बिहार में वर्षों से बंद पड़े 18 एयरपोर्ट होंगे चालू, भागलपुर, मधुबनी व सारण जैसे जिलों से भी उड़ेंगे विमान

उड्डयन के मानचित्र पर बिहार एक बार फिर से उभरने की तैयारी कर रहा है. एक तरफ राज्य सरकार वर्षों बाद 20 सीटर विमान खरीदने जा रही है तो दूसरी तरफ सरकार ने बिहार में बदहाल पड़े 18 रनवे को फिर से सेवा योग्य बनाने की पहल शुरू कर दी है. इस साल पेश होने वाले बजट में इसके लिए राशि की व्यवस्था की जा सकती है.
पटना. उड्डयन के मानचित्र पर बिहार एक बार फिर से उभरने की तैयारी कर रहा है. एक तरफ राज्य सरकार वर्षों बाद 20 सीटर विमान खरीदने जा रही है तो दूसरी तरफ सरकार ने बिहार में बदहाल पड़े 18 रनवे को फिर से सेवा योग्य बनाने की पहल शुरू कर दी है. इस साल पेश होने वाले बजट में इसके लिए राशि की व्यवस्था की जा सकती है. बताया जा रहा है कि सरकार 18 पुराने एयरपोर्ट की मरम्मत के साथ ही दो नये हेलीपैड का निर्माण भी इस वित्तीय वर्ष में करने जा रही है. हेलीपैड बनाने के साथ-साथ सरकार की ओर से हवाई अड्डा की सुरक्षा व्यवस्था भी बेहतर करने की योजना है.
बिहार के साथ सबसे खास बात है कि बंद पड़े 18 एयरपोर्ट राज्य के विभिन्न क्षेत्र में अवस्थित हैं. ऐसे में इन एयरपोर्ट के सुचारू होने पर कई जिलों में हवाई सेवा उपलब्ध हो पायेगी. ये सभी 18 एयरपोर्ट बिहार सरकार के अधीन हैं, लेकिन उसकी स्थिति ठीक नहीं है. अतिक्रमण से लेकर सुरक्षा कारणों से भी उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है. कई एयरपोर्ट की हालत ऐसी हो चुकी है कि वहां रनवे तक अब नहीं बचा है, ऐसे में अब सरकार वहां हेलीपैड बनाकर उसके इस्तेमाल की तैयारी कर रही है. इस संबंध में भवन निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख राकेश कुमार ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए कहा कि 20 भवन प्रमंडल के कार्यपालक अभियंताओं को हवाई अड्डों के विकास कार्य के लिए एस्टीमेट बनाने का निर्देश दिया गया है. उन्हें जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है.
बिहार में तीन एयरपोर्ट आम लोगों के लिए हवाई सेवा उपलब्ध है, जबकि करीब डेढ़ दर्जन रनवे वर्षों से बंद पड़े हुए हैं. बंद पड़े रनवे में से एक दो को छोड़ दें तो सभी आजादी के पहले बनाये गये थे. आज की तारीख में केवल पटना, गया और दरभंगा से विमान सेवा उपलब्ध है. वहीं बिहटा और पूर्णिया एयरपोर्टों का उपयोग सेना कभी कभार करती है. शेष एयरपोर्ट या तो जानवरों का चारागाह बने हुए हैं या फिर गाड़ी सीखने का मैदान बना दिये गये हैं. राज्य सरकार ने जिन हवाई अड्डों को सूरत बदलने के लिए भवन निर्माण विभाग को जिम्मेवारी दी है, उसमें भागलपुर, सुपौल, बेगूसराय, मुंगेर, पूर्णिया, सहरसा, नालंदा, आरा, बक्सर, मोतिहारी, कटिहार, मधुबनी, किशनगंज, रोहतास, सारण और बाल्मीकि नगर शामिल है. भवन निर्माण विभाग के अभियंताओं को एस्टीमेट बनाने का निर्देश दिया गया है.
वर्षों से बंद पड़े एयरपोर्ट की जमीन पर हेलीपैड बनने से न केवल आपदा के समय बल्कि वीआईपी मूवमेंट, पर्यटन और अन्य कार्यों में भी इनका बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा. हेलीपैड तैयार हो जाने से रात्रि में भी हेलीकॉप्टर के उतरने की सुविधा प्राप्त हो सकेगी. फिलहाल एजेंसी के माध्यम से इसका निर्माण कराया जाएगा. बिहार में पटना एयरपोर्ट का विस्तार भी हो रहा है तो वहीं बिहटा और दरभंगा में नये एयरपोर्ट का निर्माण होना है. इसमें भी जमीन का मामला फंसा हुआ है. साथ ही पूर्णिया एयरपोर्ट का भी निर्माण का मामला लटका हुआ है.
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