SA vs AUS : दक्षिण अफ्रीका ने टाॅस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया,विजेता टीम फाइनल में भारत के साथ खेलेगी
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 16 Nov 2023 2:06 PM
दक्षिण अफ्रीका के कप्तान टेम्बा बावुमा ने टाॅस जीतने के बाद कहा कि हम पहले बल्लेबाजी करेंगे. उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं जिसका मैंने सपना देखा था, लेकिन हम विश्व कप का सेमीफाइनल खेल रहे हैं और हमारे सामने ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम है, यह हमारे लिए बहुत मायने रखता है.
South Africa vs Australia, 2nd Semi-Final : विश्व कप 2023 के दूसरे सेमीफाइनल में आज दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच मुकाबला होना है. इस मुकाबले की विजेता टीम 19 नवंबर को भारत के साथ विश्व कप 2023 का फाइनल मुकाबला खेलेगी. कोलकाता के ईडन गार्डन मैदान में यह मैच खेला जाना है. दक्षिण अफ्रीका ने टाॅस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया है.
दक्षिण अफ्रीका के कप्तान टेम्बा बावुमा ने टाॅस जीतने के बाद कहा कि हम पहले बल्लेबाजी करेंगे. उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं जिसका मैंने सपना देखा था, लेकिन हम विश्व कप का सेमीफाइनल खेल रहे हैं और हमारे सामने ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम है, यह हमारे लिए बहुत मायने रखता है. उन्होंने बताया कि टीम में एक बदलाव हुआ, शम्सी के जगह पर एनगिडी आए हैं.
ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस ने कहा कि हम भी पहले बल्लेबाजी करते. कमिंस ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका की टीम काफी हद तक एक जैसी शैली में खेलती है, उन्होंने पिछले कुछ मैचों में जीत हासिल की है, हम उतना बेहतर नहीं खेल सके. हमारे पास काफी अनुभव है, हम बेहतर खेल दिखाएंगे. हमारी टीम में दो बदलाव हुए हैं स्टोइनिस और एबॉट बाहर हुए हैं और मैक्सवेल और स्टार्क को टीम में जगह दी गई है.
दक्षिण अफ्रीका (प्लेइंग इलेवन): क्विंटन डी कॉक (विकेटकीपर), टेम्बा बावुमा (कप्तान), रासी वान डेर डुसेन, एडेन मार्कराम, हेनरिक क्लासेन, डेविड मिलर, मार्को जानसन, केशव महाराज, गेराल्ड कोएत्ज़ी, कैगिसो रबाडा, तबरेज़ शम्सी
ऑस्ट्रेलिया (प्लेइंग इलेवन): ट्रैविस हेड, डेविड वार्नर, मिशेल मार्श, स्टीवन स्मिथ, मार्नस लाबुशेन, ग्लेन मैक्सवेल, जोश इंगलिस (डब्ल्यू), पैट कमिंस (सी), मिशेल स्टार्क, एडम जम्पा, जोश हेजलवुड.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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