क्रिकेट के सबसे बड़े फिक्सिंग कांड की पूरी कहानी, क्रोनिए के कबूलनामे से अजहर-जडेजा पर लगे आरोपों तक

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मोहम्मद अजहरुद्दीन और अजय जडेजा (एक्स)

भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि जुनून है। लेकिन 2000 में मैच फिक्सिंग कांड ने इस भरोसे को गहरा सदमा पहुंचाया। जानें कैसे हैंसी क्रोनिए और भारतीय क्रिकेटरों पर लगे आरोपों ने इस खेल को हिला दिया।

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cricket betting scandal: क्रिकेट को भारत में सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि जुनून माना जाता है. लेकिन साल 2000 में सामने आया मैच फिक्सिंग कांड इस भरोसे को ऐसी चोट दे गया, जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देती रही. दक्षिण अफ्रीका के कप्तान हैंसी क्रोनिए पर लगे आरोपों से शुरू हुआ यह मामला देखते ही देखते अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सबसे बड़े विवादों में बदल गया. भारतीय क्रिकेट में भी कई बड़े नाम जांच के घेरे में आए.

अप्रैल 2000 में मैच फिक्सिंग का हुआ खुलासा

मार्च 2000 की भारत-दक्षिण अफ्रीका वनडे सीरीज के बाद मैच फिक्सिंग का मामला सामने आया. अप्रैल में दिल्ली पुलिस ने हैंसी क्रोनिए और अन्य लोगों की जांच शुरू की. पुलिस ने क्रोनिए और सट्टेबाज संजय चावला की बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट भी जारी किए. इनमें खिलाड़ियों, मैचों और पैसों की बातें थीं. पहले क्रोनिए ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन जल्द ही उन्होंने अपना बयान बदल दिया.

जब कप्तान क्रोनिए ने कबूला गुनाह

जून 2000 में हैंसी क्रोनिए ने किंग कमीशन के सामने सट्टेबाजों से अपने संबंध और पैसों की बात स्वीकार की. उन्होंने बताया कि सट्टेबाजों ने मैच का नतीजा प्रभावित करने के लिए उन्हें पैसे देने की पेशकश की थी. उन्होंने मोहम्मद अजहरुद्दीन से जुड़े एक कथित संपर्क का भी जिक्र किया. हालांकि, अजहरुद्दीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया.

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भारत में शुरू हुई सीबीआई की जांच

मामला गंभीर होने पर केंद्र सरकार ने सीबीआई को जांच की जिम्मेदारी दी. 2 मई 2000 को सीबीआई ने प्रारंभिक जांच शुरू की. जांच में खिलाड़ियों, सट्टेबाजों और बिचौलियों के बीच संबंधों के साथ भारतीय क्रिकेट प्रशासन की भूमिका भी देखी गई. सीबीआई ने खिलाड़ियों, पूर्व खिलाड़ियों और अधिकारियों से पूछताछ की और फोन रिकॉर्ड व अन्य दस्तावेजों की जांच की.

अजहरुद्दीन, अजय जडेजा समेत कई नामों पर आरोप

सीबीआई की 2000 की रिपोर्ट में मोहम्मद अजहरुद्दीन, अजय जडेजा, अजय शर्मा समेत अन्य खिलाड़ियों पर सट्टेबाजों से कथित संपर्क के आरोप दर्ज थे.

  • अजहरुद्दीन पर मैच प्रभावित करने के बदले पैसे लेने और जडेजा पर मैच से जुड़ी जानकारी साझा करने के आरोपों का उल्लेख था.
  • हालांकि, इन आरोपों का संबंधित खिलाड़ियों ने खंडन किया था और रिपोर्ट में दर्ज हर आरोप को स्वीकार नहीं किया गया था.

सट्टेबाजों का नेटवर्क कितना बड़ा था?

इस कांड ने दिखाया कि क्रिकेट में सट्टेबाजी अब सिर्फ दर्शकों का खेल नहीं रही थी, बल्कि एक संगठित नेटवर्क बन चुकी थी. सीबीआई ने मोबाइल फोन और तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को भी गंभीर समस्या बताया. जांच में पता चला कि सट्टेबाजों के लिए मैच के नतीजे के अलावा टीम, पिच, मौसम और खिलाड़ियों की अंदरूनी जानकारी भी बहुत कीमती थी.

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एशिया कप में अजहर और जडेजा का आखिरी मुकाबला

3 जून 2000 को ढाका में भारत-पाकिस्तान के बीच एशिया कप का मुकाबला हुआ. यह मैच अजहरुद्दीन और अजय जडेजा का भारत के लिए आखिरी मैच साबित हुआ. छह महीने बाद हैंसी क्रोनिए के फिक्सिंग खुलासे में दोनों के नाम सामने आए. इसके बाद बीसीसीआई ने अजहर पर आजीवन और जडेजा पर 5 साल का बैन लगाया. हालांकि, बाद में अदालत ने दोनों पर लगा बैन हटा दिया.

सिर्फ मैच हारना ही ‘फिक्सिंग’ नहीं था

2000 की सीबीआई जांच में मैच फिक्सिंग का मतलब सिर्फ मैच हारना या जीतना नहीं था. इसमें जानबूझकर खराब खेलना, अपने मैच पर सट्टा लगाना, टीम या पिच की अंदरूनी जानकारी देना और पिच को प्रभावित करना भी शामिल था. इससे क्रिकेट की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा हुआ. लोगों को डर था कि मैदान पर होने वाला खेल कहीं पर्दे के पीछे पैसों के हिसाब से तो नहीं चल रहा था.

फिक्सिंग कांड के बाद बदले क्रिकेट के नियम

2000 का फिक्सिंग कांड सिर्फ एक विवाद नहीं रहा. इसके बाद खिलाड़ियों की निगरानी, भ्रष्टाचार रोकने और सट्टेबाजी पर नजर रखने के नियमों को मजबूत किया गया. यह भी समझा गया कि खिलाड़ियों के मैदान के बाहर के संपर्कों और पैसों से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है.

2000 की घटना आज भी क्यों याद की जाती है?

इस कांड ने क्रिकेट प्रशंसकों को दिखाया कि मैच के साथ-साथ पैसों का भी बड़ा खेल चल रहा था. हैंसी क्रोनिए की स्वीकारोक्ति, सीबीआई जांच और बड़े खिलाड़ियों पर लगे आरोपों ने क्रिकेट जगत को हिला दिया. बाद में कई फिक्सिंग के मामले सामने आए, लेकिन साल 2000 का कांड क्रिकेट में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का एक बड़ा मोड़ साबित हुआ.

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ऋतु राज

लेखक के बारे में

By ऋतु राज

ऋतुराज प्रभात खबर डिजिटल में स्पोर्ट्स कंटेंट राइटर हैं. लीची की नगरी मुजफ्फरपुर (बिहार) से ताल्लुक रखने वाले ऋतुराज के पास डिजिटल खेल पत्रकारिता में 1 साल का गहरा अनुभव है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से साल 2025 में मीडिया रिसर्च में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. खेल की हर छोटी-बड़ी और वायरल होती खबरों पर पैनी नजर रखना उनकी खासियत है. उनका मुख्य लक्ष्य प्रभात खबर के पाठकों तक खेल जगत की हर सटीक और विश्लेषण से भरी खबर सबसे पहले पहुंचाना है. पढ़ने और क्रिकेट खेलने के शौकीन ऋतुराज खेल को सिर्फ कवर नहीं करते, बल्कि उसकी बारीकियों को जीते हैं.

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