वैनायकी गणेश चतुर्थी फरवरी में कब है? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और राहुकाल

Updated at : 08 Feb 2026 2:30 PM (IST)
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Vinayaka Chaturthi 2026

भगवान गणेश जी

Vinayak Chaturthi 2026: हर माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली यह तिथि भगवान गणेश की दिव्य ऊर्जा से जुड़ने का दिन है, इस दिन वैनायकी चतुर्थी व्रत रखने का विधान है. फरवरी में वैनायकी चतुर्थी तिथि 21 फरवरी 2026 दिन शनिवार को पड़ रही है. शनिवार का दिन होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है.

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Vinayak Chaturthi 2026: वैनायकी गणेश चतुर्थी हर महीने के शुक्ल पक्ष (चंद्रमा के बढ़ते हुए पक्ष) की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है, जो भगवान गणेश (विघ्नहर्ता) को समर्पित है. ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: ने बताया कि फरवरी में वैनायकी चतुर्थी 21 फरवरी 2026 दिन शनिवार को है. वैनायकी चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से भी जानी जाती है. इस दिन गणेश जी को मोदक, दूर्वा और लाल फूल चढ़ाए जाते हैं. शास्त्र के अनुसार इस दिन चंद्रमा के दर्शन से बचना चाहिए.

वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त

वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी 21 फरवरी 2026 दिन शनिवार को है.
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – 20 फरवरी 2026 को सुबह 03 बजकर 05 मिनट पर
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि समाप्त – 21 फरवरी 2026 को दोपहर 01 बजकर 30 मिनट पर
वैनायकी व्रत पूजा का शुभ समय – 21 फरवरी को सुबह 07 बजकर 46 मिनट से 09 बजकर 12 मिनट तक
व्रत पारण का शुभ समय – 22 फरवरी को की सुबह 07 बजकर 45 मिनट से 12 बजकर 03 मिनट तक

नक्षत्र और योग

नक्षत्र: रेवती नक्षत्र रात 07 बजकर 41 मिनट तक रहेगा, उसके बाद अश्वनी नक्षत्र प्रारंभ होगा.
योग: शुभ योग शाम 04 बजकर 41 मिनट तक रहेगा, उसके बाद शुक्ल योग प्रारंभ होगा.

वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी पर शुभ समय (मुहूर्त)

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 41 मिनट से 12 बजकर 25 मिनट तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 05 मिनट से 02 बजकर 49 मिनट तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 47 मिनट से 05 बजकर 33 मिनट तक

वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी पर अशुभ समय

राहुकाल: सुबह 09 बजकर 11 मिनट से 10 बजकर 37 मिनट तक
यमगण्ड: दोपहर 01 बजकर 29 मिनट से 02 बजकर 55 मिनट तक
गुलिक काल: सुबह 06 बजकर 19 मिनट से 07 बजकर 45 मिनट तक

वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत से पहले जानें जरुरी बातें

  • प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को ‘वैनायकी गणेश चतुर्थी’ व्रत रखा जाता है.
  • इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से कार्यों में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं.
  • वैनायकी चतुर्थी की पूजा मुख्य रूप से दोपहर के समय की जाती है.
  • इस दिन व्रत करने से भगवान गणेश बुद्धि, रिद्धि-सिद्धि और अपार ज्ञान का आशीर्वाद देते हैं.
  • वैनायकी चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना शुभ नहीं माना जाता है.

वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत पूजा विधि

  • वैनायकी चतुर्थी की सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
  • पूजा स्थल की सफाई करने के बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें.
  • भगवान गणेश की प्रतिमा को एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करें.
  • गणेश जी को जल, दूध, और फिर शुद्ध जल (गंगाजल) से स्नान कराएं.
  • भगवान गणेश जी को लाल सिंदूर और पीले चंदन का तिलक लगाएं.
  • गणेश जी को लाल रंग के फूल और दूर्वा अर्पित करें. लाल रंग उन्हें विशेष प्रिय है.
  • भगवान को उनके प्रिय मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं.
  • पूजा के अंत में वैनायकी गणेश चतुर्थी की व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें.
  • शुद्ध घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश जी की आरती करें.

ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु:
ज्योतिष एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ | 12 साल का अनुभव
Mo- +91 8620920581

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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