कृषि मंत्री मंत्री ने धान खरीदी नीति को बताया गलत, बोले- 'बिहार में किसानों की हालत दयनीय'

कृषि मंत्री मंत्री सुधाकर सिंह (Agriculture Minister Sudhakar Singh) बताया कि सूबे में किसानों की हालत काफी खराब है. हमारे यहां जो धान खरीदने की नीति बनायी गयी है, वह भी गलत है. यहां पर एक एजेंसी सहकारी समितियों से ही धान की खरीद की जाती है.
भभुआ: बिहार के कृषि मंत्री मंत्री सुधाकर सिंह ने एक ही एजेंसी से धान खरीदने की नीति को गलत बताया है. कृषि मंत्री ने कहा कि इस नीति के कारण किसानों को सरकार की तरफ से निर्धारित समर्थन मूल्य नहीं मिल पाता है. इसलिए हमलोग धान खरीद की नीति में ही बदलाव करेंगे. ताकि किसानों को सरकार की तरफ से घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल सके.
कृषि मंत्री मंत्री सुधाकर सिंह बताया कि सूबे में किसानों की हालत काफी खराब है. हमारे यहां जो धान खरीदने की नीति बनायी गयी है, वह भी गलत है. यहां पर एक एजेंसी सहकारी समितियों से ही धान की खरीद की जाती है. इससे किसानों को निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य से प्रति क्विंटल 200 से 300 रुपये कम राशि मिलती है. इस नीति में हमलोग बदलाव करेंगे और किसानों को अपना धान बेचने के लिए और कई एजेंसी दी जायेगी.
बता दें कि बिहार में महागठबंधन की सरकार बनते ही शपथ लेने के बाद पहली बार कैमूर पहुंचे बिहार सरकार के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने किसानों के लिए बड़ा ऐलान किया. कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार को सूखाग्रस्त घोषित किया जाएगा. इसके अलावे जिन किसानों को मौसम की मार झेलनी पड़ी, उन्हें एकमुश्त मुआवजा प्रदान किया जाएगा.
बिहार सरकार के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने कहा कि जिन किसनों ने पूंजी लगाकर खेती की और उनकी फसलें सिंचाई के अभाव में मर रही है. ऐसे सारे किसानों को बिहार सरकार मुआवजा देगी. कृषि मंत्री ने आगे कहा कि मैंने इतिहास के उस दौर में मंत्री पद का शपथ लिया, जब बिहार के किसान सूखे को लेकर परेशान हैं. सुधाकर सिंह ने आगे कहा कि पहले सैकड़ों साल में एक बार अकाल आता था. अब फिर से एक बार बिहार में लगभग वही दौर है, हमने अकाल के बीच कार्यभार संभाला है. सभी किसानों को राहत राशि दी जाएगी.
कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार के जिन किसानों ने खेती में पूंजी लागयी है. उन किसानों को कम से कम पूंजी वापस दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है. उन्होंने आगे कहा कि बिहार के किसानों के लिए यह संकट का समय है. इंसानों के साथ जीव-जंतु भी संकट की स्थिति में है.सरकार के समक्ष किसानों को राहत पहुंचाने के लिए यह चुनौती है. इस चुनौती को हम स्वीकार करते हैं.
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By Prabhat Khabar News Desk
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