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बिहार में 76% हिस्से में हो रही खेती, 6% क्षेत्र जंगल, जानें कितन प्रतिशत एरिया आज भी है बंजर

Updated at : 20 Aug 2023 11:59 PM (IST)
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बिहार में 76% हिस्से में हो रही खेती, 6% क्षेत्र जंगल, जानें कितन प्रतिशत एरिया आज भी है बंजर

वर्तमान में 72349 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में खेती हो रही है. वहीं, राज्य के 5713 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में जंगल है. राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 6 फीसदी हिस्से में जंगल है. जबकि, केवल 2734 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की जमीन ही बंजर या अनुपयोगी है.

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रिपोर्ट: मनोज कुमार

पटना. बिहार की धरा अभी सर्वाधिक उर्वरा है. बाढ़ और सुखाड़ की स्थिति नहीं हो और सिंचाई की व्यवस्था उपलब्ध हो जाये तो, बिहार कृषि में काफी बेहतर हो सकता है. क्योंकि, बिहार के कुल 94163 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के 76 फीसदी हिस्से में खेती होती है. वर्तमान में 72349 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में खेती हो रही है. वहीं, राज्य के 5713 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में जंगल है. राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 6 फीसदी हिस्से में जंगल है. जबकि, केवल 2734 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की जमीन ही बंजर या अनुपयोगी है.

चार जिलों में जंगल, दो में सर्वाधिक बंजर इलाका

राज्य के चार जिलों में जंगली क्षेत्र का दायरा सबसे अधिक है. पश्चिमी चंपारण, जमुई, लखीसराय और मुंगेर में फाॅरेस्ट लैंड सबसे अधिक है. जबकि, बंजर अथवा अनुपयोगी भूमि सबसे अधिक जमुई में है. ये चारों जिले बागवानी के क्षेत्र हैं. गया जिले में कई क्षेत्रों में बंजर और अनुपयोगी भूमि है. गया की अधिकांश अनुपयोगी भूमि पथरीली है.

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बाढ़ व सुखाड़ बिहार की हरियाली करते हैं प्रभावित

बाढ़ व सुखाड़ बिहार की हरियाली पर खासा प्रभाव डाल रहे हैं. बिहार के कुल 94163 वर्ग किलोमीटर में से 26073 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बाढ़ आती है. राज्य का लगभग 27.5 फीसदी इलाका बाढ़ से प्रभावित होता है. 525 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हर साल बाढ़ आती है. दरभंगा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण और खगड़िया में बाढ़ खासा प्रभाव डालती है. बाढ़ का 75 फीसदी इलाका उत्तरी बिहार में है. बाढ़ के कारण लगभग 2461 वर्ग किलोमीटर में 53 फीसदी धान की खेती बर्बाद हो जाती है. सुखाड़ के कारण भी धान समेत अन्य फसलों को काफी क्षति होती है.

बारिश पर आधारित है खेती, एग्रीकल्चर फीडर से आस

बिहार के अधिकांश जिलों में खेती बारिश पर आधारित है. अच्छी व समय पर बारिश नहीं हुई तो खेती बर्बाद हो जाती है. किसानों के खेत तक पानी पहुंचाने के लिए राज्य में एग्रीकल्चर फीडर लगायी जा रही है. अब तक इससे 2 लाख 60 हजार किसानों को कनेक्शन दिया जा चुका है. चतुर्थ कृषि रोड मैप में भी 4.80 लाख किसानों को मुफ्त में बिजली कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है. 12430 सर्किट किलोमीटर में 31078 ट्रांसफार्मर का वितरण होगा. 22717 सर्किट किलोमीटर एलटी लाइन का निर्माण होना है. मौजूदा 1354 फीडरों का सोलराइजेशन कराया जायेगा.

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बिहार की हरियाली को इस तरह प्रभावित कर रही है बाढ़

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ के कारण काफी क्षति होती है. 525 स्कवायर किलोमीटर में बाढ़ की गति अति तीव्र, 804 में तीव्र, 2461 में मध्यम तीव्र, 5738 में निम्न तीव्र तथा 16544 स्कवायर किलोमीटर क्षेत्र में अति निम्न तीव्रता की बाढ़ आती है. अति तीव्र वाले एरिया में हर साल बाढ़ आती है. इसमें अति तीव्र और तीव्र गति वाले एरिया में बाढ़ की गहराई 1.50 मीटर से अधिक होती है. इस कारण इन क्षेत्रों में धान की खेती की संभावना न के बराबर है. हालांकि निम्न तीव्र के 5738 तथा अति निम्न के 16544 स्कवायर किलोमीटर वाले बाढ़ क्षेत्र में चिंताजनक स्थिति नहीं होती है. इन दोनों एरिया में धान की खेती को नुकसान नहीं होता है. तीव्र और अति तीव्र वाले बाढ़ प्रभावित एरिया में बागवानी फसल लगायी जा सकती है.

2461 स्कवायर किमी में 53 फीसदी तक बर्बाद हो जाता है धान

राज्य में 2461 स्कवायर किलोमीटर क्षेत्र मध्यम गति के बाढ़ जोन में है. इस इलाके में 14 से 53 फीसदी धान की खेती को नुकसान होता है. निम्न तीव्र के 5738 तथा अति निम्न के 16544 स्कवायर किलोमीटर वाले बाढ़ क्षेत्र में चिंताजनक स्थिति नहीं होती है. इन दोनों एरिया में धान की खेती को नुकसान नहीं होता है. तीव्र और अति तीव्र वाले बाढ़ प्रभावित एरिया में बागवानी फसल लगाने की योजना बनायी जा सकती है. मध्यम तीव्र वाले बाढ़ प्रभावित एरिया में मछली पालन भी किया जा सकता है.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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