आरा सदर अस्पताल में बंद पड़ा ऑक्सीजन प्लांट, रोज 45 सिलेंडरों पर खर्च हो रहे हजारों रुपये

Author Vikas Jha
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ऑक्सीजन प्लांट

Arrah News: आरा सदर अस्पताल में कोरोना काल में लगाया गया ऑक्सीजन प्लांट अब तक चालू नहीं हो सका है. इसके कारण अस्पताल को रोजाना महंगे ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे सरकारी राजस्व पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.

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Arrah News (नरेन्द्र प्रसाद सिंह की रिपोर्ट)
भोजपुर जिले के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य केंद्र सदर अस्पताल में वर्षों पहले स्थापित ऑक्सीजन प्लांट अब तक चालू नहीं हो सका है. प्लांट और पाइपलाइन की व्यवस्था होने के बावजूद मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही के कारण एक ओर मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है, वहीं दूसरी ओर रोजाना महंगे ऑक्सीजन सिलेंडरों की खरीद पर सरकारी राशि खर्च की जा रही है.

सरकार की सुविधा पर प्रबंधन की उदासीनता भारी

सरकार ने सदर अस्पताल को मॉडल अस्पताल के रूप में विकसित करने के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, ताकि जिले के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े. अस्पताल में जांच, एक्स-रे और अन्य चिकित्सा सुविधाओं के साथ ऑक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था भी की गई थी. इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ऑक्सीजन प्लांट को चालू कराने में रुचि नहीं दिखा रहा है, जिससे मरीजों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है.

कोरोना काल में लगाया गया था ऑक्सीजन प्लांट

कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन की बढ़ती जरूरत को देखते हुए सदर अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था. बाद में अस्पताल के पुराने भवन को तोड़कर नया भवन बनाया गया और मरीजों के बेड तक पाइपलाइन भी बिछाई गई. नए भवन का उद्घाटन हुए भी एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक ऑक्सीजन प्लांट से मरीजों को सीधे ऑक्सीजन आपूर्ति की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है.

सुविधा मौजूद, फिर भी खरीदे जा रहे सिलेंडर

अस्पताल में ऑक्सीजन उत्पादन और सप्लाई की पूरी व्यवस्था मौजूद होने के बावजूद मरीजों की जरूरत पूरी करने के लिए सिलेंडरों पर निर्भरता बनी हुई है. जानकारों का कहना है कि प्लांट शुरू होने पर ऑक्सीजन की आपूर्ति कम लागत में संभव हो सकती है, लेकिन इसके बंद रहने से अनावश्यक खर्च बढ़ रहा है.

रोजाना 45 सिलेंडरों की खपत

जानकारी के अनुसार मॉडल अस्पताल में प्रतिदिन करीब 45 ऑक्सीजन सिलेंडरों की खपत होती है. एक सिलेंडर के लिए 1600 से 2800 रुपये तक का भुगतान किया जाता है. ऐसे में हर दिन हजारों रुपये खर्च हो रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऑक्सीजन प्लांट चालू कर दिया जाए तो सरकारी राशि की बचत के साथ मरीजों को भी बेहतर सुविधा मिल सकेगी.

उठ रहे सवाल

ऑक्सीजन प्लांट और पाइपलाइन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद उनका उपयोग नहीं होना अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है. लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच कर प्लांट को जल्द चालू कराने की मांग की है, ताकि मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सके और सरकारी धन की अनावश्यक बर्बादी रोकी जा सके.

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विकाश झा

लेखक के बारे में

By विकाश झा

विकाश झा डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में छह वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक तथा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है. स्पोर्ट्स, हाइपरलोकल और पॉलिटिकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं. क्रिकेट, समाज और राजनीति से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष पकड़ है. वे तथ्य आधारित, प्रभावशाली और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करने में रुचि रखते हैं.

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