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फिरोजशाह कोटला पर विश्व टी20 मैचों की मेजबानी का रास्ता साफ?

Updated at : 08 Mar 2016 8:01 PM (IST)
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फिरोजशाह कोटला पर विश्व टी20 मैचों की मेजबानी का रास्ता साफ?

नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज कहा कि स्वीकृति देना पूरी तरह से संबंधित अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में है जिससे फिरोजशाह कोटला मैदान पर विश्व टी20 मैचों की मेजबानी का रास्ता साफ होता लग रहा है. न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विभू बाखरु की पीठ ने कहा, ‘‘स्वीकृति देना पूरी तरह से […]

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नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज कहा कि स्वीकृति देना पूरी तरह से संबंधित अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में है जिससे फिरोजशाह कोटला मैदान पर विश्व टी20 मैचों की मेजबानी का रास्ता साफ होता लग रहा है.

न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विभू बाखरु की पीठ ने कहा, ‘‘स्वीकृति देना पूरी तरह से संबंधित एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में है और यह अदालत ना तो इनकार कर रही है और ना ही स्वीकृति दे रही है.” पीठ ने कहा कि इस आदेश को ऐसे नहीं समझा जाए कि यह अदालत मामले में हस्तक्षेप कर रही है.
दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) ने पीठ से कहा था कि उसने स्टेडियम के लिए डीडीसीए को कब्जा प्रमाण पत्र दे दिया है और वह पूरी तरह से संतुष्ट है कि 2005 में स्वीकृत योजना से हटकर किए गए निर्माण को ठीक कर लिया गया है जिसके बाद अदालत ने यह आदेश दिया.
एसडीएमसी ने हालांकि साथ ही स्पष्ट किया कि कब्जा प्रमाण पत्र आरपी मेहरा ब्लाक को छोड़कर पूरे स्टेडियम के लिए जारी किया गया है. आरपी मेहरा ब्लाक संरक्षित स्मारक के 100 मीटर के दायरे में आता है और इससे भारतीय पुरातत्व विभाग की स्वीकृति नहीं मिली है.
पीठ ने कहा कि आरपी मेहरा ब्लाक के मुद्दे को सुलझाना डीडीसीए और एसडीएमसी पर निर्भर करता है. डीडीसीए की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव नायर और वकील संग्राम पटनायक ने अदालत से कहा कि वे 30 जून तक ब्लाक के लिए स्वीकृति हासिल करने की कोशिश करेंगे या फिर इसे ध्वस्त कर देंगे और उन्हें ऐसा करने में कोई हिचकिचाहट नहीं है.
एसडीएमसी के वकील गौरांग कंठ ने कहा कि ब्लाक के लिए स्वीकृति नहीं ली गई और अगर डीडीसीए इसमें सुधार नहीं करता तो निगम संघ को कारण बताओ नोटिस जारी करने का प्रस्ताव रखता है. इस बीच दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने पूछा कि स्टेडियम के भीतर मौजूद आरपी मेहरा ब्लाक बिना स्वीकृति के लिए बना है तो एसडीएमसी ने कब्जा प्रमाण पत्र कैसे जारी किया.
उन्होंने कहा, ‘‘कब्जा प्रमाण पत्र पूरे स्टेडियम के लिए होना चाहिए.” दलीलें सुनने के बाद अदालत ने एसडीएमसी से पूछा कि स्वीकृति नहीं होने के बावजूद आरपी मेहरा ब्लाक अब तक कैसे खड़ा है. पीठ ने इस मामले को अगली सुनवाई के लिए एक अप्रैल को रखा है और डीडीसीए को निर्देश दिया है कि संघ के संचालन को देखने के लिए उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति मुकुल मुदगल की सिफारिशों को माना जाए.
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