दाएं हाथ से खेलते थे, पिता ने बनाया लेफ्टी बल्लेबाज... घर की छत से टीम इंडिया तक कैसे पहुंचे सारांश जैन?

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सरांश जैन (फोटो- सोशल मीडिया)

सरांश जैन (फोटो- सोशल मीडिया)

इंदौर की एक छत से शुरू हुआ सारांश जैन का क्रिकेट सफर आज उन्हें भारतीय टेस्ट टीम तक ले आया है. पिता सुबोध जैन की कोचिंग और कड़ी मेहनत ने इस युवा ऑलराउंडर को टीम इंडिया की सफेद जर्सी तक पहुँचाया है.

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भारतीय क्रिकेट टीम तक पहुंचने का सारांश जैन का सफर किसी महंगी क्रिकेट अकादमी से नहीं, बल्कि इंदौर स्थित उनके घर की छत से शुरू हुआ था. पिता सुबोध जैन की कोचिंग और वर्षों की कड़ी मेहनत के दम पर मध्य प्रदेश के इस ऑलराउंडर ने अब भारतीय टेस्ट टीम में जगह बना ली है. अगले महीने श्रीलंका दौरे पर वह पहली बार टीम इंडिया की सफेद जर्सी में नजर आ सकते हैं.

घर की छत पर होती थी ट्रेनिंग

सारांश के पिता और मध्य प्रदेश के पूर्व रणजी क्रिकेटर सुबोध जैन खाली समय में घर की छत पर नेट लगाकर बेटे को घंटों अभ्यास कराते थे. सारांश की मां संगीता जैन ने बताया कि कई बार अभ्यास के दौरान उनके हाथ में चोट लग जाती थी, लेकिन वह पट्टी बांधकर फिर मैदान में उतर जाते थे.

टूटते थे पड़ोसियों के शीशे

संगीता जैन ने बताया कि सारांश के शॉट्स की वजह से कई बार पड़ोसियों की खिड़कियों के शीशे टूट जाते थे. उस समय सुबोध जैन उनसे कहते थे कि वह नया शीशा लगवा देंगे, लेकिन एक दिन यही पड़ोसी इस बच्चे पर गर्व करेंगे. आज वह बात सच साबित हो गई है.

पिता ने बदली बल्लेबाजी की शैली

सारांश आज दाएं हाथ से ऑफ स्पिन गेंदबाजी और बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं. उनके बड़े भाई सौरभ जैन के मुताबिक, बचपन में सारांश भी उनकी तरह दाएं हाथ से बल्लेबाजी करते थे. लेकिन पिता ने उनकी प्रतिभा पहचानकर उन्हें बाएं हाथ से बल्लेबाजी करने की सलाह दी, जो आगे चलकर उनके करियर का अहम मोड़ साबित हुई.

घरेलू क्रिकेट से मिली पहचान

सुबोध जैन का कहना है कि आजकल कई खिलाड़ियों को आईपीएल में प्रदर्शन के आधार पर टीम इंडिया में जगह मिलती है, लेकिन सारांश ने मुख्य रूप से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करके भारतीय टेस्ट टीम का टिकट हासिल किया है.

सारांश ने रणजी ट्रॉफी में मध्य प्रदेश को चैंपियन बनाने में बल्ले और गेंद दोनों से अहम योगदान दिया. दलीप ट्रॉफी के दो मैचों में उन्होंने 16 विकेट लिए और ईरानी कप में भी शानदार प्रदर्शन किया. लगातार बेहतरीन प्रदर्शन का इनाम उन्हें अब भारतीय टेस्ट टीम में चयन के रूप में मिला है.

अब सफेद जर्सी पहनने का इंतजार

सारांश का परिवार अब उस ऐतिहासिक पल का इंतजार कर रहा है, जब वह पहली बार भारतीय टेस्ट टीम की सफेद जर्सी पहनकर मैदान पर उतरेंगे. परिवार को भरोसा है कि जिस बेटे ने घर की छत से अपने सपनों की शुरुआत की थी, वह अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी अपनी अलग पहचान बनाएगा.

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उज्जवल सिन्हा

लेखक के बारे में

By उज्जवल सिन्हा

उज्जवल कुमार सिन्हा | स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट

उज्जवल कुमार सिन्हा एक अनुभवी स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट हैं और पिछले छह वर्षों से खेल पत्रकारिता एवं डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. वर्तमान में वह प्रभात खबर के स्पोर्ट्स सेक्शन में लीड की भूमिका निभा रहे हैं, जहां कंटेंट प्लानिंग, SEO-आधारित डिजिटल कंटेंट, एक्सप्लेनर, डेटा-ड्रिवन स्टोरी, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट, लाइव कवरेज और प्रमुख राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की डिजिटल रणनीति से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालते हैं.

पत्रकारिता का अनुभव

अपने करियर के दौरान उज्जवल ने क्रिकेट, फुटबॉल, प्रो कबड्डी लीग, महिला क्रिकेट, रणजी ट्रॉफी, झारखंड प्रीमियर लीग (JPL) और अन्य प्रमुख खेल आयोजनों की व्यापक कवरेज की है. वह मैच रिपोर्ट, खिलाड़ियों की प्रोफाइल, रिकॉर्ड्स एवं आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण, एक्सप्लेनर, विशेष फीचर स्टोरी और खेल जगत से जुड़े विषयों पर नियमित लेखन करते हैं. उनकी विशेष रुचि डेटा-आधारित खेल विश्लेषण और जटिल खेल विषयों को सरल एवं रोचक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में है.

पेशेवर सफर

प्रभात खबर से पहले उज्जवल नवभारत, CricTracker, स्पोर्ट्स तक (इंडिया टुडे ग्रुप), जनसत्ता और एपीएन न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू खिलाड़ियों, कोचों, खेल प्रशासकों और स्पोर्ट्स कमेंटेटरों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं. डिजिटल पत्रकारिता, रियल-टाइम न्यूज कवरेज, SEO रणनीति और ऑडियंस-केंद्रित कंटेंट निर्माण उनकी प्रमुख कार्यक्षमताओं में शामिल हैं.

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शैक्षणिक रूप से उज्जवल ने संत जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी से मास कम्युनिकेशन में स्नातक तथा सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार से मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है.

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