजूद अन्य युवाओं का गुस्सा भी सातवें आसमान पर पहुंच गया.

युवाओं के मन में प्रशासन के प्रति नफरत का भाव

चचेरे भाई ने आगे कहा कि आज इस क्षेत्र के हर एक युवा के मन में स्थानीय जिला प्रशासन एवं पुलिस की कार्यशैली के प्रति घोर नफरत का भाव भर गया है. इस संदिग्ध एनकाउंटर के बाद से युवाओं के मन में व्यवस्था के खिलाफ भारी आक्रोश पनप रहा है. यदि राज्य सरकार ने समय रहते इस मामले में कोई सही और पारदर्शी कदम नहीं उठाया तथा दोषी अधिकारियों व पुलिसकर्मियों को सख्त सजा नहीं दी, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और भी उग्र रूप अख्तियार कर सकता है.

सरकार के लिए बन सकती है गंभीर चुनौती

स्थानीय प्रबुद्ध जनों और राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि यदि इस मामले को दबाने का प्रयास किया गया, तो यह सरकार और गृह विभाग के लिए एक गंभीर चुनौती साबित हो सकती है. सभा के अंत में युवाओं ने पीड़ित परिवार के समर्थन में नारे लगाए और शासन से निष्पक्ष जांच की मांग को दोहराया. परिजनों का कहना है कि यह लड़ाई तब तक थमेगी नहीं, जब तक कि इस कथित एनकाउंटर की पूरी सच्चाई जनता के सामने नहीं आ जाती और असली गुनहगारों को सलाखों के पीछे नहीं भेज दिया जाता.

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विकाश झा

लेखक के बारे में

By विकाश झा

विकाश झा डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में छह वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक तथा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है. स्पोर्ट्स, हाइपरलोकल और पॉलिटिकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं. क्रिकेट, समाज और राजनीति से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष पकड़ है. वे तथ्य आधारित, प्रभावशाली और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करने में रुचि रखते हैं.

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