शहर में एनएचआइ का अर्द्धनिर्मित नाला बना है संक्रामक बीमारियों का स्रोत

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अररिया : एनएच 327 ई पर जीरो माइल से चांदनी चौक होते हुए एसएसबी कैंप तक बन रहे नाला में जमा गंदा पानी के सड़ांध ने शहरवासियों का जीना मुहाल कर दिया है. कई स्थानों पर अर्द्धनिर्मित नाला लोगों के लिए दुर्घटना व संक्रामक बिमारियों का कारण बना हुआ है. बाढ़ के बाद इस नाले […]

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अररिया : एनएच 327 ई पर जीरो माइल से चांदनी चौक होते हुए एसएसबी कैंप तक बन रहे नाला में जमा गंदा पानी के सड़ांध ने शहरवासियों का जीना मुहाल कर दिया है. कई स्थानों पर अर्द्धनिर्मित नाला लोगों के लिए दुर्घटना व संक्रामक बिमारियों का कारण बना हुआ है. बाढ़ के बाद इस नाले में लगभग तीन से चार फीट तक पानी जमा है. बारिश के बाद भी नाले में पानी भर जाता है. इसके सड़ांध से सड़क के किनारे रहने वाले लोगों व सड़क से गुजरने वाले लोगों का जीना मुहाल हो गया है.

शहर के मुख्य मार्ग होने के कारण सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर परिषद की बनती है. लेकिन कार्य का जिम्मा अभी एनएचआइ के निर्माण एजेंसी के जिम्मे होने के कारण सफाई की जिम्मेदारी कार्यरत एजेंसी से कराने की बात कही जा रही है. नप के कार्यालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लगभग एक सप्ताह पूर्व ही मुख्य सड़क के दोनों तरफ बने फुटपाथ सह नाला में जमे पानी की सफाई का निर्देश राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को दिया गया है.

पत्र दिये जाने के बाद भी अभी तक एनएचआइ द्वारा नाले में जमा गंदा पानी के निकासी की व्यवस्था नहीं कर सका है. अररिया शहर में 13 अगस्त को बाढ़ का पानी घुसा. यह पानी चार दिनों तक जमा रहा. हैरानी की बात तो यह है कि लगभग एक वर्ष से एनएचआइ व जिला प्रशासन द्वारा यह कहा जा रहा है कि नाला को एक दूसरे से जोड़कर नाले के पानी का बहाव शहर से बाहर कर दिया जायेगा. लेकिन इस बड़ी समस्या पर किसी की नजर नहीं जा रही है.

नप अररिया ने नाल की सफाई के लिए एनएचआई को लिखा पत्र
अररिया नप द्वारा नाला के सफाई से पल्ला झाड़ते हुए इसके सफाई को लेकर एनएचआइ के कार्यपालक अभियंता को पत्र लिख दिया गया. लेकिन इस दिशा में अब तक एनएचआइ के कार्यपालक अभियंता या उनके विभाग द्वारा किसी भी प्रकार का कार्रवाई तो दूर जल जमाव के निदान को लेकर कान पर जूं तक नहीं रेंग पाया है. हालात तो यह है कि एनएचआइ के किसी भी अधिकारी से दूरभाष पर भी संपर्क नहीं हो पा रहा है. आखिरकार शहरवासी अपने इस समस्या का रोना किसके पास रोयें या फिर बेवजह ही प्रशासनिक विफलता का शिकार होकर संक्रमाक बिमारियों का शिकार बनते रहे.
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