भारत के नाम 564 कॉमनवेल्थ मेडल, लेकिन इस खिलाड़ी का रिकॉर्ड अब भी कायम… जानिए कौन है वो दिग्गज

महान निशानेबाज जसपाल राणा (एक्स)
Jaspal Rana Commonwealth Games Record: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए 564 मेडल आए हैं, लेकिन एक रिकॉर्ड ऐसा है जो महान निशानेबाज जसपाल राणा के नाम दर्ज है. उन्होंने चार गेम्स में 15 मेडल जीते, जिनमें 9 गोल्ड शामिल हैं. यह रिकॉर्ड आज भी कायम है.
Jaspal Rana Commonwealth Games Record: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. 23 जुलाई से स्कॉटलैंड के ग्लासगो में इस बड़े खेल आयोजन का आगाज होगा. भारत इस बार 126 खिलाड़ियों के मजबूत दल के साथ मैदान में उतरेगा और मेडल टेबल में बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद लगाए बैठा है. भारत ने साल 1934 में पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया था. तब से लेकर अब तक भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 564 मेडल जीते हैं. इस लंबे सफर में एक ऐसा रिकॉर्ड भी है, जिसे आज तक कोई भारतीय खिलाड़ी नहीं तोड़ पाया है. यह रिकॉर्ड महान निशानेबाज जसपाल राणा के नाम दर्ज है.
चार कॉमनवेल्थ गेम्स में जीते 15 मेडल
जसपाल राणा कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत के सबसे सफल व्यक्तिगत एथलीट रहे हैं. उन्होंने 1994 से 2006 तक कुल चार कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया और इस दौरान 15 मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. उनके 15 मेडल में 9 गोल्ड, 4 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं. इतने ज्यादा मेडल जीतने का रिकॉर्ड आज तक किसी दूसरे भारतीय खिलाड़ी के नाम नहीं हो सका है.
1994 कोलंबिया गेम्स से शुरू हुआ शानदार सफर
जसपाल राणा ने 1994 में अपने पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में ही अपनी प्रतिभा साबित कर दी थी. उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीता था. इसके अलावा पेयर इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया. वहीं, सेंटर फायर पिस्टल के व्यक्तिगत और पेयर दोनों मुकाबलों में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर अपने कॉमनवेल्थ करियर की शानदार शुरुआत की थी.
1998 मलेशिया में फिर दिखाया दम
1998 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भी जसपाल राणा का शानदार प्रदर्शन जारी रहा. उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल के व्यक्तिगत और पेयर इवेंट में सिल्वर मेडल अपने नाम किए. इसके अलावा सेंटर फायर पिस्टल के व्यक्तिगत और पेयर दोनों मुकाबलों में गोल्ड जीतकर उन्होंने अपनी बादशाहत कायम रखी.
2002 मैनचेस्टर गेम्स रहे सबसे यादगार
साल 2002 में इंग्लैंड के मैनचेस्टर में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स निशानेबाज जसपाल राणा के करियर के सबसे शानदार टूर्नामेंट्स में से एक रहे, जहां उन्होंने कुल छह पदक अपने नाम किए। उन्होंने इस प्रतियोगिता में चार गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा, जिसमें 25 मीटर पिस्टल (व्यक्तिगत और पेयर इवेंट) तथा सेंटर फायर पिस्टल (व्यक्तिगत और पेयर इवेंट) के मुकाबले शामिल हैं. इसके अलावा, उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल के पेयर इवेंट में सिल्वर मेडल और इसी स्पर्धा के व्यक्तिगत मुकाबले में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया.
2006 मेलबर्न में खत्म किया शानदार सफर
2006 के मेलबर्न कॉमनवेल्थ गेम्स में जसपाल राणा ने अपने करियर का आखिरी मुकाबला खेला. उन्होंने पुरुषों की सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता और कॉमनवेल्थ गेम्स के अपने सफर का अंत किया.
भारतीय शूटिंग के बड़े नामों में शामिल थे जसपाल राणा
जसपाल राणा सिर्फ कॉमनवेल्थ गेम्स के रिकॉर्ड के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान देने के लिए भी याद किए जाते हैं. वह कई युवा निशानेबाजों के मार्गदर्शक रहे. पेरिस ओलंपिक 2024 के दौरान वह स्टार शूटर मनु भाकर के निजी कोच भी रहे थे. उनके मार्गदर्शन में मनु भाकर ने ओलंपिक में दो ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया था.
दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन
जसपाल राणा का निधन 12 जून को दिल का दौरा पड़ने के कारण हुआ था. वह जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप से भारतीय शूटिंग टीम के साथ लौट रहे थे, तभी फ्लाइट में उनकी तबीयत खराब हो गई थी. नई दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनके दिल में ब्लॉकेज को हटाने के लिए सर्जरी की. हालांकि, इलाज के कुछ दिनों बाद उनका निधन हो गया. जसपाल राणा भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन भारतीय खेल इतिहास में उनका नाम हमेशा एक महान निशानेबाज और रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ी के रूप में याद किया जाएगा.
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By ऋतु राज
ऋतुराज प्रभात खबर डिजिटल में स्पोर्ट्स कंटेंट राइटर हैं. लीची की नगरी मुजफ्फरपुर (बिहार) से ताल्लुक रखने वाले ऋतुराज के पास डिजिटल खेल पत्रकारिता में 1 साल का गहरा अनुभव है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से साल 2025 में मीडिया रिसर्च में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. खेल की हर छोटी-बड़ी और वायरल होती खबरों पर पैनी नजर रखना उनकी खासियत है. उनका मुख्य लक्ष्य प्रभात खबर के पाठकों तक खेल जगत की हर सटीक और विश्लेषण से भरी खबर सबसे पहले पहुंचाना है. पढ़ने और क्रिकेट खेलने के शौकीन ऋतुराज खेल को सिर्फ कवर नहीं करते, बल्कि उसकी बारीकियों को जीते हैं.
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