अररिया में खाद के लिए किसानों की लंबी कतार, 266 रुपये यूरिया 450 रुपये में खरीद रहे किसान,खाद की कालाबाजारी पर सवाल
खाद दुकानों पर लगी भीड़. | Prabhat Khabar Network
अररिया जिले में खाद की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे किसान बेहद परेशान हैं. यूरिया और डीएपी जैसी आवश्यक उर्वरक सरकारी दर से काफी अधिक कीमत पर बेचे जा रहे हैं, जिससे किसानों की लागत बढ़ रही है. इस मामले पर अधिक जानकारी यहाँ प्राप्त करें.
Araria News: बिहार के अररिया जिले में खाद की कीमतों को लेकर किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. सरकारी दावों के बावजूद किसानों को यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरक निर्धारित दरों पर नहीं मिल रहे. स्थिति यह है कि कई किसान सरकारी मूल्य से कहीं अधिक कीमत चुकाकर खाद खरीदने को मजबूर हैं. खेती के इस सबसे महत्वपूर्ण मौसम में खाद दुकानों पर लंबी कतारें लग रही हैं और किसान आरोप लगा रहे हैं कि शिकायत करने पर भी व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं हो रहा.
अररिया एक कृषि प्रधान जिला है, जहां बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं, लेकिन धान और पटुआ की खेती के मौसम में घर लौट आते हैं. इस समय खेतों की तैयारी और फसल प्रबंधन के लिए उर्वरक की जरूरत सबसे अधिक होती है. ऐसे में खाद की ऊंची कीमत किसानों की लागत बढ़ा रही है और उनकी आर्थिक चिंता भी.
सरकारी दर और बाजार की हकीकत में बड़ा अंतर
किसानों का कहना है कि यूरिया की सरकारी कीमत 266 रुपये प्रति बोरी है, लेकिन कई दुकानों पर 400 से 450 रुपये तक वसूले जा रहे हैं. डीएपी की निर्धारित कीमत 1350 रुपये है, जबकि 1800 से 2000 रुपये तक भुगतान करना पड़ रहा है.
इसी तरह अन्य उर्वरकों की कीमतों में भी भारी अंतर बताया जा रहा है. किसानों के अनुसार हरा सोना 1600 से 1800 रुपये और एनपीके 2050 से 2250 रुपये तक बिक रहा है. आधार कार्ड और रसीद देने के बाद भी निर्धारित मूल्य पर खाद नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं.
किसानों की जुबानी बढ़ती परेशानी
सिकटी के बरदाहा निवासी किसान मंसूर आलम ने कहा कि हर साल खाद की कालाबाजारी देखने को मिलती है. उनका आरोप है कि दुकानदार मनमाने दाम मांगते हैं और शिकायत करने पर कई दुकानदार एकजुट हो जाते हैं. ऐसे में किसान के सामने ऊंचे दाम पर खाद खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता.
धुमगढ़ निवासी प्रकाश कुमार मंडल ने बताया कि यूरिया की कीमत 266 रुपये तय है, लेकिन उन्हें 400 से 450 रुपये तक देना पड़ रहा है. डीएपी के लिए भी सरकारी मूल्य से काफी अधिक राशि वसूली जा रही है.
कुर्साकांटा के सोनापुर निवासी तेजनारायण मंडल ने कहा कि यूरिया 450 रुपये तक में मिल रही है और मांग करने पर अक्सर यह जवाब दिया जाता है कि खाद उपलब्ध नहीं है.
कुआड़ी के राजकिशोर यादव और सोनापुर के रविंद्र कुमार मंडल ने भी अन्य उर्वरकों के ऊंचे दाम की शिकायत करते हुए कहा कि निर्धारित मूल्य पर खाद मिलना मुश्किल हो गया है.
दुकानदार ने भी स्वीकार की ऊंची कीमत
कुर्साकांटा के एक खाद दुकानदार रामस्वरूप साह ने स्वीकार किया कि पंजीकृत किसानों से यूरिया 350 रुपये और बिना पंजीकरण वाले किसानों से 400 रुपये तक ली जा रही है. यह स्वीकारोक्ति इस बात की ओर संकेत करती है कि बाजार में सरकारी मूल्य और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच अंतर मौजूद है.
कृषि विभाग की कार्रवाई कितनी प्रभावी
जिला कृषि पदाधिकारी का कहना है कि अधिक कीमत पर खाद बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. उनके अनुसार नरपतगंज और कुर्साकांटा के दो दुकानदारों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है.
हालांकि किसानों का कहना है कि छिटपुट कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं हो रहा. उनका आरोप है कि पूरे जिले में खाद की उपलब्धता और मूल्य पर प्रभावी निगरानी की जरूरत है.
Araria News: खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
अररिया जैसे कृषि आधारित जिले में उर्वरक की ऊंची कीमत सीधे खेती की लागत बढ़ाती है. छोटे और सीमांत किसानों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है. यदि किसान महंगी खाद खरीदता है, तो उसकी उत्पादन लागत बढ़ती है और अंततः इसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि लाभ पर पड़ सकता है.
स्थानीय लोगों का मानना है कि खाद की आपूर्ति व्यवस्था को पारदर्शी बनाने, नियमित निरीक्षण करने और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने से ही स्थिति में सुधार संभव है.
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लेखक के बारे में
By मृगेंद्रमणि सिंह
मृगेंद्रमणि सिंह प्रिंट माध्यम में 16 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. प्रभात खबर के अररिया कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.
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