बिहार में 10वीं पास महिलाएं 6 प्रतिशत बढ़ीं, तो प्रजनन दर 0.4 प्रतिशत हुई कम

Updated at : 14 Jul 2021 6:31 AM (IST)
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बिहार में 10वीं पास महिलाएं 6 प्रतिशत बढ़ीं, तो प्रजनन दर 0.4 प्रतिशत हुई कम

जनसंख्या नियंत्रण के लिए महिला शिक्षा अहम साबित हो रही है. बिहार में महिलाएं जितनी शिक्षित हो रही हैं, उसी अनुपात में प्रजनन दर में गिरावट भी दर्ज की जा रही है. राज्य में पिछले चार वर्षों में 10वीं पास महिलाओं की संख्या में छह फीसदी की वृद्धि हुई है, वहीं प्रजनन दर में 0.4 फीसदी की कमी आयी है.

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पटना. जनसंख्या नियंत्रण के लिए महिला शिक्षा अहम साबित हो रही है. बिहार में महिलाएं जितनी शिक्षित हो रही हैं, उसी अनुपात में प्रजनन दर में गिरावट भी दर्ज की जा रही है. राज्य में पिछले चार वर्षों में 10वीं पास महिलाओं की संख्या में छह फीसदी की वृद्धि हुई है, वहीं प्रजनन दर में 0.4 फीसदी की कमी आयी है.

इसके मद्देनजर राज्य सरकार ने महिलाओं को शिक्षित करने के लिए सभी पंचायत में हाइस्कूलों की स्थापना की है. अब हर पंचायत में 12वीं तक की पढ़ाई शुरू करने का लक्ष्य है, ताकि प्रजनन दर को दो फीसदी से नीचे लाया जा सके. अभी राज्य में प्रजनन दर तीन फीसदी है. केरल जैसे अन्य राज्यों में भी जहां महिला शिक्षा का स्तर ऊंचा है, वहां प्रजनन दर दो फीसदी के नीचे आ चुकी है.

शिशु मृत्यु दर में तीन प्वाइंट की हुई कमी

बिहार की नवजात मृत्यु दर में भी तीन अंकों की कमी आयी है. अब यह देश की नवजात मृत्यु दर (23) के करीब पहुंच गयी है. बिहार की नवजात मृत्यु दर वर्ष 2017 में 28 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 25 हो गयी. बिहार की नवजात मृत्यु दर सात वर्षों से 27-28 के बीच लगभग स्थिर थी. वर्ष 2018 में तीन अंकों की कमी को स्वास्थ्य की दिशा में बड़ी कामयाबी माना जा रही है.

पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में भी मृत्यु दर में कमी

राज्य में पांच वर्ष से पूर्व के बच्चों की मृत्यु दर में भी चार अंकों की कमी हुई है. वर्ष 2017 में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 41 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 37 हो गयी.

मातृ मृत्यु दर में कमी

एसआरएस के अनुसार वर्ष 2014 में बिहार की मातृ मृत्यु दर 165 थी, जो 2018 में घटकर 149 हो गयी. इस तरह 16 प्वाइंट की कमी आयी है. वर्ष 2017 की तुलना में वर्ष 2018 में राज्य की प्रसवकालीन मृत्यु दर में भी दो अंकों की कमी हुई . वर्ष 2017 में प्रसवकालीन मृत्यु दर 24 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 22 हो गयी. शिशु मृत्यु दर में लिंग भेद में भी पिछले वर्षों की तुलना में कमी आयी है. वर्ष 2016 में जेंडर का अंतर 15 था, जो वर्ष 2018 में घटकर पांच हो गया है.

चार सालों में बिहार में प्रजनन दर घटकर हुई तीन फीसदी

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़ों के अनुसार बिहार में वर्ष 2015-16 में स्कूलों में 10 साल या उससे अधिक समय तक पढ़ाई करनेवाली 15 से 49 साल तक उम्र की महिलाओं की संख्या 22.8% थी, जो 2019-20 में बढ़कर 28.8% हो गयी. वहीं, वर्ष 2015-16 में राज्य की प्रजनन दर ( एक महिला की औसतन संतान) 3.4% थी, जो अब घटकर सिर्फ तीन फीसदी रह गयी है. 15-49 वर्ष तक की महिलाओं के बीच साक्षरता दर 57.8% है.

परिवार नियोजन के साधन का इस्तेमाल करने वाले अब दोगुने

वर्ष 2014-15 में बिहार में 24.1% लोग परिवार नियोजन के किसी साधन का इस्तेमाल करते थे. वर्ष 2019-20 में यह संख्या बढ़कर 55.8% हो गयी है. परिवार नियोजन में महिलाओं ने की बढ़-चढ़कर भागीदारी सुनिश्चित की है.

Posted by Ashish Jha

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