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अनाज के उठाव पर पासवान और बिहार सरकार के बीच बढ़ा टकराव

Updated at : 21 Jul 2014 3:00 AM (IST)
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अनाज के उठाव पर पासवान और बिहार सरकार के बीच बढ़ा टकराव

पटना: केंद्रीय खाद्य आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि राज्य सरकार कार्ययोजना के तहत हर हाल में अनाज का उठाव 31 अगस्त तक कर ले. राज्य को मार्च-जुलाई के अनाज उठाव के लिए 31 अगस्त तक का अवधि विस्तार दिया गया है. इसके बाद अनाज के उठाव के लिए केंद्र जिम्मेवार नहीं होगा. रविवार […]

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पटना: केंद्रीय खाद्य आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि राज्य सरकार कार्ययोजना के तहत हर हाल में अनाज का उठाव 31 अगस्त तक कर ले. राज्य को मार्च-जुलाई के अनाज उठाव के लिए 31 अगस्त तक का अवधि विस्तार दिया गया है. इसके बाद अनाज के उठाव के लिए केंद्र जिम्मेवार नहीं होगा.

रविवार को होटल मोर्या में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने राज्य सरकार पर अनाज उठाव में विफल रहने का आरोप लगाया और कहा कि इस बिहार को यह पहला व अंतिम अवधि विस्तार दिया गया है. अगर बार-बार समय का विस्तार दिया जायेगा, तो इसको लेकर सीएजी भी आपत्ति कर सकता है.

राज्य सरकार को रोज 30 हजार मीटरिक टन अनाज का उठाव करना है. इसके लिए 11 जुलाई के बाद अनाज का48 रैक बिहार के लिए आया. राज्य को 26 रैक उठाव करना था, पर सिर्फ 6.4 रैक अनाज का ही उठाव किया गया है.राज्य् ा सरकार लक्ष्य का एक चौथाई अनाज भी उठाव नहीं कर रही है. मार्च से मई तक राज्य ने आवंटित अनाज के बड़ा हिस्सा का उठाव नहीं किया. चुनाव का बहाना बनाया गया. इसके बावजूद बिहार के लिए मैंने विशेष प्रावधान कर अनाज उठाव के लिए 31 अगस्त तक की अवधि का विस्तार कराया.अब तो रेलवे में रैक आ जाता है और अनाज उठानेवाला कोई नहीं रहता है.

भंडारण की समस्या : उन्होंने कहा कि एफसीआइ के पास भी भंडारण की समस्या है. ऐसे में रेलवे में रैक आने के बाद उठाव नहीं होने पर हर्जाना भरना पड़ता है. राज्य सरकार को उठाव के लिए कम-से-कम दो से ढाई सौ बड़े ट्रक चाहिए, लेकिन राज्य सरकार सिर्फ 15-20 छोटी वाहन से उठाव कर रही है. राज्य सरकार पर बहानेबाजी का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार पीडीएस दुकानों तक अनाज पहुंचाये, इससे होनेवाले खर्च का वहन केंद्र सरकार करेगी.

बिना तैयारी के ही कानून लागू : केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार पर बिना तैयारी के ही खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने का आरोप लगाया. राज्य में न ही लाभार्थियों की पूरी सूची तैयार हुई और न ही यहां लोगों को राशन कार्ड उपलब्ध कराया जा सका है. छत्तीसगढ़ में अनाज का उठाव सबसे बेहतर तरीके से हो रहा है. वहां किसी भी दुकान से कोई अनाज खरीद सकता है. यहां तो कोई तैयारी ही नहीं है. देश के 11 राज्यों में पीडीएस मामले में बिहार सबसे पीछे है.

जमाखोरी की वजह से महंगाई : पासवान ने कहा कि अनाज, फल और सब्जी के उत्पादन में वृद्धि हुई है. अनाज की कमी के कारण महंगाई नहीं है. जमाखोरी की वजह से महंगाई बताते हुए पासवान ने कहा कि 2012-13 में प्याज का उत्पादन 168 लाख मीटरिक टन हुआ था. इसकी उपज 2013-14 में 193 मीटरिक टन हुआ. इसके बावजूद महंगाई बढ़ी. उन्होंने कहा कि जमाखोरों पर कार्रवाई के लिए नियम में संशोधन हो रहा है. इसके लिए सजा की अवधि छह माह से बढ़ा कर एक साल की जायेगी. साथ ही जमानतीय धारा को गैर जमानतीय करने का प्रावधान है.

