तीरंदाजों को वीजा नहीं, अमेरिका में बस न जायें, इस आधार पर किया इनकार

Published at :06 Jun 2015 8:43 AM (IST)
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तीरंदाजों को वीजा नहीं, अमेरिका में बस न जायें, इस आधार पर किया इनकार

नयी दिल्ली, जमशेदपुर : भारतीय तीरंदाजी टीम अमेरिका में होनेवाली विश्व युवा तीरंदाजी चैंपियनशिप से शुक्रवार को हट गयी. उसके 31 सदस्यीय दल के 21 सदस्यों को इस अंदेशे के कारण अमेरिका ने वीजा देने से इनकार कर दिया गया कि वे स्वदेश वापस नहीं लौटेंगे. अमेरिका ने भारतीय तीरंदाजी टीम के खिलाड़ियों को वीजा […]

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नयी दिल्ली, जमशेदपुर : भारतीय तीरंदाजी टीम अमेरिका में होनेवाली विश्व युवा तीरंदाजी चैंपियनशिप से शुक्रवार को हट गयी. उसके 31 सदस्यीय दल के 21 सदस्यों को इस अंदेशे के कारण अमेरिका ने वीजा देने से इनकार कर दिया गया कि वे स्वदेश वापस नहीं लौटेंगे.

अमेरिका ने भारतीय तीरंदाजी टीम के खिलाड़ियों को वीजा देने से इनकार कर भारतीय खिलाड़ियों का अपमान किया है. भारतीय तीरंदाजी टीम को वीजा नहीं देने पर भारतीय अधिकारियों में काफी आक्रोश है.

अमेरिकी अधिकारियों के फैसले से नाराज भारतीय तीरंदाजी संघ (एएआइ) ने विरोध स्वरुप साउथ डैकोटा के यांकटोन में होने वाली चैंयिनशिप से हटने का फैसला किया. तीरंदाजों के अलावा भारत के जाने माने कोच कोरिया के चेई वोम लिम को भी यहां अमेरिकी दूतावास ने वीजा देने से इनकार कर दिया.

एएआइ के कोषाध्यक्ष वीरेंदर सचदेवा ने बताया, ‘हमने विरोध स्वरुप इस टूर्नामेंट से टीम हटाने का फैसला किया है. यह फैसला एएआई अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्र ने किया है, हम हालांकि वीजा के लिए पुन: आवेदन कर चुके हैं.’ भारतीय टीम में अंडर 20 लड़के और लड़कियां हैं. जूनियर तीरंदाजों को कल अमेरिका रवाना होना था. चैंपियनशिप का आयोजन आठ से 14 जून तक होना है.

यहां अमेरिकी दूतावास ने सिर्फ सात तीरंदाजों, दो कोचों और भारतीय खेल प्राधिकरण के एक अधिकारी को वीजा दिया, जबकि 21 अन्य को वीजा देने से इनकार कर दिया जिससे भारत के टूर्नामेंट में हिस्सा लेने पर सवालिया निशान लग गया था.

लिम के अलावा भारतीय कोचों मिम बहादुर गुरंग, चंद्रशेखर लागुरी, राम अवधेश और मालिशिये पिंकी को भी वीजा नहीं मिला.

सचदेवा ने बताया कि वीजा अधिकारी इन उम्मीदवारों के इंटरव्यू से संतुष्ट नहीं था और उसे शक था कि इनमें से कई टूर्नामेंट के बाद लौटेंगे ही नहीं. सचदेवा ने कहा ,‘यह हैरान करने वाली घटना है. हमारे अधिकांश तीरंदाज असम, झारखंड, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से हैं.

अधिकांश को अच्छी अंग्रेजी नहीं आती लिहाजा वे अपनी बात ठीक से रख नहीं पाये. जब वीजा अधिकारी ने उनसे पूछा कि वे आजीविका के लिये क्या करते हैं तो उनका जवाब था कि हम तीरंदाज हैं और तीरंदाजी ही करते हैं.’ उन्होंने कहा ,‘इससे वीजा अधिकारी को शक हुआ होगा जिससे उसने वीजा देने से इनकार कर दिया. लेकिन मेरी समझ में नहीं आता कि लिम को वीजा क्यों नहीं दिया गया. वह तो विश्व तीरंदाजी में जाना माना नाम है और दुनिया भर में घूम चुका है.’

सचदेवा ने कहा कि इससे भी हैरानी भरी बात तो यह है कि अमेरिकी तीरंदाजी संघ से भारत को न्यौता मिला था और भारत सरकार ने इसे मंजूरी दी थी लेकिन इसके बाद भी वीजा नहीं दिये गए. उन्होंने कहा कि तीरंदाजी संघ ने विदेश मंत्रालय और खेल मंत्रालय से भी संपर्क किया लेकिन मसला हल नहीं हो सका.

झारखंड के तीन खिलाड़ी व एक कोच हैं भारतीय तीरंदाजी टीम में: अमेरिका जानेवाली भारतीय तीरंदाजी में झारखंड के तीन तीरंदाज और एक प्रशिक्षक शामिल हैं.

सरायकेला के तीरंदाज शहंशाह बिरुली व टाटा आर्चरी एकेडमी (टीएए) की प्राची सिंह (राजस्थान) और अंकिता भगत (बंगाल) को भारतीय टीम में चुना गया है. वहीं बोकारो, झारखंड के प्रशिक्षक राम अवधेश सिंह भी टीम में हैं. श्री सिंह टीएए के प्रशिक्षक हैं.

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