आरा में तालाबों पर अतिक्रमण, जलसंकट का खतरा गहराया; पर्यावरण संतुलन पर असर

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तालाब की तस्वीर

Arrah News: आरा शहर के कई ऐतिहासिक तालाब अतिक्रमण की चपेट में हैं. गांधीनगर और बिंद टोली समेत कई इलाकों में तालाबों का क्षेत्र तेजी से घटता जा रहा है, जिससे पर्यावरण संतुलन पर भी असर पड़ रहा है. स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

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Arrah News: (नरेंद्र प्रसाद सिंह) आरा शहर में तालाब कभी जीवन और पर्यावरण संतुलन का प्रमुख आधार माने जाते थे, लेकिन वर्तमान समय में इनकी स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है. शहर के कई महत्वपूर्ण तालाब अतिक्रमण और अवैध निर्माण की चपेट में आकर अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वार्थवश लोग तालाबों की जमीन पर कब्जा कर आवासीय निर्माण कर रहे हैं, जबकि प्रशासन इस पूरे मामले में मूकदर्शक बना हुआ है.

गांधीनगर तालाब का घटता अस्तित्व

गांधीनगर मोहल्ले में स्थित लगभग 6 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले तालाब का अस्तित्व लगातार सिकुड़ता जा रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार, अवैध रूप से जमीन की बिक्री और अतिक्रमण के कारण अब यह तालाब लगभग 4 एकड़ तक ही सीमित रह गया है. कई लोगों द्वारा तालाब के अंदर घर और अन्य निर्माण कार्य भी कर लिए गए हैं. आरोप है कि इस पूरे मामले में अब तक कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है.

बिंद टोली तालाब भी संकट में

बिंद टोली स्थित एक अन्य महत्वपूर्ण तालाब भी अतिक्रमण की मार झेल रहा है. पहले यह तालाब 9 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ था, लेकिन अब घटकर लगभग 3 एकड़ तक सीमित रह गया है. चारों ओर से अतिक्रमण होने के कारण तालाब का स्वरूप लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की.

प्रशासन पर गंभीर आरोप

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कभी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. यहां तक कि एक मामले में यह भी आरोप सामने आया है कि जिला प्रशासन से जुड़े कर्मियों द्वारा भी तालाब क्षेत्र में निर्माण कर लिया गया है. लोगों का कहना है कि जब प्रशासन से जुड़े लोग ही नियमों का उल्लंघन करेंगे तो आम लोगों पर कार्रवाई की उम्मीद कैसे की जा सकती है.

पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि तालाबों का लगातार सिकुड़ना शहर के पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए गंभीर खतरा है। तालाब न केवल जल संचयन का स्रोत होते हैं, बल्कि भू-जल स्तर को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं.

लोगों की मांग-अतिक्रमण हटे, तालाबों का संरक्षण हो

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी अतिक्रमणों की जांच कर तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए. साथ ही, इनके संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए ठोस योजना बनाई जाए, ताकि शहर का पर्यावरण संतुलन बचाया जा सके.

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रागिनी शर्मा

लेखक के बारे में

By रागिनी शर्मा

वर्तमान में मैं, रागिनी शर्मा पटना स्थित प्रभात खबर डिजिटल की टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं. यहां मैं बिहार के विभिन्न जिलों से जुड़ी अहम खबरों, राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर काम कर रही हूं. मेरा उद्देश्य हर खबर को सरल, सटीक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक न सिर्फ जानकारी प्राप्त करें बल्कि उससे जुड़ाव भी महसूस करें और डिजिटल पत्रकारिता को और अधिक सार्थक बनाया जा सके.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही मैंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. अपने कॉलेज के समय में हिंदुस्तान के साथ इंटर्नशिप के दौरान मुझे पहली बार वेब पोर्टल पर खबर लिखने और डिजिटल न्यूज राइटिंग का व्यावहारिक अनुभव मिला. इसी दौरान मैंने न्यूज़ लेखन, हेडलाइन स्ट्रक्चर और डिजिटल स्टोरी प्रेजेंटेशन की बुनियादी समझ विकसित की.

इसके बाद वर्ष 2025 में पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरा करने के साथ ही मैंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की. डिजिटल मीडिया में मेरी पहली भूमिका फर्स्ट बिहार झारखंड के साथ रही, जहाँ मैंने एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग के माध्यम से बिहार के जमीनी मुद्दों को कवर किया. इस दौरान मैंने राज्य की राजनीति, सामाजिक सरोकारों और आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग की.

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