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विश्वकप में भारत की कमजोरी बनेगा गेंदबाजी : चैपल

Updated at : 07 Feb 2015 1:27 AM (IST)
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विश्वकप में भारत की कमजोरी बनेगा गेंदबाजी : चैपल

नयी दिल्ली : पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान इयान चैपल का मानना है कि गेंदबाजी भारत के लिये चिंता का सबसे बड़ा विषय है तथा मौजूदा चैंपियन को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में होने वाले विश्व कप के दौरान तेज गेंदबाजों पर निर्भर रहने के बजाय दो स्पिनरों के साथ उतरना चाहिए. चैपल ने एनडीटीवी से कहा, भारत […]

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नयी दिल्ली : पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान इयान चैपल का मानना है कि गेंदबाजी भारत के लिये चिंता का सबसे बड़ा विषय है तथा मौजूदा चैंपियन को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में होने वाले विश्व कप के दौरान तेज गेंदबाजों पर निर्भर रहने के बजाय दो स्पिनरों के साथ उतरना चाहिए.

चैपल ने एनडीटीवी से कहा, भारत के लिये गेंदबाजी सबसे बड़ी चिंता है. मेरे कहने का मतलब है कि बेहतर टीम के खिलाफ वे 300 रन गंवा सकते हैं. मैं जानता हूं कि भारत लक्ष्य का अच्छी तरह से पीछा करता है और उन्हें लक्ष्य का पीछा करना पसंद है लेकिन बेहतर आक्रमण के सामने यह भी मुश्किल हो सकता है. उसके गेंदबाज रन लुटाते हैं और मैंने उनमें कोई सुधार नहीं देखा है.

उन्होंने कहा, भारत को हर हाल में दो स्पिनरों को उतारना चाहिए. आर अश्विन और मुझे अक्षर पटेल पसंद है. भारत की मजबूती स्पिनर हैं. इसलिए बेहतर यही रहेगा कि भारत अपने मजबूत पक्ष के साथ उतरे. चैपल ने कहा, यदि आपके पास कुछ अच्छे स्पिनर हैं तो वे बीच के ओवरों में बल्लेबाजों को ललचाकर विकेट ले सकते हैं जैसा ऑस्ट्रेलिया के लिये नाथन लियोन करता है. इसलिए अच्छे स्पिनर आपको विकेट दिला सकते हैं. उन्होंने कहा कि भारत के तेज गेंदबाजी आक्रमण में सटीकता की कमी है तथा महेंद्र सिंह धोनी की टीम को 15 फरवरी को अपने अभियान की शुरुआत से पहले इसे सुलझाने की जरुरत है.

चैपल ने कहा, मुझे लगता है कि आपको पांच नियमित गेंदबाज चाहिए. शिखर धवन सलामी बल्लेबाज के रुप में जूझ रहा है और बिन्नी को ओपनर के रुप में लाया जा सकता है. तकनीकी रुप से बिन्नी निपुण लगता है इसलिए वह पारी की शुरुआत कर सकता है. उसका उपयोग अतिरिक्त गेंदबाज के रुप में किया जा सकता है.

उन्होंने कहा, भारत के पास कुछ अच्छे तेज गेंदबाज हैं लेकिन यदि आप तेज लेकिन गलत गेंदबाजी करते तो उसका कोई मतलब नहीं है. इसलिए यदि वे एक तेज गेंदबाज कम चुनते हैं तो बिन्नी को कुछ अतिरिक्त ओवर करने पडेंगे. लेकिन यदि वे अतिरिक्त तेज गेंदबाज के साथ उतरते हैं क्योंकि यह ऑस्ट्रेलिया है तो यह अच्छा नहीं होगा. पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने भी चैपल की बात का समर्थन किया और कहा कि 1985 की विश्व चैंपियनशिप की विजेता टीम ने किस तरह से अपने स्पिनरों का उपयोग किया था.

गावस्कर ने कहा, यदि हम 1985 की बात करें तो बाउंड्री मैदान के आखिरी छोर पर हुआ करती थी. हमने रवि शास्त्री और लक्ष्मण शिवरामाकृष्णन का उपयोग किया. इसलिए मेरा मानना है कि लेग स्पिनर उपयोगी हो सकता है. हमारे पास पटेल और अश्विन के रुप में एक तरह के स्पिनर हैं. कर्ण शर्मा ऐसे में उपयोगी साबित हो सकता था.

उन्होंने कहा, ऑस्ट्रेलिया में सीमा रेखा बडी होती हैं और यदि अश्विन ज्यादा प्रयोग किये बिना गेंदबाजी करे तो वह अच्छा साबित हो सकता है. पटेल बेहद सटीक गेंदबाजी करता है. रविंद्र जडेजा का अनुमान लगाना आसान है क्योंकि वह एक ही लाइन व लेंथ से गेंदबाजी करता है लेकिन बाउंड्री बड़ी होने के कारण स्पिनर अहम भूमिका निभाएंगे.

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