सौरव गांगुली के साथ विवाद को लेकर चर्चा में रहे ग्रेग चैपल इन दिनों झेल रहे हैं तंगहाली,कहा-हमारे जमाने में...

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 27 Oct 2023 3:26 PM

विज्ञापन

ग्रेग चैपल 2005 से 2007 तक टीम इंडिया के कोच थे और उस वक्त सौरव गांगुली टीम के कप्तान हुआ करते थे. 2005 में भारतीय टीम के कोच जाॅन राइट का कार्यकाल खत्म हुआ था. उस वक्त कोच बनने की दौड़ में क्रिकेट जगत के कई दिग्गज लाइन में थे जिनमें मोहिंदर अमरनाथ और टाॅम मूडी जैसे लोग शामिल थे

विज्ञापन

भारतीय क्रिकेट टीम के कोच रहे ऑस्ट्रेलियाई महान क्रिकेटर ग्रेग चैपल इन दिनों वित्तीय संकट से गुजर रहे है. ग्रेग चैपल ने खुद इस बात का खुलासा किया है कि वे वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं और उनके मित्र उनकी मदद के लिए ऑनलाइन अभियान चलाकर पैसे जुटा रहे हैं. चैपल ने न्यूज काॅर्प से बातचीत में बताया कि मैं पैसे की घोर तंगहाली में नहीं हूं,लेकिन जिन्हें यह लगता है कि वे लग्जरी जीवन जी रहे हैं वे यह पता होना चाहिए कि यह सच नहीं है.

हम विलासिता का जीवन नहीं जी रहे : ग्रेग चैपल

ऑस्ट्रेलिया के इस महान खिलाड़ी का कहना है कि आज के खिलाड़ियों को जितने पैसे मिलते हैं हमारे समय में उतने पैसे खिलाड़ियों को नहीं मिलते थे, यही वजह है कि हम विलासिता का जीवन नहीं जी पा रहे हैं. उन्होंने कई और खिलाड़ियों का जिक्र भी किया है जो तंगहाली में हैं.

ग्रेग चैपल 2005 से 2007 तक टीम इंडिया के कोच रहे

ग्रेग चैपल 2005 से 2007 तक टीम इंडिया के कोच थे और उस वक्त सौरव गांगुली टीम के कप्तान हुआ करते थे. 2005 में भारतीय टीम के कोच जाॅन राइट का कार्यकाल खत्म हुआ था. उस वक्त कोच बनने की दौड़ में क्रिकेट जगत के कई दिग्गज लाइन में थे जिनमें मोहिंदर अमरनाथ और टाॅम मूडी जैसे लोग शामिल थे, लेकिन सौरव गांगुली की पसंद ग्रेग चैपल थे इसलिए टीम प्रबंधन ने उन्हें कोच बनाया. जबकि सच्चाई यह थी कि चैपल के पास कोच का बहुत अनुभव नहीं था. लेकिन प्रबंधन ने सौरव गांगुली के कहने पर ग्रेग चैपल को कोच बनाया.

सौरव गांगुली ने प्रेस काॅन्फ्रेंस में कप्तानी छोड़ने की बात कही

चैपल कोच बने तो टीम कोई फायदा नहीं हुआ, बल्कि विवादों का सिलसिला चल पड़ा. चैपल के नेतृत्व में टीम जब श्रीलंका गई तो तो सौरव गांगुली को स्लो ओवर के लिए प्रतिबंध झेलना पड़ा और वे कुछ मैच के लिए टीम से बाहर हो गए. उस दौरान राहुल द्रविड़ ने कमान संभाली थी. राहुल कई मायनों में सफल कप्तान साबित हुए. उसके बाद जिम्बाब्वे दौरे के लिए जब टीम गई तो ग्रेग चैपल ने सौरव गांगुली से यह कह दिया कि आप कप्तानी छोड़कर बल्लेबाजी पर फोकस करें. इसकी वजह यह थी कि उन दिनों सौरव गांगुली खराब फाॅर्म में चल रहे थे. चैपल की इस सलाह से सौरव गांगुली बहुत नाराज हुए और दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि सौरव गांगुली ने प्रेस काॅन्फ्रेंस के दौरान यह कह दिया था कि उन्हें कोच ने कप्तानी छोड़ने की सलाह दी है.

चैपल का ईमेल लीक होने से मचा बवाल

टीम जब जिम्बाब्वे से भारत लौटी तो ग्रेग चैपल ने बीसीसीआई को सौरव गांगुली के बारे में एक मेल लिखा था जो लीक हो गया था. इस मेल में उन्होंने यह लिखा था कि सौरव गांगुली कप्तान बनने के लायक नहीं है. वे शारीरिक और मानसिक तौर पर कमजोर इंसान हैं. इस विवाद के बाद टीम के खिलाड़ी सौरव गांगुली के पक्ष में रहे थे और उन्होंने यह कहा था कि ग्रेग चैपल ने टीम का मनोबल तोड़ा है और उन्हें कमजोर बनाया है. 2007 में भारत जब नाॅकआउट मुकाबले से बाहर हुआ तो इस विवाद का अंत हुआ. गांगुली को द्रविड़ की कप्तानी में खेलना पड़ा और ग्रेग चैपल को कोच का पद छोड़ना पड़ा. उसके रवि शास्त्री को कोच का पदभार दिया गया था.

Also Read: Pakistan vs South Africa : पाकिस्तान आज हारा, तो सेमीफाइनल के रास्ते बंद

विज्ञापन
Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola