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सत्संग के बिना जीवन में सुख-शांति संभव नहीं

Updated at : 19 Mar 2025 7:05 PM (IST)
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सत्संग के बिना जीवन में सुख-शांति संभव नहीं

अच्छे कर्म सुख देते हैं

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-4-प्रतिनिधि, भरगामा प्रखंड के सिमरबनी उत्तर टोला के वार्ड संख्या तीन में एक दिवसीय कबीर सत्संग महोत्सव में बुधवार को समापन हो गया. महोत्सव में श्रद्धालु भक्ति के सागर में डुबकी लगाते नजर आये. इस आध्यात्मिक आयोजन में काशी बनारस से आये आचार्य आराध्य साहब ने अपने प्रवचनों से श्रद्धालुओं को आत्मज्ञान व सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी. संत आचार्य आराध्य साहब ने अपने प्रवचन में संत कबीर दास जी के जीवन व उनकी शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा संत कबीर केवल एक कवि नहीं, बल्कि समाज सुधारक व आध्यात्मिक गुरु भी थे. उनके दोहे हमें सच्चे जीवन की राह दिखाते हैं व हमें अंधविश्वास से दूर रहने की सीख देते हैं. उन्होंने सत्संग के महत्व को बताते हुए कहा कि जैसे बिना पांवों के चलना संभव नहीं, वैसे ही बिना सत्संग के जीवन में सुख-शांति संभव नहीं. संत आराध्य जी ने कहा कि सच्चे सद्गुरु का मिलना ईश्वर से मिलने के समान है. प्रवचनों में कर्म के सिद्धांत को विस्तार से समझाते हुए कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है. अच्छे कर्म सुख देते हैं, जबकि बुरे कर्म दुख का कारण बनते हैं. मौके पर बिरेंद्र मंडल,रामकृष्ण मंडल,मुक्ति रजक ,धर्मानंद मंडल,अनिल मंडल,गोपाल कुमार रजक ,रंजीत मंडल,ललित ऋषिदेव ,टिंकू कुमार,राजू कुमार ,संजीव कुमार ,गोपालकृष्ण मंडल, रंजन मंडल,भीमलाल मंडल सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PRAPHULL BHARTI

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By PRAPHULL BHARTI

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