आरा में दवा दुकानों की बंदी का व्यापक असर, मरीजों को हुई परेशानी

दवा दुकानों की बंदी का दिख रहा असर
आरा में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर एक दिवसीय बंद सफल रहा. दवा दुकानों के बंद रहने से मरीजों को परेशानी हुई. केमिस्टों ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक, सख्त नियम, लाइसेंस आधारित बिक्री व्यवस्था और नियामक सुधारों की मांग को लेकर धरना भी दिया.
Arrah News: (नरेन्द्र प्रसाद सिंह की रिपोर्ट) ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी बंद का भोजपुर जिले में व्यापक असर देखने को मिला. दवा व्यवसायियों ने अपने प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रखकर इस आंदोलन को सफल बनाया. इस बंदी के कारण मरीजों को दवा उपलब्ध कराने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
क्यों हो रहा आंदोलन?
दवा व्यवसायियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल उनके हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य आम जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है साथ ही औषधि वितरण व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखना और छोटे एवं मध्यम लाइसेंसधारी दवा विक्रेताओं के भविष्य की रक्षा करना है.
एसोसिएशन का बयान
भोजपुर जिला अध्यक्ष सतेंद्र सिंह ने बताया कि यह आंदोलन पूरी तरह स्वैच्छिक, शांतिपूर्ण और अनुशासित रहा. उन्होंने कहा कि केमिस्ट समुदाय ने एकजुट होकर इस आंदोलन को सफल बनाया और सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
धरना प्रदर्शन
आंदोलन की सफलता के उपरांत महावीर टोला, आरा में एसोसिएशन के बैनर तले धरना आयोजित किया गया। इसमें कई प्रमुख लोग उपस्थित थे. इस धरना में बड़ी संख्या में दवा व्यवसायी एवं पदाधिकारी शामिल हुए.
प्रमुख मांगें
दवा व्यवसायियों द्वारा सरकार और नियामक संस्थाओं से निम्नलिखित मांगें रखी गईं:
- दवाओं की अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री पर सख्त रोक
- बिना वैध ड्रग लाइसेंस दवाओं की बिक्री एवं होम डिलीवरी पर नियंत्रण
- ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की अत्यधिक छूट नीति पर रोक
- ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए स्पष्ट एवं सख्त नियामक ढांचा तैयार करना
- जीएसआर 817 ई एवं जीएसआर 220 ई अधिसूचनाओं की समीक्षा
- मौजूदा कानूनी एवं व्यावहारिक विसंगतियों को दूर करना
- ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के अनुसार केवल निर्धारित परिसर से ही बिक्री की अनुमति लागू रखना
आंदोलन का प्रभाव
इस आंदोलन से जिले भर में अधिकांश दवा दुकानें बंद रहीं जिससे मरीजों को आवश्यक दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हुई.
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लेखक के बारे में
By निखिल अनुराग
मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.
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