विपक्ष के वाकआउट के बीच 28 अरब की अनुदान मांगें पारित

Published at :03 Jul 2014 9:36 AM (IST)
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विपक्ष के वाकआउट के बीच 28 अरब की अनुदान मांगें पारित

पटना: कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने केंद्र सरकार से कृषि उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य की जगह लाभकारी मूल्य तय करने की मांग की है. केंद्र सरकार से उन्होंने कृषि यंत्रों पर सब्सिडी घटाने का आदेश वापस लेने की भी मांग की. बुधवार को उन्होंने विधान सभा में कृषि विभाग की अनुदान मांगों पर सरकार […]

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पटना: कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने केंद्र सरकार से कृषि उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य की जगह लाभकारी मूल्य तय करने की मांग की है. केंद्र सरकार से उन्होंने कृषि यंत्रों पर सब्सिडी घटाने का आदेश वापस लेने की भी मांग की.

बुधवार को उन्होंने विधान सभा में कृषि विभाग की अनुदान मांगों पर सरकार का पक्ष रखने के दौरान इस मामले को उठाया. कृषि विभाग की अनुदान मांगों पर चली बहस के दौरान मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष सदन से वाक आउट किया. विपक्ष की गैरहाजिरी में सदन ने कृषि विभाग की 28 अरब, 26 करोड़, 80 लाख और 20 हजार रुपये की अनुदान मांगें पारित कर दीं.

कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में कृषि क्षेत्र के विकास के लिए जो कदम उठाये गये हैं, वह देश के लिए अनुकरणीय है. राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी तक ने कृषि रोड मैप के उद्घाटन के वक्त इसे स्वीकार किया था. बिहार में कृषि बजट भी लगातार बढ़ रहा है. सूबे में 2005-06 में कृषि का बजट महज 20 करोड़ का था, आज इस विभाग का बजट 2826 करोड़ का हो गया है. सरकार ने कृषि को उन्नत बनाने के लिए कृषि कैबिनेट बनाया. गुणवत्तापूर्ण बीज के लिए मृतप्राय हो चुके बीज निगम को जीवित किया. सूबे में मुख्यमंत्री बीज विकास योजना चलायी जा रही है. उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष किया और कहा कि शंकर बीज पर देश में तो शोध नहीं हो सका, किंतु अब केंद्र में नयी सरकार बनी है, तो वह शोध करा ले.

हरित क्रांति के लिए 7000 करोड़ दे केंद्र : नरेंद्र सिंह ने कहा कि कृषि विकास के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों का असर भी हुआ. सर्वाधिक धान उत्पादन के लिए वर्ष 2011 और सर्वाधिक गेहूं उत्पादन के लिए 2012 में बिहार को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है. कृषि छात्रों को दो हजार रुपया दिये जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कृषि विभाग सूबे के कृषि यंत्रों का निर्माण करनेवाली कंपनियों को प्राथमिकता दे रही है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पास कृषि विभाग का करोड़ों का बकाया नहीं मिला है. हरित क्रांति के लिए एक हजार करोड़ नहीं, कम-से-कम सात हजार करोड़ देने की मांग उन्होंने केंद्र सरकार से की.

कटौती प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज: अनुदान मांगों पर कटौती प्रस्ताव भाजपा के विक्रम कुंवर ने पेश किया था, जिसे सदन ने ध्वनिमत से खारिज कर दिया. कृषि विभाग की अनुदान मांगों पर भाजपा विधायक रामाधार सिंह ने पूछा कि किसान बीमा योजना का क्या हुआ? बोरिंगों को चालू क्यों नहीं किया गया? अनाज भंडारण की व्यवस्था क्यों नहीं की गयी? बहस में विजय कुमार सिंह, मो. जावेद, डॉ अच्युतानंद, भाई दिनेश, अरुण शंकर प्रसाद, कृष्ण कुमार, उषा विद्यार्थी, ज्योति देवी देवी, नीता चौधरी और मंजू वर्मा ने भी भाग लिया.

जीतन राम मांझी अगली बार भी सीएम हो सकते हैं : नरेंद्र सिंह
2015 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने एक बार फिर सत्ताधारी दल जदयू पर निशाना साधा. विधानसभा में बुधवार को कृषि विभाग की मांग पर जवाब दे रहे कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह को अगले मुख्यमंत्री के सवाल पर घेरने की कोशिश की. नरेंद्र सिंह ने कहा कि चुनाव में बहुमत मिला, तो कोई भी मुख्यमंत्री बन सकता है. जीतन राम मांझी भी मुख्यमंत्री बन सकते हैं. विपक्ष के नेता नंदकिशोर यादव ने कहा, स्थायी घोषणा करिये. नरेंद्र सिंह ने कहा, अगले चुनाव होने तक इनका कोई बाल बांका नहीं कर सकता, यह घोषणा करता हूं. बहस के दौरान प्रतिपक्ष के नेता नंद किशोर यादव की टोका-टोकी के बीच कृषि मंत्री ने कहा कि नीतीश कुमार ने अपने मुख्यमंत्री काल में ऊंची उड़ान भरी थी. जीतन राम मांझी उनसे भी ऊंची उड़ान भर सकते हैं, इसमें क्या कोई संदेह है? इस दौरान प्रतिपक्ष के नेता नंद किशोर यादव के साथ कृषि मंत्री की नोक-झोंक हुई. नरेंद्र सिंह ने कहा कि राजनीति में कोई किसी का दोस्त-दुश्मन नहीं होता. हम किसी से दुश्मनी नहीं चाहते. हम तो मिल कर बिहार का विकास करना चाहते हैं.

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