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Vijay Hazare Trophy: हार्दिक पांड्या की मुश्किलें बढ़ीं, पहले टीम इंडिया से बाहर, अब विजय हजारे से हुए अलग

Updated at : 07 Dec 2021 6:35 PM (IST)
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Hardik Pandya

Hardik Pandya

हार्दिक पांड्या पिछले तीन साल में बमुश्किल ही बड़ौदा की ओर से खेल पाये हैं. 2019 में सर्जरी के बाद से पांड्या अच्छी स्थिति में नहीं हैं.

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टीम इंडिया से बाहर चल रहे ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहा है. खराब प्रदर्शन और फिटनेस की वजह से पहले भारतीय टीम से बाहर हुए, अब विजय हजारे ट्रॉफी (Vijay Hazare Trophy) से भी अपना नाम वापस ले लिया.

उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि वह गेंदबाजी फिटनेस हासिल करने के लिए कड़ी रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया से गुजर रहे हैं. खबर है कि बड़ौदा क्रिकेट संघ ने विजय हजारे ट्रॉफी के लिए उपलब्धता के बारे में पूछते हुए हार्दिक पांड्या को ईमेल किया गया था.

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जिसके जवाब में ऑलराउंडर खिलाड़ी ने एक लाइन में जवाब दिया और लिखा, वह अभी मुंबई में रिहैबिलिटेशन से गुजर रहा है. मालूम हो हार्दिक पांड्या पिछले तीन साल में बमुश्किल ही बड़ौदा की ओर से खेल पाये हैं. 2019 में सर्जरी के बाद से पांड्या अच्छी स्थिति में नहीं हैं.

घरेलू क्रिकेट खेले बिना हार्दिक पांड्या की टीम इंडिया में वापसी मुश्किल

मीडिया रिपोर्ट की अगर मानें तो, मौजूदा राष्ट्रीय चयन समिति ने उन सभी खिलाड़ियों को जो भारतीय टीम का हिस्सा नहीं है, कह दिया है कि वे घरेलू क्रिकेट- हजारे और रणजी ट्रॉफी में खेलें. ऐसी खबर है कि बिना घरेलू क्रिकेट खेले बाहर चल रहे खिलाड़ियों की टीम इंडिया में वापसी मुश्किल है.

मुंबई में रिहैबिलिटेशन के बावजूद हार्दिक को राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में वहां के कोच के समक्ष फिटनेस साबित करनी होगी और इसके बाद ही राष्ट्रीय टीम में चयन के लिए उनके नाम पर विचार किया जाएगा.

टी20 और वनडे में फोकस करेंगे हार्दिक पांड्या

ऐसी खबर है कि करियर को लंबा खींचने के लिए हार्दिक पांड्या अब टेस्ट क्रिकेट में खेलने के इच्छुक नहीं हैं और मुख्य रूप से टी20 और एकदिवसीय क्रिकेट पर ध्यान देंगे लेकिन इसके लिए उन्हें नियमित रूप से गेंदबाजी शुरू करने की जरूरत है.

राहुल द्रविड़ के कोच बनते ही अनिवार्य हुआ फिटनेस टेस्ट

एक समय था जब भारतीय खिलाड़ियों को एनसीए से फिटनेस प्रमात्र पत्र लेना होता था लेकिन तत्कालीन क्रिकेट निदेशक राहुल द्रविड़ के प्रभार संभालने के बाद यह प्रक्रिया बदल गई. द्रविड़ ने प्रत्येक खिलाड़ी के लिए एनसीए में आकर कोच, ट्रेनर और फिजियो के समक्ष जरूरी फिटनेस परीक्षण के लिए पेश होना अनिवार्य कर दिया और इसके बाद ही उन्हें मैचों में खेलने की स्वीकृति दी जाती है. श्रेयस अय्यर को भी एनसीए में एक हफ्ता बिताने के बाद इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने की स्वीकृति दी गई थी.

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