Asian Games 2023: कौन हैं किरण बालियान? जिसने 72 साल बाद भारत को शॉट पुट में दिलाया पहला मेडल

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Asian Games 2023: कौन हैं किरण बालियान? जिसने 72 साल बाद भारत को शॉट पुट में दिलाया पहला मेडल

Hangzhou: India’s Kiran Baliyan celebrates after winning the bronze medal in the women’s shot put event at the 19th Asian Games, in Hangzhou, China, Friday, Sept. 29, 2023. (PTI Photo/Shailendra Bhojak)(PTI09_29_2023_000360B) *** Local Caption ***

भारत को 72 साल बाद शॉट पुट में मेडल दिलाने वाली किरण बालियान एक्सीडेंटल शॉट पुटर हैं. 9 साल पहले गलती से उन्होंने शॉट पुट के जुनियर टूर्नामेंट में अपना नाम दर्ज कराया था.

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एशियाई खेलों 2023 में भारत का पदक जीतने का सिलसिला जारी है. अबतक भारत के खाते में 8 गोल्ड, 13 सिल्वर और 13 कांस्य की मदद से कुल 34 पदक आ चुके हैं. इसके अलावा कई अन्य खेलों में भारत को और भी पदक आने की संभावना है. खेल के 6ठे दिन भारत ने दो स्वर्ण , चार रजत और दो कांस्य से कुल आठ पदक अपनी झोली में डाले. जिसमें सबसे यादगार रहा शॉट पुट में किरण बालियान का पदक जीतना. उन्होंने इस स्पर्धा में भारत को 72 साल बाद पदक दिलाया.

72 साल बाद एशियाई खेलों की गोला फेंक स्पर्धा में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं किरण

एथलेटिक्स प्रतियोगिता के शुरुआती दिन किरण बालियान कांस्य पदक जीतकर 72 वर्षों में एशियाई खेलों की गोला फेंक स्पर्धा में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गयीं, उन्होंने अपने सर्वश्रेष्ठ तीसरे प्रयास में 17.36 मीटर दूर गोला फेंककर भारत का एथलेटिक्स में खाता खोला. किरण इस तरह एशियाई खेलों में महिलाओं की गोला फेंक स्पर्धा में बारबरा वेबस्टर के बाद पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय बन गयीं. मुंबई की एंग्लो-इंडियन बारबरा ने 1951 में नयी दिल्ली में एशियाड के पहले चरण में कांस्य पदक जीता था. इस स्पर्धा में दूसरी भारतीय मनप्रीत कौर 16.25 मीटर के थ्रो से पांचवें स्थान पर रहीं.

एक्सीडेंटल शॉट पुटर हैं किरण बालियान

भारत को 72 साल बाद शॉट पुट में मेडल दिलाने वाली किरण बालियान एक्सीडेंटल शॉट पुटर हैं. 9 साल पहले गलती से उन्होंने शॉट पुट के जुनियर टूर्नामेंट में अपना नाम दर्ज कराया था. किरण बालियान राजस्थान पुलिस में कार्यरत हैं और उनके पिता सतीश बालियान उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत हैं. मेरठ की रहने वाली बालियान शुरुआत में शॉट पुट खेल को लेकर उतनी इंट्रेस्टेड़ नहीं थीं. उन्होंने इस खेल में उन्हें लाने का श्रेय अपने कोच रोबिन सिंह का दिया. उन्होंने बताया, 2014 में मेरठ नॉर्थ मीट थी, जिसमें उनका नाम किसी और के स्थान पर दर्ज हो गया. उस प्रतियोगिता में तीन खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, जिसमें वो तीसरे स्थान पर रही थी. उन्होंने बताया, पहले मनोरंजन के तौर पर वो भाला फेंका करती थीं, बाद में उनके कोच ने शॉट पुट में उन्हें लाया.

सरबजोत और दिव्या ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम में रजत पदक जीता

सरबजोत सिंह और दिव्या टीएस एशियाई खेलों की 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा के फाइनल में चीन की जोड़ी से हार गए और रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा. भारत ने इन खेलों में निशानेबाजी में छह स्वर्ण, आठ रजत और पांच कांस्य समेत 19 पदक जीत लिये हैं. भारतीय जोड़ी को चीन के विश्व चैम्पियन झांग बोवेन और जियांग रेंशिन की जोड़ी ने फाइनल 16.14 से हराया. आखिरी शॉट पर 9.9 लगाने वाले 22 वर्ष के सरबजोत ने कहा ,मैं थोड़ा नर्वस था. बहुत ज्यादा दबाव था. मैंने मैच के पहले और बाद में पेट से सांस लेने का अभ्यास किया. दिव्या ने कहा , हमने अच्छा प्रदर्शन किया. फाइनल्स में अपने प्रदर्शन से मैं खुश हूं. पहले से आखिरी शॉट तक मुझे मजा आया.

दिव्या ने जीत के बाद कोच को दिया धन्यवाद

महिला दस मीटर एयर पिस्टल टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली दिव्या ने कहा , अगले साल पेरिस ओलंपिक है और मैं क्वालीफाई करने की पूरी कोशिश कर रही हूं. हमारे पास अच्छे कोच हैं जिन्हें मैं धन्यवाद देना चाहती हूं. क्वालीफिकेशन में सरबजोत ने 291 स्कोर किया जबकि दिव्या का स्कोर 286 रहा. दोनों का कुल स्कोर 577 रहा और वे क्वालीफिकेशन में चीन से एक अंक आगे रहे थे लेकिन फाइनल में चीनी जोड़ी ने बाजी मार ली.

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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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