गुलाबबाग मंडी जा रहे मक्का किसानों को आधी रात को रोककर पुलिसकर्मियों ने की अवैध वसूली, पीड़ित ने दिया आवेदन

Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 05 Jun 2026 9:44 AM

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पीड़ित आवेदनकर्ता

Police Extortion: अररिया में गुलाबबाग मंडी जा रहे मक्का किसानों से पुलिसकर्मियों द्वारा आधी रात को बीच सड़क पर अवैध वसूली करने का एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है. पीड़ित किसान ने नगर थाने में लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है, जिसके बाद पुलिस महकमे में खलबली मच गई है.

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अररिया से राहुल सिंह की रिपोर्ट

Police Extortion: बिहार सरकार जहां एक ओर अन्नदाताओं की आय दोगुनी करने और उन्हें बिचौलियों से बचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आ रहे हैं. ताजा मामला अररिया जिला मुख्यालय के नगर थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां अपनी हाड़-तोड़ मेहनत की मक्के की फसल को बेचने पूर्णिया की गुलाबबाग मंडी जा रहे ट्रैक्टर चालकों और किसानों को खाकी वर्दीधारियों ने अपना शिकार बनाया. अररिया सदर अस्पताल के मुख्य गेट के पास आधी रात को बाइक सवार दो पुलिसकर्मियों पर अवैध रूप से रुपयों की मांग करने, गाली-गलौज करने और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देने का संगीन आरोप लगा है. पीड़ित किसान ने नगर थानाध्यक्ष को आवेदन देकर इंसाफ और आरोपियों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है.

सदर अस्पताल गेट के पास रात 3:10 बजे की घटना; 500 रुपये प्रति गाड़ी की मांग

  • पीड़ित किसान की पहचान: नगर थाना में आवेदन देने वाले मुख्य पीड़ित किसान की पहचान अररिया के डमहैली गांव निवासी अशरफ आलम के रूप में की गई है.
  • आधी रात को नाकेबंदी: अशरफ आलम ने बताया कि बीती 04 जून की देर रात (तड़के लगभग 3:10 बजे) वे अपने तीन ट्रैक्टरों पर मक्का लादकर गुलाबबाग मंडी की ओर बढ़ रहे थे. जैसे ही गाड़ियां अररिया सदर अस्पताल के मुख्य गेट के पास पहुंचीं, मोटरसाइकिल पर सवार दो वर्दीधारी पुलिसकर्मियों ने हाथ देकर तीनों ट्रैक्टरों को जबरन रुकवा लिया.
  • झूठे केस की धमकी: ट्रैक्टर रुकते ही पुलिसकर्मियों ने प्रति गाड़ी 500 रुपये (कुल 1500 रुपये) की अवैध मांग की. जब किसान और चालकों ने इसका विरोध किया, तो पुलिस वाले आपा खो बैठे. उन्होंने सरेआम भद्दी-भद्दी गालियां दीं, मारपीट करने की धमकी दी और गाड़ियों को किसी झूठे कानूनी मामले में सीज कर जेल भेजने का खौफ दिखाया.

चाय दुकानदार और आम लोग बने चश्मदीद; ₹100 देकर छूटी जान

पीड़ित किसान की व्यथा: आवेदनकर्ता अशरफ आलम ने अपने पत्र में लिखा है कि पुलिस के इस उग्र और डरावने रूप को देखकर वे बुरी तरह सहम गए. काफी हाथ-पैर जोड़ने और मान-मनौव्वल के बाद, मजबूरन उन्हें अपनी जेब से 100 रुपये घूस के तौर पर देने पड़े, तब जाकर पुलिसकर्मियों ने गाड़ियों को आगे जाने दिया. घटना के वक्त अस्पताल के ठीक सामने एक चाय की दुकान खुली थी, जहां मौजूद दुकानदार और कई अन्य राहगीर इस पूरी शर्मनाक करतूत के चश्मदीद (प्रत्यक्षदर्शी) हैं. किसान ने भावुक होते हुए कहा, “हम मक्का किसान पहले ही कम उपज, मौसम की मार और फसल के गिरते दामों से आर्थिक रूप से टूट चुके हैं. ऐसे में सुरक्षा देने वाली पुलिस ही अगर सड़क पर लुटेरा बन जाएगी, तो हम कहाँ जाएंगे?”

सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगालने की मांग; नगर थानाध्यक्ष बोले- होगी कड़ी कार्रवाई

यह मामला सामने आते ही स्थानीय किसानों और वाहन चालकों में पुलिस के रवैये को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है. पीड़ित किसान अशरफ आलम ने नगर थानाध्यक्ष से मांग की है कि सदर अस्पताल गेट के पास लगे सरकारी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगाला जाए और चश्मदीद चाय दुकानदार के बयान के आधार पर आरोपी पुलिसकर्मियों की शिनाख्त कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए. इधर, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अररिया नगर थानाध्यक्ष मनीष कुमार रजक ने बताया कि पीड़ित किसान की ओर से एक लिखित आवेदन प्राप्त हुआ है. विभाग इस तरह की किसी भी अवैध वसूली या भ्रष्टाचार के खिलाफ बेहद गंभीर है. घटनास्थल के आस-पास की फुटेज निकाली जा रही है और उस समय उस रूट पर गश्त (पेट्रोलिंग) में तैनात जवानों की सूची से मिलान किया जा रहा है. जांच रिपोर्ट आते ही दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

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लेखक के बारे में

By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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