सांसद की स्थिति सामान्य आज होंगे डिस्चार्ज
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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अररिया : अररिया के सांसद मो तसलीमउद्दीन की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ. स्थिति सामान्य है. सोमवार को अपोलो अस्पताल चेन्नई से डिस्चार्ज कर दिया जायेगा. सांसद के करीबी शादिक हासमी उर्फ चिंपू से मिली जानकारी अनुसार बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद एक संसदीय कमेटी के सदस्य होने के नाते वे […]
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अररिया : अररिया के सांसद मो तसलीमउद्दीन की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ. स्थिति सामान्य है. सोमवार को अपोलो अस्पताल चेन्नई से डिस्चार्ज कर दिया जायेगा. सांसद के करीबी शादिक हासमी उर्फ चिंपू से मिली जानकारी अनुसार बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद एक संसदीय कमेटी के सदस्य होने के नाते वे गोवा के दौरे पर गये थे. वहां से 25 अगस्त को चेन्नई पहुंचे. जहां शाम सात बजे के करीब उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी. उन्हें फौरन चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उन्हें आइसीयू में रखा गया.
बताया गया कि रविवार को उन्हें आइसीयू से बाहर किया गया. स्थिति सामान्य है. सोमवार को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया जायेगा. इधर गणेश अग्रवाल ने बताया कि सांसद से उनकी बात हुई है. स्थिति सामान्य है. उनके जल्द स्वस्थ को लेकर उनके आप्त सचिव पोलो झा, शमशाद आलम, मो एकराम, राजद नेता केएन विश्वास, राजू विश्वास सहित दर्जनों कार्यकर्ता ने सलामती की दुआ की. स्थिति में सुधार होने की खबर से समर्थकों में खुशी जाहिर की है.
बाढ़ का कारण जानने के लिए नदियों के रास्ते को समझना जरूरी
जिलावासी उस तबाही से उबरने की कोशिश में लग गये हैं. जो बीते सप्ताह हुई मूसलधार बारिश और बाढ़ के कारण उन्हें झेलनी पड़ी है. इस कारण जिले में 95 लोगों की मौत हो गयी. तीन दर्जन से अधिक मवेशी मारे गये. सैकड़ों एकड़ में लगी फसल बर्बाद हुई तो ना जाने कितने मकान और सड़कें पानी की तेज धार में बह गये. इस बार बाढ़ ने परमान नदी के किनारे बसे अररिया, फारबिसगंज और जोगबनी जैसे शहरी क्षेत्रों में जम कर तबाही मचायी है. इससे यहां के लोग बेहद आहत और आशंकित हैं.
अररिया : सीमांचल का यह इलाका हर साल बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित होता रहा है. मसलन सिकटी, जोकीहाट, पलासी व अररिया प्रखंड के कुछ इलाकों में बाढ़ का असर हर साल दिख जाता है.
बीते सप्ताह जिले में आयी भयानक बाढ़ ने कुछ नये इलाकों को अपना निशाना बनाया. यह वहीं इलाके हैं जहां जिले की अधिकांश शहरी आबादी बसी हुई है. हर साल बाढ़ की छोटी मोटी समस्या झेलने के कारण गांव के इससे निपटने में ज्यादा दक्ष होते हैं. इसके इतर शहरी क्षेत्रों में बसे लोगों का बाढ़ जैसी मुश्किलों से सामना कम होता है. इससे वह ज्यादा बेफ्रिक व लापरवाह बने रहते हैं. इसी का खामियाजा शहरी क्षेत्र के लोगों को इस बार झेलना पड़ा है.
परमान का पुराना रास्ता बाढ़ के लिए जिम्मेदार : इस बार अररिया व इसके आस-पास के इलाके में जो तबाही आयी है. इसके पीछे नदी का पुराना रास्ता ही जिम्मेदार रहा है.
इस बार बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित रहे फारबिसगंज प्रखंड के घोड़ाघाट, रमैय, खवासपुर, रहिकपुर ठेलामोहन, कामता बलियाडी, सहित अररिया शहरी इलाकों के साथ ग्रामीण क्षेत्र फरासुत, सुरजापुर, बेलवा, मझैली, चैनपुर जैसे गांव पूरी तरह परमान की गोद में बसे हैं. इससे यहां की आबादी को इस बार बाढ़ के कारण भयंकर विनाश झेलना पड़ा है. इसी रास्ते से होकर परमान अररिया-पूर्णिया सीमा स्थित शादीपुर गांव पहुंचती है. यहीं से अमौर और बायसी का इलाका परमान को बड़ा फैलाव देता है. पहले इन इलाकों से चाहे नदी गुजरती थी या फसल आबाद होते थे. इसलिए बाढ़ आने पर लोगों को महज फसल का नुकसान होता था. जानमाल की इतनी क्षति नहीं होती थी. जहां अब घने रिहायशी इलाके, गांव और बाजार बस गये हैं. इस कारण अब हम नदी पर ही सवाल उठाने लगे हैं.
शहर की बसावट को नदी के अनुसार समझना जरूरी : पूर्णिया गजेटियर के लेखक ओ मैली के मुताबिक इस क्षेत्र को पहले चांप और चौर का इलाका कहा जाता था. जुलाई से सितंबर तक विभिन्न प्रजाति के वन्य जीव और पक्षियों का यहां अड्डा होता था. ठंड के मौसम में बड़ी संख्या में साइबेरियन पंक्षी यहां आती थी. इस कारण अब हमें अपने शहर की बसावट को नदी के अनुसार समझना होगा. ताकि जमीन खरीद कर घर बनाने से पहले हम एक बार जरूर सोचें कि 100-150 साल पहले यहां से कौन सी नदी बहती थी. क्योंकि अगर किसी दिन नदी अपने पुराने रास्ता इख्तेयार कर ले तो फिर क्या होगा.
अररिया शहर से होकर बहती थी परमान
शहरी क्षेत्र में आये भयानक बाढ़ के कारणों को समझने के इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाली मुख्य नदी के रास्ते को समझना जरूरी है. अररिया, फारबिसगंज और जोगबनी शहर मुख्य रूप से परमान नदी के किनारे बसा है. परमान नदी नेपाल के हिमालयी क्षेत्र से निकलता है.
यहां से यह बूढ़ी नदी के नाम से भारत नेपाल सीमा पर स्थित जोगबनी के पश्चिम मीरगंज गांव में प्रवेश करती है. इस इलाके को बाढ़ ने इस बार बुरी तरह तबाह किया है. प्रसिद्ध अंग्रेज भूगोलशास्त्री व वैज्ञानिक फ्रांसिस बुकानन की किताब एन एकाउंट ऑफ द डिस्ट्रिक्ट पूर्णिया के मुताबिक परमान नदी को पंगरोयान और कहीं-कहीं बालकुंवर के नाम से भी जाना जाता है. मीरगंज में प्रवेश के साथ ही इसे परमान नदी के नाम से पुकारा जाता है. यहां से परमान ढ़ेर सारी धार और सहायक नदियों को अपने में समटने आरंभ कर देती है. रजई-सोता जैसी नदियां इसके संग हो जाती है. बुकानन के मुताबिक अररिया शहर आज जहां बसा है. पहले यह नदी यहीं से गुजरती थी. बाद में यह शहर से सटे पूरब-दक्षिण का रास्ता बना कर बहने लगी.
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