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1925 से काली मंदिर में हो रही है मां दुर्गा की पूजा अर्चना

Updated at : 09 Oct 2024 11:24 PM (IST)
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1925 से काली मंदिर में हो रही है मां दुर्गा की पूजा अर्चना

फारबिसगंज नप क्षेत्र के वार्ड संख्या 24 में पटेल चौक के समीप अवस्थित काली मंदिर शहर का सबसे पुराना व ऐतिहासिक मंदिर है.

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लोगों की मुरादें होती हैं पूरीमो कलीमउद्दीन, फारबिसगंज. फारबिसगंज नप क्षेत्र के वार्ड संख्या 24 में पटेल चौक के समीप अवस्थित काली मंदिर शहर का सबसे पुराना व ऐतिहासिक मंदिर है. यहां वर्ष 1925 से ही मां दुर्गा की पूजा श्रद्धालु पूरे भक्तिभाव व श्रद्धापूर्वक करते आ रहे हैं. जानकारों के मुताबिक काली मंदिर की स्थापना 1920 ई में हुई थी, लेकिन यहां मां दुर्गा की पूजा 1925 ई से प्रारंभ होने की बातें बुजुर्गों के द्वारा बतायी जाती है. जानकार बताते हैं कि वर्ष 1925 में रामजतन साह, राजेंद्र भगत, बैधनाथ साह, रामावतार गुप्ता, डॉ केदारनाथ दास समेत अन्य लोगों ने मां भगवती की पूजा की शुरुआत की थी. बताया जाता है कि उस समय मंदिर का स्वरूप अभी की तरह नहीं था.

बंगाली रीति रिवाज से होती है पूजा

जानकारों के मुताबिक वर्ष 1965 में दुर्गा मंदिर का निर्माण छूआपट्टी निवासी जगरनाथ साह व उनकी धर्मपत्नी ज्योति देवी ने कराया था. इस मंदिर परिसर में ही वर्ष 1925 में पुराने पूर्णिया जिले के जमींदार गया प्रसाद उदयचंद ने सप्त कन्या मंदिर का निर्माण कराया था, जो शहर का एक मात्र मंदिर है. जिसकी ख्याति दूर-दूर तक है. इतना ही नहीं मंदिर परिसर में पांच देवी देवताओं के मंदिर हैं. इसमें मां दुर्गा मंदिर, काली मंदिर, सप्तकन्या मंदिर के साथ-साथ भगवान शिव व माता पार्वती के अलग-अलग भव्य मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है.

बंगाली रीति रिवाज से होती है पूजा

पूजा समिति के अध्यक्ष उदय शंकर देव ने बताया कि शहर के इस अति प्राचीन काली मंदिर में पंडित सुरेश झा व शंभू बनर्जी बंगाली रीति रिवाज के साथ बड़े ही श्रद्धा भाव से मां दुर्गा की पूजा अर्चना कराते हैं. प्रतिमा का निर्माण आकर्षक तरीके से आनंदपाल व बंगाल के कारीगरों की ओर से किया जाता है. मां दुर्गा की पूजा अर्चना को संपन्न कराने में एक पूजा से ही पूजा समिति के पदाधिकारियों व सदस्यों के अलावा समाज के लोग भी सहयोग में लगे रहते हैं. मंदिर में मां दुर्गा के दर्शन व पूजा कराने में पूजा समिति के अध्यक्ष उदय शंकर देव, सचिव अरुण निराला, कोषाध्यक्ष सुशील गुप्ता, नंदलाल गुप्ता, संजय साह, विनोद कुमार दास, अविनाश कन्नौजिया अंशु, ललन साह, शिवम साह, शिवम कुमार, राजेश कुमार साह, काली भगत सहित अन्य काफी स्थानीय लोग सक्रिय होकर लगे रहते हैं.

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