नॉर्थ बिहार में लगाये जायेंगे नब्बे हजार नये ट्रांसफॉर्मर

पटना: बिजली वितरण प्रणाली का विस्तार और मजबूत करने के लिए 2017 तक नॉर्थ बिहार में 90 हजार नये ट्रांसफॉर्मर लगाये जायेंगे. इसके लिए नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लि. (एनबीपीडीसीएल) ने नये पावर सब स्टेशनों के निर्माण, नये ट्रांसफॉर्मर और पुराने ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ाने के प्रोजेक्टों की रफ्तार तेज करने की प्रक्रिया शुरू […]
पटना: बिजली वितरण प्रणाली का विस्तार और मजबूत करने के लिए 2017 तक नॉर्थ बिहार में 90 हजार नये ट्रांसफॉर्मर लगाये जायेंगे. इसके लिए नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लि. (एनबीपीडीसीएल) ने नये पावर सब स्टेशनों के निर्माण, नये ट्रांसफॉर्मर और पुराने ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ाने के प्रोजेक्टों की रफ्तार तेज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इन प्रोजेक्टों के लिए सबडिविजन से लेकर मुख्यालय स्तर पर इंजीनियरों की नयी इकाई बनायी जा रही है.
यह प्रोजेक्टों के कार्यान्वयन और निगरानी का काम देखेगी. यही व्यवस्था साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लि. में भी हो रही है. नयी व्यवस्था से नॉर्थ बिहार में चल रही करीब आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं के काम में तेजी आयेगी. इनके तहत नॉर्थ बिहार में 149 पावर सब स्टेशन बनने हैं. 429 ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ायी जानी है. करीब 90,000 नये ट्रांसफॉर्मर लगाये जाने हैं.
इन योजनाओं का बड़ा हिस्सा 2015 तक पूरा किया जाना है. पूरा काम 2017 तक हो जाना है. एनबीपीडीसीएल में हेडक्वार्टर स्तर पर राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना और स्पेशल प्लान को प्रोजेक्ट सेल के तहत लाया जायेगा. हेडक्वार्टर में दो मुख्य अभियंता (प्रोजेक्ट), चार विद्युत अधीक्षण अभियंता (प्रोजेक्ट), आठ विद्युत कार्यपालक अभियंता (प्रोजेक्ट) और 16 सहायक विद्युत अभियंता (प्रोजेक्ट) की तैनाती इसके लिए होगी. हर सहायक विद्युत अभियंता (प्रोजेक्ट) एक या दो बिजली आपूर्ति प्रमंडलों की योजनाओं का काम देखेंगे. सभी प्रोजेक्टों के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए हर जिले में अलग से विद्युत कार्यपालक अभियंता (प्रोजेक्ट) की तैनाती होने जा रही है. ये आरजीजीवीवाइ, स्पेशल प्लान, आरएपीडीआरपी पार्ट-ए, बी, स्टेट प्लान और एडीबी के प्रोजेक्टों के कार्यान्वयन और निगरानी का काम देखेंगे और हेडक्वार्टर को रिपोर्ट करेंगे. इसी तरह सब डिवीजन स्तर पर प्रोजेक्टों के लिए अलग सहायक विद्युत अभियंता तैनात होंगे. उनके साथ कनीय विद्युत अभियंता भी होंगे. जिलों में प्रोजेक्टों के लिए जिन सहायक और कनीय अभियंताओं की तैनाती पहले हुई है, उन्हें नयी व्यवस्था से जोड़ा जायेगा.
सांसदों व विधायकों की अनुशंसा पर बदले जायेंगे 8000 ट्रांसफॉर्मर
पटना. सांसदों और विधायकों की अनुशंसा पर राज्य में आठ हजार से अधिक ट्रांसफॉर्मर बदले जायेंगे. इसके तहत उत्तर बिहार में 6,022 और दक्षिण बिहार में 2,054 ट्रांसफॉर्मर बदलने का काम शुरू हो गया है. इनकी लागत का वहन मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना, सांसद निधि और राज्य योजना के तहत होगा. इसके तहत 10,16, 25 और 40 किलोवाट (केवीए) के जले या क्षतिग्रस्त ट्रांसफॉर्मरों को 63 व सौ केवीए क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मरों में बदला जाना है. इस योजना पर उत्तर बिहार में आवश्यक 56 करोड़ में से 36 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना और सांसद निधि से, जबकि शेष 20 करोड़ रुपये राज्य सरकार द्वारा योजना मद से उपलब्ध करायी जायेगी. इसी प्रकार दक्षिण बिहार में 33 करोड़ रुपये का खर्च होगा. इसके तहत 20 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना और सांसद निधि से, जबकि शेष 13 करोड़ रुपये राज्य सरकार द्वारा योजना मद से उपलब्ध करायी जायेगी. पिछले वित्तीय वर्ष 2013-14 में नॉर्थ बिहार पावर कंपनी को सात करोड़ और साउथ बिहार पावर कंपनी को पांच करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है. ट्रांसफॉर्मरों को सौ केवीए में बदलने में दो लाख पांच हजार रुपये का खर्च अनुमानित है. इसमें सांसद निधि व मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना से डेढ़ लाख और शेष 55 हजार रुपये राज्य सरकार द्वारा वहन किया जायेगा.
बाढ़ में 660 मेगावाट बिजली उत्पादन एक से
पटना: बाढ़ स्थित एनटीपीसी की फेज-2 यूनिट में एक जुलाई से 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू कर दिया जायेगा. इसमें से बिहार को 330 मेगावाट बिजली मिलेगी. बुधवार को मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से मुलाकात के दौरान एनटीपीसी अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक डॉ अरूप राय चौधरी ने उन्हें यह जानकारी दी. चौधरी के साथ भेल के अध्यक्ष सह एमडी बीपी राव भी ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की.
दोनों ने मुख्यमंत्री को बिहार में एनटीपीसी के बिजलीघरों में उत्पादन के लिए किये जा रहे कार्यो की जानकारी दी. चौधरी ने मुख्यमंत्री को बताया कि कांटी थर्मल पावर में 110 मेगावाट की दूसरी इकाई को 31 अगस्त तक चालू करने का लक्ष्य था.
लेकिन, राज्य सरकार के अनुरोध पर इसके रिनोवेशन और मॉर्डनाइजेशन का काम 31 जुलाई तक पूरा कर इसे एक अगस्त से ही चालू कर दिया जायेगा. 110 मेगावाट की दो इकाइयों में से एक को रिनोवेशन और मॉर्डनाइजेशन के बाद पहले ही चालू किया जा चुका है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए बिजली उत्पादन के लक्ष्य को हर कीमत पर पूरा किया जाये. एनटीपीसी राज्य में अपनी अन्य परियोजनाओं को भी तेजी से पूरा करे. राज्य के सभी टोलों और बसावटों तक बिजली पहुंचाने का काम चल रहा है. इसके लिए अधिक-से- अधिक बिजली की जरूरत होगी.
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह, ऊर्जा सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चंद्रा, एनटीपीसी के डायरेक्टर ऑपरेशन एनएन मिश्र, डायरेक्टर टेक्निकल एनटीपीसी एके झा, डायरेक्टर प्रोजेक्ट एनटीपीसी एससी पांडेय, रिजनल एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर एनटीपीसी एस राय और अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे.
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