बाढ़पीड़ितों पर तस्करों की नजर

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अररिया : संगठित अपराध की श्रेणी में सुमार मानव तस्करी करने वालों की नजर इस जिले पर पूर्व से ही है. बाढ़ से परेशान व आर्थिक तंगी से जूझ रहे अशिक्षित लोगों पर मानव तस्करों की गिद्ध दृष्टि इस जिले पर है. ऐसे में प्रशासनिक सजगता के साथ गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाने की भी […]

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अररिया : संगठित अपराध की श्रेणी में सुमार मानव तस्करी करने वालों की नजर इस जिले पर पूर्व से ही है. बाढ़ से परेशान व आर्थिक तंगी से जूझ रहे अशिक्षित लोगों पर मानव तस्करों की गिद्ध दृष्टि इस जिले पर है. ऐसे में प्रशासनिक सजगता के साथ गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाने की भी जरूरत महसूस की जा रही है. मानव तस्कर इन मुसीबतों के बीच ही अपना काम आसानी से करने का तरीका भी ढूंढ़ लेते हैं.

कई तरीके अपनाते हैं मानव तस्कर : मानव तस्कर अपने लक्ष्य को पाने के लिए कई तरीके अपनाते हैं. पहले गांव के किसी व्यक्ति को विश्वास में लेते हैं. फिर गरीब तबकों के लड़की से शादी करने का एप्रोच करते हैं. उन्हें खुशहाल जीवन बिताने का सपना भी दिखाते हैं. शादी करने के एवज में कुछ पैसों का लालच भी देते हैं. शादी के बाद जब बेटी चली जाती है तो शायद ही वह कभी घर वापस आ पाती है. उसे देह व्यापार की मंडी में धकेल दिया जाता है.
और वह जीवन भर जिल्लतभरी जिंदगी जीने को विवश हो जाती है. वहीं बड़े-बड़े कालीन नगरियों में काम कराने के लिए बाल-श्रमिकों की तस्करी करने वाला गिरोह भी सक्रिय रहता है. गांव-गांव में कथित लेवर मेठ गरीब तबके के परिवार के बच्चों को अपने टारगेट पर रखता है. उन्हें अच्छा रोजगार दिलाने, अच्छी कमाई करने का भरोसा दिलाया जाता है. बच्चों के अभिभावक उनके लालच में फस कर अपने जिगर के टुकड़े को भेज देते हैं. उनके साथ. बच्चों को ले जा कर ये मानव तस्कर उन्हें कालीन बनाने के धंधेबाजों को सौंप कर मोटी कमाई कर लेते हैं.
बच्चे कालीन उद्योग के गुफानुमा कमरों में कराहता रहता है. इस तरह के कई मामले जिले में तब उजागर हुआ. जब इस क्षेत्र में काम करने वाली संस्था रेस्क्यू कर इन बाल श्रमिकों को यहां लाया. मानव तस्करी करने वालों को लंबा नेटवर्क खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों तक फैला रहता है. बड़े ही शातिराना अंदाज से अपने काम को अंदाज देते हैं.
इस पर नजर रखने के लिए गांव-गांव तक प्रशासन नजर रखे. यह समय का तकाजा है.
जिले में दो दर्जन मामले हैं दर्ज
मानव तस्करी को ले यह जिला तस्करों के निशाने पर रहा है. इसको ले विभिन्न थाना में कांड दर्ज है. चार मामले में न्यायालय ने दोषियों के विरुद्ध सजा भी दिया है. फारबिसगंज थाना कांड संख्या 610/14 में दलाल गैनुल, राजू सिंह को 10-10 वर्ष की सजा मिली. तो नरपतगंज थाना कांड संख्या 183/12 में रामचंद्र ऋषिदेव को 10 वर्ष की सजा मिली. महलगांव थाना कांड संख्या 307/13 में एक दलाल को चार साल की सजा मिली. वहीं महिला थाना कांड संख्या 35/15 में कथित मानव तस्कर को 10 वर्ष की सजा भी मिली है.
बावजूद मानव तस्करों पर सख्त नजर रखने की जरूरत है. अब जरा दर्ज कांडों पर गौर करें तो सामने आता है वह काला सच जो मानव तस्कर करते रहे हैं. जोकीहाट थाना कांड संख्या 20/05, नरपतगंज थाना कांड संख्य 192/05 फारबिसगंज थाना कांड संख्य 310/09, नगर थाना अररिया 170/10, फारबिसगंज थाना कांड संख्या 156/11, 63/12, नगर थाना 27/12, महिला थाना कांड संख्या 02/14, फारबिसगंज थाना कांड संख्या 924/14, कुआड़ी ओपी 165/14,
बौंसी थाना कांड संख्या 51/12 महलगांव थाना कांड संख्या 21/15, सिकटी थाना कांड संख्या 87/15, महिला थाना कांड संख्या 62/16, बथनाहा थाना कांड संख्या 354/16, महिला थाना कांड संख्या 35/15, नगर थाना कांड संख्या 64/11 दर्ज है. नियमानुसार अनुसंधान व कार्रवाई चल रही बतायी जाती है. वर्ष 2017 में भी इस तरह के मामले को लेकर महिला थाना कांड संख्या 49/17 दर्ज किया गया है. हालांकि पीड़िता की बरामदगी दिल्ली के लाल किला पुलिस के सहयोग से किया गया.
क्या कहते हैं समाजसेवी
मानव तस्करी को लेकर काम करने वाली संस्था तटवासी समाज के जिला समन्वयक साकेत श्रीवास्तव व न्यायालय में अपने दलीलों से सजा दिलाने वाली चर्चित महिला अधिवक्ता रीता कुमारी घोष का मानना है कि अशिक्षा, गरीबी की वजह से इस क्षेत्र पर मानव तस्करों की नजर रहती है. जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है.
प्रशासन इस दिशा में सूचना तंत्र विकसित करे. संस्था इस क्षेत्र को ले सक्रियता से काम करते प्रशासन को सहयोग करती रही है. बताया गया कि बाढ़ से तबाह हो चुके इस जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कथित दूल्हा बनकर आने वाले परदेशी काम दिलाने के नाम पर नाबालिग बच्चों को परदेश ले जाने वाले गिरोह पर सख्त नजर रखने की जरूरत वक्त की मांग है. तभी इस जिले को मानव तस्करों के गिद्ध दृष्टि से मुक्त कराया जा सकेगा.
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