मौके पर एफसीआइ के अधिकारी सुभाष जादू, एफसीआइ के पूर्वी जोन के कार्यकारी निदेशक सीमा कक्कड़ और एफसीआइ बिहार के प्रभारी महाप्रबंधक अमरेश कुमार भी मौजूद थे.

आमने-सामने

केंद्र सरकार

1 संयुक्त कार्ययोजना के अनुसार बिहार को रोज 30 हजार मीटरिक टन अनाज का उठाव करना है, पर मात्र 12.50 हजार मीटरिक टन का उठाव हो रहा है.

2 रेलवे में रैक आने के बाद अनाज का उठाव नहीं होने पर एफसीआइ को हर्जाना भरना पड़ता है. उठाव के लिए राज्य सरकार को ढाई सौ बड़े ट्रक चाहिए, लेकिन वह सिर्फ 15-20 छोटी वाहनों से उठाव कर रही है.

राज्य सरकार

1 संयुक्त कार्ययोजना के अनुसार रोज 12 हजार मीटरिक टन उठाव का लक्ष्य दिया गया था. लगभग 14 हजार मीटरिक टन अनाज का उठाव किया जा रहा है.

2 एफसीआइ के पास पर्याप्त गोदाम नहीं है. सात जिलों में मजदूरों की समस्या के कारण अनाज उठाव बाधित हुआ है. कई जगहों पर तो एफसीआइ के मजदूरों ने उठाव करनेवाले कर्मियों के साथ अशोभनीय व्यवहार भी किया है.

बिहार से पाकिस्तान की तरह व्यवहार कर रहे पासवान : रजक

पटना: बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्याम रजक ने उन्होंने कहा कि एफसीआइ और राज्य खाद्य निगम की संयुक्त कार्ययोजना के तहत अनाज का उठाव किया जा रहा है. केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान भारत और पाकिस्तान की तरह व्यवहार कर रह हैं. श्री रजक ने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने अनाज के उठाव की बिना समीक्षा किये ही राज्य सरकार पर आरोप लगा दिया. उन्होंने कहा कि कार्ययोजना के तहत प्रतिदिन 12 हजार मीटरिक टन अनाज के उठाव का लक्ष्य दिया गया था. राज्य खाद्य निगम इस लक्ष्य को पूरा किया. अब लगभग 14 हजार मीटरिक टन अनाज का उठाव किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अवधि विस्तार के बाद 77 हजार 125 मीटरिक टन अनाज का उठाव किया जा चुका है, जो 31 रैक के बराबर है. उन्होंने कहा कि इसकी समीक्षा मेरे स्तर पर प्रतिदिन की जा रही है. उन्होंने कहा कि एफ सीआइ द्वारा समय पर आवंटन और रैक सही समय पर नहीं आने के कारण खाद्यान्न उपलब्ध नहीं कराया गया. उन्होंने कहा कि अवधि विस्तार के बाद युद्ध स्तर पर अनाज का उठाव किया जा रहा है.

जमुई, गया, बेगूसराय, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल और सहरसा में मजदूरों की समस्या होने के कारण अनाज उठाव बाधित हुआ है. इतना ही नहीं, कई जगहों पर तो उनके मजदूरों ने उठाव करनेवाले कर्मियों के साथ अशोभनीय व्यवहार भी किया है. उन्होंने कहा कि एफसीआइ के पास भंडारण क्षमता नहीं है. उसे 23 लाख मीटरिक टन का भंडारण करने की क्षमता चाहिए और उनके पास मात्र पांच लाख मीटरिक टन क्षमता का गोदाम है. उन्होंने बिना तैयारी के राज्य में खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने के पासवान के आरोप पर कहा कि राज्य में पूरी तैयारी के साथ इस कानून को लागू किया गया है. सारी व्यवस्था कंप्यूटरीकृत है. लाभार्थियों की सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया जारी है.

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